वैकल्पिक ऊर्जा को बढ़ावा देने केंद्र का अहम फैसला, मनरेगा से स्थापित किए जा सकेंगे बायो-गैस संयंत्र
अब गांवों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानि मनरेगा कार्यों के अंतर्गत बायो-गैस संयंत्र भी स्थापित किए जा सकेंगे।
रायपुर, 8 जून। अब गांवों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानि मनरेगा कार्यों के अंतर्गत बायो-गैस संयंत्र भी स्थापित किए जा सकेंगे। भारत सरकार ने हितग्राहियों की निजी भूमि पर बनने वाले बायो-गैस संयंत्र की संपूर्ण लागत और सामुदायिक उपयोग के लिए स्थापित किए जाने वाले संयंत्रों में मजदूरी लागत को मनरेगा कामों की सूची में शामिल कर लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार से मिली जानकारी के मुताबिक केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की तरफ से भारत के राजपत्र में इस संबंध में अधिसूचना का प्रकाशन कर दिया गया है।

मिली जानकारी के मुताबिक मनरेगा के तहत निजी भूमि में बायो-गैस संयंत्र की स्थापना के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, घुमन्तू जनजाति, अधिसूचना से निकाली गई जनजातियां, सामाजिक-आर्थिक एवं जाति जनगणना-2011 की सर्वे सूची में स्वतः शामिल सूचकांक के आधार पर गरीब परिवार के रुप में शामिल और ऐसे परिवार जो किसी न किसी वंचन सूचकांक में शामिल हैं, महिला मुखिया वाले परिवार, दिव्यांग मुखिया वाले परिवार, भूमि सुधार के लाभार्थी, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभार्थी, अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम-2006 के लाभार्थी और लघु एवं सीमांत किसान परिवार प्राथमिकता के क्रम में होंगे।
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छत्तीसगढ़ पहले ही मार चुका है बाजी
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में मौजूदा भूपेश बघेल सरकार ने गोधन न्याय योजना चला रखी है , जिसमें पशु पालकों से गोबर क्रय करके गोठानों में वर्मीकंपोस्ट यानी जैविक खाद का निर्माण किया जा रहा है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी इसी दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है। केंद्र सरकार की तरफ से गोठानों के माध्यम से जैविक खाद उत्पाद को बढ़ावा दिया जाएगा।
इससे पहले लोकसभा में कृषि मामलों की स्थायी समिति ने छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना की सराहना करते हुए केंद्र सरकार को सलाह दी थी कि किसानों से मवेशियों के गोबर खरीद की ऐसी ही योजना पूरे देश के लिए आरम्भ की जानी चाहिए। इससे रोजगार के साथ ही जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। जिसके बाद अब केंद्र सरकार यूरिया आधारित उर्वरकों से निर्भरता को खत्म करने के लिए जैव उर्वरक के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है।












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