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खेतों में ट्रेक्टर चलाते दिखे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

रायपुर, 03 मई। छत्तीसगढ़ में अक्ती तिहार के दिन से ही राज्य में खेती-किसानी की तैयारी शुरू हो जाती है। मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय अक्ती तिहार और माटी पूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने परंपरागत रूप से माटी पूजन कर खेती-किसानी के कार्यों की शुरूआत की। सीएम ने ने अक्ती तिहार के मौके पर ठाकुर देव की पूजा-अर्चना करने के साथ खेत में कुदली और ट्रैक्टर चलाकर ठाकुर देव को समर्पित अन्न से बीजा रोपण भी किया।

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इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन को छत्तीसगढ़ में बहुत शुभ दिन माना जाता है, इस दिन जिस काम की भी शुरूआत होती है, उसकी सफलता तय है। बघेल ने कहा कि माटी पूजन कार्यक्रम से हम कुदरत और धरती माता की रक्षा का संकल्प लेकर छत्तीसगढ़ में जैविक खेती को बढ़ावा देंगे। यह पर्व हमें रासायनिक खेती की जगह जैविक खेती को फिर से स्थापित करने के लिए प्रेरित करेगा। सीएम भूपेश बघेल ने इस मौके पर खेती-किसानी में जल के महत्व को देखते हुए कुंआ पूजन भी किया। सूबे के मुखिया बघेल ने प्रतीक स्वरूप बनाए गए कोठियों से अलग-अलग बीज निकालकर गांव बैगा को सौंपा।

गांव बैगा की तरफ से ठाकुर देव और गांव के अन्य देवी-देवताओं का सुमिरन कर अभिमंत्रित बीजों को मुख्यमंत्री को परसा पान से बने दोने में दिया गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि के लिए देवी-देवताओं का आह्वान कर ग्रामीण संस्कृति के अनुरूप माटी की पूजा करके चाउंर, फूल-पत्ती, हूम-धूप, नरियर धरती माता को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने बघेल ने इसके बाद पारंपरिक बाडी में कुम्हड़ा, लौकी, तोराई के बीज रोपने के बाद अन्न दान किया।

अक्ती तिहार के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने पहनावे से पूरी तरह किसान के रूप में दिखाई आए। उन्होंने कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय में आयोजित माटी पूजन के कार्यक्रम के दौरान खेतों में उतरकर ट्रैक्टर चलाते हुए जुताई की। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने सादगीपूर्ण अंदाज के लिए जाने जाते हैं। सीएम बघेल कई मंचों से यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि वे पहले एक किसान हैं। खेती-किसानी की बारीकियों को बखूबी जानते हैं। इसलिए किसानों की चिंता भी करते हैं।

सीएम भूपेश ने कहा कि आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग से चिंताग्रस्त है, सुराजी गांव योजना के तहत इस योजना को लागू कर छत्तीसगढ़ ने क्लाईमेट चेंज से निजात पाने का रास्ता तलाशा है। सीएम् ने कहा कि गौठानो में मवेशियों को सुरक्षित कर और गोबर खरीदी कर खाद तैयार किया जा रहा है। गांव में ही खाद उपलब्ध होने से ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त भी गोमूत्र से औषधि बनाने की योजना भी तैयार की गई है। इससे भी गोपालक किसानों को फायदा मिलेगा।

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अगुवाई में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परम्परा को सहेजने और आगे बढ़ाने का काम उनके मार्गदर्शन में अक्ती तिहार का आयोजन किया गया। आगामी दिनों में इसका वृहद रूप से आयोजन किया जायेगा । उन्होंने कहा कि छत्तीसगाह के एक लाख 4 हजार करोड़ रूपए के बजट में से 27 हजार करोड़ किसानों के खाते में जा रहा है। ग्रामीण इंड्रस्ट्रियल पार्क के लिए बजट में 6 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

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