छत्तीसगढ़ में शराबबंदी के वादे को लेकर नई बहस,आदिवासी क्षेत्रों में शराबबंदी नही चाहती कांग्रेस?
रायपुर, 12 फरवरी। छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी का वादा करने वाली कांग्रेस सरकार बनने के 3 साल बाद भी शराबबंदी नही करवा सकी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम के आदिवासी क्षेत्रों में शराबबंदी के संभव ना होने की बात कहने के बाद एक फिर मुद्दा गरमा गया है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के चीफ मोहन मरकाम का कहना है कि छत्तीसगढ़ में 60 प्रतिशत क्षेत्र अधिसूचित अनुसूचित बाहुल्य है, वेद और पुराण के अलावा शराब भी आदिवासी संस्कृति का हिस्सा है, इसीलिए ऐसे इलाकों में शराबबंदी करना संभव नहीं है।

60 फीसदी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में शराबबंदी संभव नहीं:मोहन मरकाम
आदिवासी विधायक होने की वजह से मोहन मरकाम अपनी संस्कृति को बेहतर समझते हैं, उनका कहना है कि आदिवासी संस्कृति में महुआ का फूल और सोमरस से तर्पण प्रक्रिया की जाती है, लिहाजा राज्य के 60 फीसदी आदिवासी क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी नही की जा सकती है। सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष होने के कारण मोहन मरकाम का बयान स्पष्ट इशारा करता है कि कांग्रेस किसी भी हालत में आदिवासी क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी लागू नही करेगी। क्योंकि अगर कांग्रेस ऐसा करती है तो उससे उसका आदिवासी वोट बैंक प्रभावित होगा। गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने जनघोषणा पत्र में जनता से छत्तीसगढ़ में पूर्ण शराबबंदी करने का वादा किया था।

कांग्रेस नहीं करना चाहती शराबबंदी:विष्णुदेव साय
इधर छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि मरकाम के बयान से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की नीयत का पर्दाफाश हो गया है कि कांग्रेस सरकार शराबबंदी लागू करने का कोई इरादा नहीं रखती। अवैध शराब से बेहिसाब कमाई हो रही है जिसका नशा सिर चढ़कर बोल रहा है।
वरिष्ठ आदिवासी नेता और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय ने सवाल उठाया कि जब चुनाव के समय शराबबंदी लागू करने गंगाजल हाथ में लिया था, तब क्या 60 फीसदी क्षेत्र अनुसूचित नहीं था? विष्णुदेव साय ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के मुंह से यह कहलवाया जा रहा है कि राज्य में 60 प्रतिशत अनुसूचित क्षेत्र है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का बयान यह जाहिर कर रहा है कि वे प्रदेश की जनता को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा से वाकिफ करा रहे हैं कि शराबबंदी लागू नहीं हो सकती। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम की यह जिम्मेदारी है कि वह कांग्रेस की सरकार से घोषणा पत्र का पालन कराएं। क्या वे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से यह पूछेंगे कि 40 फीसदी सामान्य हिस्से में शराब बंदी कब लागू करेंगे और अनुसूचित क्षेत्र में देशी विदेशी मदिरा का धंधा बंद करेंगे कि नहीं।

शराबबंदी पर क्या सोचती है छत्तीसगढ़ सरकार ?
शराबबंदी को लेकर बघेल सरकार प्रवक्ता मोहम्मद अकबर ने भी हाल में दिए अपने के बयान में कहा था कि राज्य में शराबबंदी करने के लिए सरकार ने तीन समितियां गठित की गई हैं, जिनमें विपक्ष के लोगो से भी रायशुमारी की जानी है ,लेकिन विपक्ष बैठकों में हिस्सा नहीं लेता है। मणिपुर, बिहार और केरल समेत कई प्रदेशों में पूर्ण शराबबंदी के लिए लागू व्यवस्था सफल नजर नहीं आती है। सरकार का कहना है कि कोरोनाकाल में शराब की लत लगा बैठे लोगों ने , सैनेटाइज़र और स्प्रिट का सेवन किया था,जिसके कारण उनकी मौतें हो गई थी, इसलिए पूर्ण शराबबंदी करने से पहले कई पहलुओं पर अध्ययन जरुरी है।
सूबे के मुखिया खुद शराबबंदी को लेकर स्पष्ट फैसला सुना पाने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भले ही छत्तीसगढ़ में शराबबंदी लागू करने को लेकर अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं, लेकिन साथ में यह भी कहते है कि सरकार शराब बंद करने को लेकर बिना अध्ययन के कोई निर्णय नहीं लेगी। उनका कहना है किशराबबंदी लागू कर चुके राज्यों की परिस्थितियों पर जानकारी जुटाने के साथ ,राज्य के सभी सामाजिक प्रतिनधियों की सहमति के बाद ही शराबबंदी की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। ताकि छत्तीसगढ़ में बिहार की तरह स्थिति ना बने। गौरतलब है कि हाल ही में पूर्ण शराबबंदी होने के बावजूद बिहार में नकली शराब पीने से बड़ी संख्या में लोगो की मौत हो गई थी।
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