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छत्तीसगढ़ का खैरागढ़ उपचुनाव इन 5 वजहों से बनने वाला है खास !

दुर्ग ,21 मार्च। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव की खैरागढ़ विधानसभा के लिए होने वाला उपचुनाव कई मायनो में खास है। 4 नवंबर 2021 को जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ यानि जोगी कांग्रेस के विधायक देवव्रत सिंह ने निधन हो जाने के बाद से यह सीट खाली है। खैरागढ़ विधानसभा के लिए 12 अप्रैल को मतदान और 16 अप्रैल को मतगणना होनी है। कांग्रेस, भाजपा, जोगी कांग्रेस समेत कई अन्य दल के प्रत्याशी भी इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाएंगे। जानिए वह 5 वजह जिसके कारण खैरागढ़ उपचुनाव खास रहने वाला है।

महिला प्रत्याशियों पर खेला जा सकता है दांव

महिला प्रत्याशियों पर खेला जा सकता है दांव

देवव्रत सिंह के निधन के बाद खाली हुई खैरागढ़ विधानसभा सीट से उनकी पूर्व पत्नी पद्मा सिंह और उनकी पत्नी विभा सिंह के बीच राजपरिवार पर उनके हक और सीट पर दावेदारी से उपजे विवाद को देखते हुए यह माना जा रहा है कि अगर दिवंगत विधायक की कोई पत्नी चुनावी मैदान पर उतरती है, तब भाजपा और कांग्रेस समेत अन्य दलों को भी महिला प्रत्याशी को ही मैदान में उतारना पड़ेगा। हालांकि भाजपा और कांग्रेस ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि उनके प्रत्याशी कौन होंगे, लेकिन यह लगभग तय है कि महिला आरक्षित सीट ना होने के बावजूद खैरागढ़ की अगली विधायक महिला हो सकती हैं।

खैरागढ़ राजघराने का अस्तित्व

खैरागढ़ राजघराने का अस्तित्व

खैरागढ़ रियासत के विधानसभा बनने तक के सफर के बीच आजादी के पहले से इस स्थान पर राजघराने का ही राजनीतिक दबदबा कायम रहा है। खैरागढ़ में हुए विधानसभा चुनावों हमेशा ही जीत का सेहरा राजघराने के वारिसों के सिर पर ही बंधा है। एक जमाने में पूर्व पीएम राजीव गांधी के क्लासमेट रहे राजा शिवेंद्र बहादुर सिंह राजनांदगांव से सांसद थे। देवव्रत सिंह शिवेंद्र बहादुर सिंह के भतीजे थे। देवव्रत सिंह की मौत के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर भाजपा या कांग्रेस खैरागढ़ राजघराने से जुड़े किसी व्यक्ति को टिकट नहीं देती है, तब इस सीट से किसी नए व्यक्ति के राजनीतिक उदय होने के साथ खैरागढ़ राजपरिवार की दखल खत्म हो सकती है।

रमन,भूपेश की प्रतिष्ठा लगी है दांव पर

रमन,भूपेश की प्रतिष्ठा लगी है दांव पर

खैरागढ़ में होने वाला उपचुनाव ना केवल वहां से नामांकन दाखिल करने वाले प्रत्याशी लड़ेंगे, बल्कि छत्तीसगढ़ के मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी लड़ेंगे, यानी इस चुनाव में दोनों नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। इसकी वजह भी बेहद ही साफ है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद हुए चित्रकोट, मरवाही और दंतेवाड़ा उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की है। माना जाता है कि यह जीत मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कि अगुवाई में ही मिली है। जाहिर सी बात है छत्तीसगढ़ में टीम भूपेश बघेल अपनी जीत का सिलसिला जारी रखना चाहेगी।

वहीं खैरागढ़ रियासत जो राजनांदगांव जिले में आती है, उस राजनांदगांव सीट से पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह विधायक हैं। इतनी ही नहीं खैरागढ़ से लगा हुआ कवर्धा भी डॉ. रमन सिंह का गृह नगर होने के नाते उनके प्रभाव वाला क्षेत्र है, लिहाजा खैरागढ़ उपचुनाव को छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम और मौजूदा सीएम के बीच की जंग के तौर पर देखा जायेगा।

जोगी कांग्रेस के भविष्य का फैसला

जोगी कांग्रेस के भविष्य का फैसला

2018 के विधानसभा चुनाव से पहले देवव्रत सिंह कांग्रेस में थे। उन्होंने विधायक से लेकर संसद बनने तक का सफर कांग्रेस के साथ ही पूरा किया था, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस से मिल रही उपेक्षा के बाद उन्होंने पूर्व सीएम अजीत जोगी का क्षेत्रीय दल जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ यानी जोगी कांग्रेस ज्वाइन करके हल चलाते किसान के चिन्ह तले चुनाव लड़ा और जीत गए। 2018 के चुनाव में जोगी कांग्रेस गठबंधन ने पूरे प्रदेश में 7 सीटें जीती, लेकिन अजीत जोगी के निधन हो जाने के बाद पार्टी बिखरी हुई नजर आने लगी है। फिलहाल अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी पार्टी के कर्ताधर्ता हैं। ऐसे में इस बात पर सबकी नजर लगी हुई है कि इस चुनाव के बाद जोगी कांग्रेस अपनी सीट बचा पाती है या नहीं।

आप की एंट्री बनाएगी मुकाबले को दिलचस्प

आप की एंट्री बनाएगी मुकाबले को दिलचस्प

हाल ही में पंजाब विधानसभा चुनाव में शानदार जीत हासिल करने वाली आम आदमी पार्टी ने 2023 के अंत में होने वाले छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने का एलान किया है। दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी को खड़ा करने के लिए काफी मेहनत कर रहे हैं। खैरागढ़ उपचुनाव आप के लिए एक प्रकार से टेस्ट एग्जामिनेशन की तरह होगा। इस चुनाव में किये गए प्रदर्शन के आधार पर आम आदमी पार्टी इस बात का आंकलन बेहतर तरीके से कर पायेगी कि पंजाब की जीत का जादू वह छत्तीसगढ़ में चला सकती है या नहीं। आम आदमी पार्टी के अलावा समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी भी अपनी किस्मत आजमा सकती है।

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