छत्तीसगढ़ में भूजल को बचाने की कवायद, जानिए राज्य के भूजल बिल में क्या होगा खास !
Exercise to save groundwater in Chhattisgarh, know what will be special in the state's groundwater bill!
रायपुर, 22 मार्च। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। दुनियाभर में जल संकट के बढ़ते खतरे के बीच छत्तीसगढ़ सरकार जल्द ही भू-जल के उचित प्रबंधन और सही उपयोग के लिए राज्य का भू-जल अधिनियम लाने वाली है। इस कानून का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में भू-जल के घटते स्तर में सुधार करना है।

ड्राफ्ट हो चूका है लगभग तैयार, जल्द किया जा सकता है पेश
छत्तीसगढ़ के भूजल बिल का ड्राफ्ट लगभग बनकर तैयार हो गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि विधानसभा के आगामी सत्र के दौरान इसे सदन में पेश किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस बिल के कानून बनने से, जहां भूजल स्तर सुधरने से पर्यावरण का संरक्षण होगा, वहीं किसानों को राहत मिलने के साथ ही लघु, कुटरी उद्योगों और बाकि की इंडस्ट्रियल सेक्टरों को भी फायदा होगा। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के सचिव पी अन्बलगन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में भूजल के सही प्रबंधन के लिए भूजल विधेयक लाने की तैयारी की जा रही है, इस बिल के माध्यम से राज्य में भूजल की स्थिति में सुधार किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार की तरफ से 2019 से भूजल अधिनियम को स्थापित करने की कोशिश हो रही है, लेकिन कोरोना महामारी के फैलाव और लॉकडाउन की वजह से सब कुछ थम गया था। वैसे छत्तीसगढ़ में अभी भू-जल नियंत्रण के लिए केंद्रीय अधिनियम लागू है, जिसके तहत ग्राउंड वाटर के व्यवसायिक उपयोग के लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड के प्राधिकरण से अनुमति लेनी पड़ती है।

छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व में होगी बढ़ोत्तरी
छत्तीसगढ़ राजस्व की दिक्कत यह है कि केंद्रीय भूजल कानून के जरिये लगने वाली पेनाल्टी और अन्य आय केंद्र सरकार के राजस्व में जाती है। अगर छत्तीसगढ़ अपना खुद का कानून लागू करता है, तब इससे मिला धन राज्य के राजस्व में जमा होगा। फिलहाल बिल को तैयार करने को लेकर काफी प्रगति हो चुकी है, इसका ड्राफ्ट लगभग बन चुका है, अप्रैल के मध्य तक इसे फाइनल कर लिया जायेगा। छत्तीसगढ़ विधानसभा के ग्रीष्मकालीन सत्र में भूजल से संबंधित यह बिल प्रस्तुत किया जा सकता है।

भूजल के आकंड़े हर दिन होंगे अपडेट
यह अहम् सवाल है कि सरकार भूजल नियंत्रण और प्रबंधन के लिए कानून तो ले आएगी, लेकिन भूजल की जानकारी कैसे जुटाएगी। इसका जवाब भी तैयार है। दरअसल केंद्रीय भूजल बोर्ड पहले प्री और पोस्ट मानसून के आंकड़ों के लिए सर्वे करवाकर भूजल की स्थिति जांचता रहा है, लेकिन अब वह जमीन में मौजूद पानी का स्तर डिजिटल तरीके से मॉनिटर करने वाला है। आधुनिक तरीके को अपनाने से भूजल बोर्ड हर दिन ग्राउंड वाटर की मॉनिटरिंग कर सकेगा। भूजल के आंकड़ों को हर दिन अपडेट किया जायेगा, जिससे छत्तीसगढ़ सरकार को उचित प्रबंधन के लिए राज्य के भूजल की स्थिति पता चलती रहेगी।

क्या होगा छत्तीसगढ़ के भूजल कानून में
छत्तीसगढ़ सरकार बिल लाने वाली है। वह अपने अंतिम चरण में है, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि इस बिल में क्या खास बातें हो सकती हैं। भविष्य में आने वाले भूजल अधिनियम में भूजल का उपयोग करने के लिए हितग्राहियों को पंजीयन से लेकर अनुमति तक ऑनलाइन लेनी होगी।
इस बिल में घरेलू उपभोक्ताओं को सिंचाई के लिए सरकार को कोई फीस नहीं देनी होगी। अगर कोई व्यक्ति 300 वर्ग मीटर से बड़ा घर बनाता है, तब उसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग जरुरी होगा। छत्तीसगढ़ के सभी शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग का नियम अनिवार्य किया जा सकता है। इसके अलावा सरकार की निगरानी में पंचायत लेवल पर भूजल समितियों का गठन भी किया जाना अनिवार्य किया जायेगा।
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