Manu Bhaker on Jaspal Rana Death: 'जसपाल राणा मेरे पिता जैसे', जब रोते हुए मनु भाकर ने कोच को लगाया था गले
Manu Bhaker on Jaspal Rana Death: पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के लिए दो पदक जीतकर इतिहास रचने वाली निशानेबाज मनु भाकर और उनके कोच जसपाल राणा (Jaspal Rana) की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई है। दिग्गज शूटर और देश के बेहतरीन हाई-परफॉर्मेंस कोच जसपाल राणा का 49 वर्ष की आयु में आकस्मिक निधन हो गया है। जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ (ISSF) विश्व कप से भारतीय दल के साथ वापस लौटते समय फ्लाइट में उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद दिल्ली में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
जब रोते हुए मनु ने गुरु जसपाल राणा को लगाया था गले (Manu Bhaker on Jaspal Rana Death)
जसपाल राणा का जाना केवल एक खेल कोच का जाना नहीं है, बल्कि उस मजबूत संबल का उठ जाना है जिसने टूट चुकी एक खिलाड़ी को दोबारा खड़ा किया। पेरिस ओलंपिक के खेल मैदान से आई वह तस्वीर आज भी हर खेल प्रेमी के जेहन में ताजा है, जब ऐतिहासिक मेडल जीतने के बाद मनु भाकर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई थीं और मैदान पर ही रोते हुए अपने गुरु जसपाल राणा के गले लग गई थीं।

मनु मानती थीं पिता समान
मनु ने कई मौकों पर खुलकर कहा था कि जसपाल सर का उनकी जिंदगी में स्थान एक कोच से कहीं बढ़कर एक पिता जैसा है। एक इंटरव्यू में जसपाल राणा की काबिलियत की तारीफ करते हुए मनु ने कहा था कि ईमानदारी से कहूं तो वह जो करते हैं, उसमें बेहद माहिर और असाधारण रूप से प्रतिभाशाली हैं। वह मेरे लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शक रहे हैं। दुनिया के लिए वे भले ही किसी के भी कोच हों, लेकिन मेरे दिल में उनका स्थान हमेशा मेरे मुख्य कोच और एक पिता समान मार्गदर्शक के रूप में रहेगा।
म्यूनिख से लौटते ही अस्पताल में कराया गया था भर्ती
निशानेबाजी के वैश्विक मंच पर भारत का परचम लहराकर जब भारतीय दल नई दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरा, तब राणा को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा के लिए ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए हार्ट में स्टेंट डालने की प्रक्रिया भी पूरी की थी, ताकि उनकी स्थिति सुधर सके, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
जूनियर स्तर से चैंपियंस तैयार करने की लेगेसी
जसपाल राणा साल 2012 से भारतीय जूनियर पिस्टल टीम के मुख्य कोच के रूप में सेवाएं दे रहे थे। उनकी सख्त और परिणाम-उन्मुख (Result-Oriented) कोचिंग का ही नतीजा था कि देश को सौरभ चौधरी, अनीश भानवाला और चिंकी यादव जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज मिले।
हाल ही में नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने उनकी योग्यताओं को देखते हुए उन्हें आधिकारिक तौर पर 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया था। खेल और कोचिंग के क्षेत्र में उनके इसी असाधारण योगदान के लिए साल 2020 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आज उनके जाने से भारतीय खेल व्यवस्था ने अपना एक सच्चा शिल्पकार खो दिया है।















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