India-US Tension: 'नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं', 3 भारतीय नाविकों की मौत के बीच अमेरिकी ने दी चेतावनी
India-US Tension: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब भारत के लिए भी बड़ी चिंता का सबब बन गया है। समुद्र के एक बेहद महत्वपूर्ण रास्ते, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने एक व्यापारिक जहाज पर हमला कर दिया। इस हमले में जहाज पर काम करने वाले 3 भारतीय नाविकों (sailors) की दर्दनाक मौत हो गई है।
इस घटना के बाद भारत और अमेरिका के बीच आपसी रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। इस मुद्दे पर यूरोप के दौरे पर गए भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार, 13 जून को नए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) से फोन पर बात की

। एक तरफ जहां जयशंकर ने अपने नागरिकों की मौत पर अमेरिका के सामने बहुत कड़ा विरोध जताया, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री ने दो टूक लहजे में कह दिया कि वे ईरान से तेल का अवैध व्यापार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री की दोटूक: 'हमारे आदेश मानो, वरना भुगतना होगा अंजाम'
समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत के दौरान साफ कर दिया कि अमेरिका अपने फैसलों से पीछे नहीं हटने वाला है। उन्होंने कहा कि समुद्र के इस रास्ते पर शांति बनाए रखने के लिए अमेरिकी नौसेना तैनात है और वहां से गुजरने वाले हर देश के जहाजों को अमेरिका की बात माननी होगी। मार्को रुबियो ने चेतावनी देते हुए इस इलाके से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों को बिना कोई आनाकानी किए अमेरिकी नौसेना के आदेशों का पालन करना होगा।
अमेरिका ने ईरान की घेराबंदी कर रखी है ताकि वह अपना तेल न बेच सके। अगर कोई भी जहाज चोरी-छिपे ईरान का तेल ले जाते हुए पाया गया, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। जो जहाज अमेरिकी चेतावनी को हल्के में लेगा, उस पर अमेरिकी सेना सीधे हमला करने से परहेज नहीं करेगी।
क्या है पूरी घटना? कैसे गई 3 भारतीयों की जान?
यह पूरा विवाद इस हफ्ते तब शुरू हुआ जब 'एमटी सेटेबेलो' (MT Settebello) नाम के एक बड़े तेल टैंकर जहाज पर अमेरिकी वायुसेना ने आसमान से मिसाइल दाग दी। अमेरिका का आरोप था कि यह जहाज अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को ताक पर रखकर ईरान से तेल लोड करके ले जा रहा था। अमेरिकी नौसेना ने इसे रुकने का इशारा किया, लेकिन जब जहाज नहीं रुका, तो अमेरिकी फाइटर जेट ने सीधे जहाज के इंजन रूम को उड़ा दिया ताकि जहाज आगे न बढ़ सके।
इस जहाज को चलाने वाले क्रू के सभी 24 सदस्य भारतीय थे। मिसाइल हमले के बाद जहाज में भीषण आग लग गई, जिसमें 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। बाकी बचे 21 भारतीयों को कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस हफ्ते यह कोई पहली घटना नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास अब तक ऐसे तीन जहाजों पर अमेरिकी हमले हो चुके हैं, जिनमें भारतीय लोग काम कर रहे थे।
भारत का कड़ा रुख: एक हफ्ते में दो बार अमेरिकी राजनयिक को किया तलब
अपने नागरिकों की मौत से भारत सरकार बेहद गुस्से में है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री से फोन पर साफ-साफ कहा कि व्यापारिक जहाजों और आम नागरिकों पर इस तरह का जानलेवा हमला किसी भी हाल में सही नहीं ठहराया जा सकता। यह अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है।
शुक्रवार, 12 जून को भारतीय विदेश मंत्रालय ने दिल्ली में मौजूद सबसे सीनियर अमेरिकी राजनयिक (राजदूत की अनुपस्थिति में काम संभाल रहे अधिकारी) को दफ्तर बुलाकर अपनी गहरी नाराजगी जताई। यह इस हफ्ते में दूसरी बार था जब भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास के बड़े अधिकारी को तलब कर फटकार लगाई है। भारत ने कहा कि इस तरह के हमलों से पूरी दुनिया का समुद्री व्यापार खतरे में पड़ रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह समुद्री रास्ता?
दुनिया का लगभग 20 से 30 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार इसी 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के संकरे रास्ते से होता है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इसी रास्ते से मंगवाता है। इसके अलावा, दुनिया भर के मर्चेंट नेवी के जहाजों पर लाखों भारतीय नाविक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
ऐसे में अमेरिका और ईरान की इस जंग के बीच भारतीय जहाजों का फंसना और भारतीय नागरिकों की जान जाना भारत के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। भारत के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश में तेल की सप्लाई को बिना किसी बाधा के जारी रखने की है।














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