37 साल छोटी लड़की से शादी, सेल्फी से पहचान उजागर, ससुर मानते हैं भगवान, नक्सली चलपति की दिलचस्प कहानी
Naxalite Jairam Chalapathi Story: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में बीते मंगलवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई, जिसमें 16 नक्सलियों के मारे गए थे। इसी मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली जयराम उर्फ चलपति को भी मार गिराया गया था। खूंखार माओवादी नेता की प्रेम कहानी भी सामने आई है। वही उसके ससुर के बयान भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।
जयराम उर्फ चलपति छत्तीसगढ़ और ओडिशा के जंगलों में लंबे समय से सक्रिय था और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। बताया जा रहा है कि चलपति का नाम नक्सली संगठन में काफी कुख्यात था और वह 12 बॉडीगार्ड्स के साथ हमेशा रहता था। वह माओवादी संगठन के केंद्रीय समिति का सदस्य था और इसके साथ ही वह खूंखार नक्सली हिड़मा का गुरु भी था। चलपति पर तीन राज्यों, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश इनाम रखा था।

बेटी का शव नहीं मिला , जंगल होने की संभावना
गरियाबंद मुठभेड़ में चलपति का एनकाउंटर होने की सूचना मिलने के बाद उसके ससुर लक्ष्मण राव गुरुवार को रायपुर पहुंचे और उन्होंने मीडिया से बातचीत में कई आशंकाओं का इज़हार किया। राव ने कहा कि उनके परिवार को चलपति के शव के बारे में खबर अखबार से मिली।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कि उनकी बेटी का शव अब तक नहीं मिला है और उन्हें आशंका है कि वह जंगल में ही कहीं हो सकती हैं। राव ने भावुक होते हुए कहा, "मैं अपनी बेटी से एक बार मिलना चाहता हूँ, लेकिन क्या पता वह अब कहीं और हो।"
दामाद को बताया भगवान
लक्ष्मण राव ने नक्सलियों के खिलाफ चल रही सुरक्षा कार्रवाई पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा, "जंगल में जंग चल रही है। लोगों के पेट भरने वाला भगवान होता है, मैं अपने दामाद को भगवान मानता हूँ। वह घर से बाहर निकला और वापस नहीं लौटा। जान दे दी उसने।" राव की यह बात नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष को लेकर उनकी गहरी भावनाओं को दर्शाती है।
37 साल छोटी लड़की से हुआ प्यार, हाशिये पर चला गया चलपति
चलपति नक्सल संगठन के टॉप लीडरशिप का हिस्सा था। उसे नक्सलियों का मास्टर ट्रेनर भी कहा जाता था। बताया जाता है कि अपने 37 साल छोटी उम्र की लड़की के प्यार में पड़ने के बाद हाशिए पर चला गया था। माओवादी संगठन में शीर्ष पदों पर पहुंचा चलपति साल 2014-15 में अचानक संगठन में हाशिए पर पहुँच गया था, क्योंकि उसे संगठन में छोटे कैडर की अरुणा नाम की लड़की के प्यार हो गया था। उम्र में लगभग 37 साल छोटी अरुणा से साल 2014 में चलपति ने शादी कर ली। शीर्ष कैडर के नक्सल नेताओं ने इस विवाह का विरोध किया, लेकिन चलपति ने उनकी बात नहीं मानी।
यह भी पढ़ें 'तूने मुझे बुलाया शेरा वालिये', लाल चुनरी ओढ़कर फारूक अब्दुल्ला ने गाया भजन, देखें VIDEO
एक सेल्फी से हुई जयराम की पहचान
सुरक्षाबलों के मुताबिक, चलपति हमेशा अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहता था, लेकिन एक बार उसकी पत्नी के साथ खींची गई एक सेल्फी ने उसकी पहचान उजागर कर दी। इस सेल्फी से सुरक्षा बलों को उसकी पहचान करने में मदद मिली और इसके बाद उसकी खोज में तेजी आई।
दरअसल, 2016 के जून में आंध्र प्रदेश पुलिस को आजाद नामक एक गिरफ्तार नक्सली के पास से एक लैपटॉप मिला था। जब इस लैपटॉप को खंगाला गया तो उसमें चलपति और उसकी पत्नी अरुणा की तस्वीर मिली थी। कहा जाता है कि यदि पुलिस के चलपति की तस्वीर नहीं मिलती, तो उसकी पहचान करना कभी मुमकिन नहीं था।
ना जयराम ना चलपति! असली नाम तो कुछ और था
चलिए जानते हैं चलपति के बारे में कुछ और जानकारी। चलपति का असली नाम रामचंद्र रेड्डी था और वह आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले का निवासी था। पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम प्रताप रेड्डी, रामचंद्र रेड्डी, अप्पाराव, जयराम और रामू भी पाया गया। चलपति 60 साल का था और घुटनों की समस्या की वजह से वह ज्यादा चल-फिर नहीं सकता था।
वह प्रारंभ में पीपुल्स वॉर ग्रुप (PWG) में शामिल हुआ था और इसके बाद CPI (माओवादी) में उसका दबदबा बढ़ा। 2008 में ओडिशा के नयागढ़ जिले में नक्सलियों द्वारा किए गए हमले में 13 सुरक्षाकर्मी मारे गए थे और इस हमले की साजिश चलपति ने रची थी। इसके अलावा, 2011 में नक्सलियों द्वारा कंधमाल जिले में एक और पुलिस शस्त्रागार लूटने की कोशिश की गई थी, लेकिन सुरक्षाबलों ने इसे नाकाम कर दिया था।
यह भी पढ़ें मुस्लिम सांसद ने धार्मिक स्थल पर खाई बिरयानी? भाजपा नेता अन्नामलाई और IUML सांसद के नवसकनी में भिड़ंत












Click it and Unblock the Notifications