CHHATTISGARH: नक्सलियों ने किया बस्तर फाइटर्स के जवान को अगवा, बीजापुर एसपी ने की रिहाई की अपील

BIJAPUR: बस्तर फाइटर्स के जवान का नक्सलियों ने बीजापुर जिले के भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उसपरी गांव से अपहरण कर लिया है। बताया जाता है कि अपहृत शंकर कुडियम जवान बीते 29 सितंबर से लापता था, जिसे ढूंढने का प्रयास भी परिजन करते रहे, लेकिन उसका कोई भी पता नहीं चल सका।

BIJAPUR NAXLI

इसके बाद एक नाटकीय घटनाक्रम की तरह गुरूवार को नक्सलियों ने प्रेस नोट जारी कर बस्तर फाइटर्स के जवान को अगवा करने की जिम्मेदारी ली है। इन हालातों में जहां परिजनों में खासी चिंता है, वहीं बीजापुर के पुलिस अधीक्षक आंजनेय वार्ष्णेय ने भी जवान को रिहा करने नक्सलियों से अपील की है।

मिली जानकारी के मुताबिक बुधवार को इस बात की खबर मिली कि बीजापुर पुलिस लाइन में पदस्थ बस्तर फाइटर्स का जवान एरमनार निवासी शंकर कुड़ियम बिना किसी सूचना के 27 सितंबर से लापता है। इसके बाद 29 सितंबर को भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के उसपरी गांव से नक्सलियों द्वारा उसे अगवा कर लिए जाने की खबरें आती रहीं, लेकिन पुलिस ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की। इधर सर्व आदिवासी समाज व जवान के परिजनों ने अपहरण की खबर मिलते ही उसे सकुशल रिहा करने नक्सलियों से अपील भी की। मामले में पुलिस की तरफ से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई।

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गुरूवार को माड़ डिवीजनल कमेटी की सचिव अनिता मंडावी के हवाले से जारी प्रेस नोट में इस बात की पुष्टि हुई कि नक्सलियों ने जवान को अगवा कर लिया। दरअसल प्रेस नोट के जरिए बस्तर फाइटर्स के गुम जवान के अपहरण की जिम्मेदारी नक्सली संगठन ने ली है। प्रेस नोट में कहा गया है कि 29 सितंबर को उसका अपहरण कर उसे अपने कब्जे में नक्सलियों ने रखा है। प्रेस नोट में ताड़मेटला में हुए कथित एनकाउंटर में शामिल पुलिस के अफसर व जवानों पर कार्रवाई की मांग कमेटी की सचिव ने की है।

इधर नक्सलियों की तरफ से प्रेस नोट जारी होने के बाद सूबे के एसपी आंजनेय वार्ष्णेय ने जवान के अगवा होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 29 सितंबर को शंकर अपने दोस्त के साथ उसपरी घाट गया हुआ था। इसके बाद उसके अपहरण की खबरें मिल रही हैं।

वार्ष्णेय ने बताया कि जिले के स्थानीय युवा क्षेत्र के विकास, सुरक्षा और शांति के लिए सरकारी नौकरी में भर्ती हो रहे हैं। स्थानीय युवा पुलिस में भर्ती होकर संवैधानिक दायरे में रहकर अपना कर्त्तव्य निभा रहे हैं। अलग-अलग मुठभेड़ों में घायल नक्सलियों को समय पर जवानों ने इलाज मुहैया करवाकर मानवता का परिचय दिया है। ऐसे में जनमानस, परिजनों व समाज की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अगवा जवान को नक्सली सकुशल रिहा करें।

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