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आदिवासियों से बड़ा हिंदू कोई नहीं, यह बताने में जुटी है BJP, छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय ने संभाला मोर्चा

Chhattisgarh Tribal Hindu: भाजपा इस नरेटिव को बदलने में लगी है,जिसमे कहा जाता रहा है कि आदिवासी समुदाय के लोग हिंदू नहीं होते हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की बातों से इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। रविवार को उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि आदिवासियों से बड़ा हिंदू कोई नहीं होता है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय खुद आदिवासी हैं। उन्होंने कहा है कि आदिवासियों के सभी ट्राइबल के त्यौहार भी सनातनी ही होते हैं। दीपावली भी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। जिसमें 2 दिन दीए जलाते हैं, एक दिन कच्चे दीए और दूसरे दिन पक्के दिये। तीसरे दिन अन्नकूट होता है, जिसमें सुबह मवेशियों को नहलाकर उनके सींगो में तेल लगाना, उनको माला पहनाना साथ ही भोजन पकाकर खिलाते है एवं पूजा करते हैं।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने कहा कि आदिवासियों से बड़ा हिंदू कोई नहीं हैं। पौष पूर्णिमा का त्योहार भी आता है जब खेती बाड़ी से भी फ्री हो जाते हैं। इस दिन बाहर पिकनिक मनाते हैं और अगले दिन घर में अच्छे व्यंजन बनाकर खाते हैं। होली का भी त्यौहार बड़े आनंद के साथ मनाते हैं, लगभग सभी त्योहार ट्राइबल में भी मनाए जाते हैं।

संघ ने बनाई पृष्ठभूमि

दरअसल छत्तीसगढ़ में वामपंथ से ताल्लुकात रखने वाला एक तबका आदिवासियों को हिंदू मानने से इंकार करता है। झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन भी इसी मत के समर्थक हैं। वहीं हाल में ऐसी चर्चा थीं कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की एक रिपोर्ट में ईसाई मिशनरीज और वामपंथी दल देशभर में आदिवासियों को उकसा रहे हैं कि वह मतगणना में खुद को गैर-हिंदू दर्ज कराएं। धर्म की जगह गोंड, कबीरपंथी या अन्य विकल्प भरें। इसे साजिश मानते हुए संघ, विश्व हिंदू परिषद के साथ मिलकर देशभर में जागरूकता अभियान भी चला रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़, झारखंड में आदिवासियों को गैर-हिंदू बताने के प्रयास किए जा रहे हैं, कितु सफल नहीं हो रहे हैं।

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नक्सलवाद के खिलाफ मुहीम तेज

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासी समाज की बहुलता है। बदकिस्मती से जंगलों में रहने वाले आदिवासी ही सशस्त्र माओवाद से जुड़ जाते हैं। विष्णुदेव साय की सरकार ने इस तिलिस्म को भी तोड़ने पर काम शुरू कर दिया है। सीएम साय ने कहा कि जबसे हमारी सरकार छत्तीसगढ़ में बनी है, तब से ही हम नक्सलवाद के खिलाफ मजबूती से लड़ाई लड़ रहे हैं। अभी तक 104 नक्सली मारे जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आगे कहा कि कुछ दिन पहले नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली, जिसमें कांकेर में एक दिन में 29 नक्सली मारे गए, बीजापुर में दस, अबुझमाड़ में दस अभी दो दिन पहले शुक्रवार को ही बारह नक्सलियों मुठभेड़ में मारे गए। फोर्स ने इन चार मुठभेड़ में ही 61 नक्सलियों को जान से हाथ धोना पड़ा। इससे पहले इतनी संख्या में कभी नक्सली नहीं मारे गए, जिनमें 20-20 लाख के इनामी नक्सली भी थे। ये हमारे लिए एक बहुत बड़ी सफलता थी। सुरक्षाबलों ने बहुत साहस के साथ ये काम किया, मैं आपके माध्यम से उनके इस जज्बे की तारीफ करता हूं, जो मजबूती के साथ नक्सलवाद से लड़ रहे हैं।

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मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार का भी छत्तीसगढ़ को बहुत फायदा मिला है। गृहमंत्री जी भी अगले एक-दो वर्षों में छत्तीसगढ़ से पूरी तरह नक्सलवाद खतम करना चाहते हैं। पर दुर्भाग्य है कि कांग्रेस और खास कर पूर्व मुख्यमंत्री इन मुठभेड़ों को फर्जी बता रहे है, जबकि नक्सली खुद लिस्ट जारी कर मुठभेड़ और नक्सली मौतो को स्वीकार किया है। कांग्रेस की ऐसी आदत ही रही है। इन लोगों ने मोदी के पाकिस्तान पर सर्जिकल और एयर स्ट्राइक पर भी सवाल खड़े किए थे। ये सब करके ये सेना और सुरक्षाबल के मनोबल घटाने का काम कर रहे हैं, जो उचित नही है।

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