'अदिति यादव के साथ इस हरकत के पीछे सपाई ही हैं', FIR से BJP नेता के दावे तक, अखिलेश की बेटी का क्या है विवाद?

Aditi Yadav Controversy: उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय एक नया भूचाल आ गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की बड़ी बेटी अदिति यादव को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने बेहद भ्रामक, झूठी और अपमानजनक बातें लिख दीं।

यह मामला सामने आते ही यूपी की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस पूरे विवाद के बाद न सिर्फ कानपुर और प्रतापगढ़ में गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बड़े नेताओं के बीच तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। राजनीति से इतर इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा और उनके सम्मान को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

Aditi Yadav Controversy

▶️कानपुर से लेकर प्रतापगढ़ तक एक्शन, 3 नामजद समेत कई पर FIR

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर 'भारत कुमार पटेल' नाम की एक प्रोफाइल से एक बेहद आपत्तिजनक पोस्ट शेयर की गई। इस भ्रामक पोस्ट में 23 साल की अदिति यादव को लेकर चोरी, आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने और देश छोड़कर विदेश भागने जैसे मनगढ़ंत और झूठे दावे किए गए थे।

इतना ही नहीं, उनकी एक तस्वीर को भी गलत तरीके से एडिट करके इंटरनेट पर फैलाया गया था। जिसमें वो किसी लड़के के साथ दिखाई दे रही हैं, जिसको लेकर दावा किया जा रहा था कि वो उस लड़के के साथ पैसे लेकर भाग गई हैं।

मामला ध्यान में आते ही समाजवादी अधिवक्ता सभा के राष्ट्रीय सचिव प्रवीण यादव ने कानपुर के साइबर क्राइम थाने में पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल से लिखित शिकायत की। इसके बाद पुलिस तुरंत एक्शन में आई। कानपुर और प्रतापगढ़ में अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की गई हैं। कानपुर में पुलिस ने तीन लोगों को नामजद किया है, जिनके नाम हैं:

  • भारत कुमार पटेल (जिसकी आईडी से पहली पोस्ट वायरल हुई)
  • नागेश्वर सिंह बघेल
  • विनोद कुमार यादव

इसके अलावा प्रतापगढ़ में 'शीतला सुजान कवि' नाम की एक सोशल मीडिया आईडी के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 336(4) और आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 66E के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस की साइबर सेल अब इस बात की डिजिटल ट्रेसिंग और फॉरेंसिक जांच कर रही है कि यह पोस्ट किस मोबाइल या कंप्यूटर से और किस लोकेशन से अपलोड की गई थी।

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▶️'गारंटी है यह किसी सपाई की ही करतूत है'-कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर का तीखा हमला

इस मामले में सबसे सनसनीखेज बयान उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर की तरफ से आया है। उन्होंने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा तो की, लेकिन साथ ही इसका सीधा ठीकरा समाजवादी पार्टी के ही कार्यकर्ताओं पर फोड़ दिया।

राजभर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अदिति यादव उनकी भी बेटी जैसी हैं, लेकिन अखिलेश यादव पूरी तरह से सिर्फ 'ट्विटर, एसी और पीसी (प्रेस कॉन्फ्रेंस)' के नेता बनकर रह गए हैं। उनमें कोई गंभीरता नहीं है।

राजभर ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा,

"बेटी अदिति यादव के खिलाफ जो घटिया हरकत हुई है, मैं गारंटी से कह सकता हूं कि जांच में उसमें भी कोई सपाई (सपा कार्यकर्ता) ही निकलेगा। इस तरह का घटिया ट्रेनिंग किसी लाल या हरी टोपी पहनने वाले मास्टर साहब की कक्षा में ही मिलता है। महिलाओं को लेकर अखिलेश यादव, चाचा शिवपाल और आजम खान के पुराने बयानों को उठाकर देख लीजिए, आपको हकीकत समझ आ जाएगी।"

उन्होंने आगे कहा,

''वैसे बेटी अदिति के मामले में किसी विनोद कुमार यादव का भी नाम सामने आ रहा है। अदिति बेटी आप पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से हम शर्मिंदा हैं। बिटिया आप से कैसे कहूं कि एक हाथ चांदी का चम्मच और दूसरे हाथ में बल्लम लेकर पैदा हुए लोगों ने राजनीति को किस गर्त में पहुंचा दिया, जो शर्मनाक है।''

राजभर ने आगे यह भी कहा कि इस मामले में 'विनोद कुमार यादव' नाम के व्यक्ति का सामने आना इस बात का इशारा है कि इसके पीछे कौन हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के लोग हमेशा अपने से नीचे के पायदान वाले लोगों को सोशल मीडिया पर गालियां दिलवाते रहते हैं और वह खुद भी अखिलेश के लोगों के इस व्यवहार के भुक्तभोगी रहे हैं।

Aditi Yadav
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▶️राजनीति से ऊपर उठकर BJP विधायक राजेश्वर सिंह ने की सख्त कार्रवाई की मांग

इस विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक और पूर्व ईडी अधिकारी राजेश्वर सिंह ने बेहद सधा हुआ और गंभीर रुख अपनाया है। उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। राजेश्वर सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में वैचारिक असहमति और राजनीतिक विरोध होना एक स्वाभाविक बात है, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि किसी के परिवार की बेटियों को निशाना बनाया जाए।

राजेश्वर सिंह ने कहा,

''सपा प्रमुख अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही बातें पूरी तरह से असत्य, भ्रामक और निंदनीय हैं। बेटियों का सम्मान और उनकी गरिमा किसी भी दलगत राजनीति या विचारधारा से बहुत ऊपर है। किसी भी व्यक्ति के परिवार की महिलाओं को झूठे प्रचार का जरिया बनाना हमारी सामाजिक मर्यादाओं के खिलाफ है। साइबर सेल और प्रशासन को इस पूरे प्रकरण की बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।''

▶️राष्ट्रीय महिला आयोग और कांग्रेस भी आई साथ, कहा-'अदिति देश की बेटी हैं'

यह मामला सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि दिल्ली तक इसकी गूंज सुनाई दे रही है। मेरठ में एक जनसुनवाई कार्यक्रम के सिलसिले में उत्तर प्रदेश पहुंचीं राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की नवनियुक्त अध्यक्षा विजया के. रहाटकर के सामने भी मीडिया ने यह मुद्दा उठाया। इस पर उन्होंने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव की बेटी भी इस देश की बेटी हैं।

किसी भी महिला या बेटी के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार या अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। उन्होंने भरोसा दिया कि यदि आयोग के पास इस संबंध में कोई भी औपचारिक शिकायत आती है, तो वे निश्चित रूप से इस पर कड़ा संज्ञान लेंगी और कार्रवाई करेंगी।

दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने भी इस पूरी घटना को 'गंदी राजनीति' का सबसे निचला स्तर करार दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने तीखा रुख अपनाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर बैठे ट्रोल्स को थोड़ी शर्म करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग आज राजनीति के चक्कर में किसी बड़े नेता की बेटी के खिलाफ इतनी नीचता पर उतर आए हैं।

उन्हें याद रखना चाहिए कि उनके घर में भी मां, बहन और बेटियां हैं। अगर आज आप दूसरों के घरों पर कीचड़ उछालेंगे, तो कल को लोग आपके घरों पर भी पत्थर मारने से पीछे नहीं हटेंगे। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के गुना में भी इस मामले को लेकर एक व्यक्ति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है।

Aditi Yadav Controversy

▶️अदिति यादव के दोस्तों ने खोला झूठ का पोल: लंदन नहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ती हैं अदिति

इस पूरे फेक न्यूज और भ्रामक प्रोपेगैंडा की पोल अदिति यादव के कॉलेज के एक सहपाठी (क्लासमेट) आदर्श यादव ने खोली है। उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर उन लोगों को करारा जवाब दिया जो सोशल मीडिया पर अदिति को लेकर झूठ फैला रहे थे। आदर्श यादव ने लिखा कि जो लोग इंटरनेट पर बैठ कर अफवाह उड़ा रहे हैं, उन्हें बुनियादी बातें भी नहीं पता हैं।

सोशल मीडिया की पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि अदिति यादव लंदन के किसी कॉलेज में हैं और वहां कोई गड़बड़ी हुई है, जबकि असलियत यह है कि वह लंदन की किसी यूनिवर्सिटी में नहीं, बल्कि भारत में ही 'दिल्ली विश्वविद्यालय' (Delhi University) में अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं। दोस्तों का कहना है कि सिर्फ राजनीतिक द्वेष निकालने के लिए एक स्टूडेंट की छवि को इस तरह खराब करना बेहद शर्मनाक है और ऐसे सभी फर्जी अकाउंट्स को ब्लॉक कर इनके पीछे बैठे लोगों को जेल भेजा जाना चाहिए।

▶️क्या राजनीति का नया हथियार बन चुकी है डिजिटल ट्रोलिंग?

इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू डिजिटल राजनीति है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया राजनीतिक लड़ाई का सबसे बड़ा मैदान बन चुका है। अब विरोध सिर्फ मंचों और रैलियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवारों, निजी तस्वीरों और व्यक्तिगत जीवन तक पहुंच जाता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी राजनीतिक नेता के परिवार के सदस्यों को निशाना बनाया जाता है, तो बहस मुद्दों से हटकर व्यक्तिगत हमलों में बदल जाती है। इससे लोकतांत्रिक विमर्श कमजोर होता है और सोशल मीडिया नफरत फैलाने का माध्यम बन जाता है।

यह विवाद सिर्फ अदिति यादव तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या राजनीतिक असहमति के नाम पर किसी की बेटी, पत्नी या परिवार को निशाना बनाना स्वीकार किया जा सकता है? चाहे पीड़ित किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, फर्जी पोस्ट, एडिटेड तस्वीरें और चरित्र पर हमला लोकतांत्रिक राजनीति के लिए खतरनाक संकेत हैं। यही वजह है कि इस मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी सार्वजनिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई है।

▶️आगे क्या होगा?

फिलहाल पुलिस साइबर जांच में जुटी हुई है और संबंधित सोशल मीडिया अकाउंट्स की पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में डिजिटल फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि पोस्ट किसने बनाई, किसने प्रसारित की और इसके पीछे क्या मंशा थी।

लेकिन इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि राजनीतिक लड़ाइयों में परिवारों को घसीटने की बढ़ती प्रवृत्ति आखिर कहां जाकर रुकेगी। अदिति यादव से जुड़ा यह मामला अब केवल एक एफआईआर की कहानी नहीं रहा, बल्कि डिजिटल राजनीति, सोशल मीडिया जिम्मेदारी और महिलाओं की गरिमा पर राष्ट्रीय बहस का विषय बन चुका है।

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