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LIC IPO: एंकर निवेशकों के लिए आज से खुला LIC का आईपीओ, जानिए कौन होते हैं एंकर निवेशक

LIC IPO: एंकर निवेशकों के लिए आज से खुला LIC का आईपीओ, जानिए कौन होते हैं एंकर निवेशक

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी जीवन बीमा निगम यानी LIC 4 मई को रिटेल निवेशकों के लिए अपना IPO खोल रही है। उससे पहले आज एलआईसी का आईपीओ एंकर निवेशकों के लिए खोल दिया गया है। 2 मई को एंकर निवेशकों के लिए एलआईसी का IPO खुल गया है। इन एंकर निवेशकों इस आईपीओ में निवेश करने का मौका आम निवेशकों से पहले मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये एंकर निवेशक कौन होते हैं और क्यों जरूरी होते है?

कौन होते हैं एंकर निवेशक

कौन होते हैं एंकर निवेशक

किसी भी आईपीओ के लिए एंकर निवेशक सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, क्योंकि ये संस्थागत और शुरुआती निवेशक होते हैं। यानी जब भी कोई कंपनी अपना आईपीओ पेश करती हैं तो ये सबसे पहले एंकर निवेशकों के लिए खोला जाता है, फिर आम निवेशकों के लिए। ये एंकर निवेशक कंपनी या संस्था होती है जो दूसरे लोगों की तरफ से पैसे निवेश करते हैं। इसमें म्यूचुअल फंड, पेंशन और इंश्योरेंस कंपनियां शामिल होती है, जो किसी भी IPO का बड़ा हिस्सा खरीदज लेते हैं। अगर LIC के मामले में बात करूं तो इसके आईपीओ के लिए म्यूचुअल फंड हाउस SBI, एचडीएफसी, कोटक महिंद्रा, आदित्य बिरला और आईसीआईसी प्रूडेंशियल जैसे बड़े निवेशक एंकर निवेशक है। इसके अलावा नॉर्वे, सिंगापुर और अबुधाबी के सॉवरेन वेल्थ फंड्स भी एलआईसी आईपीओ के एंकर निवेशक है।

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    क्यों हैं जरूरी

    क्यों हैं जरूरी

    किसी भी IPO के लिए एंकर निवेशकों महत्वपूर्ण कड़ी हैं, क्योंकि ये किसी भी कंपनी के आईपीओ के बड़े हिस्से को खरीद लेते हैं। वहीं ये आम निवेशकों और आईपीओ जारी करने वाली कंपनी के बीच कड़ी का काम करते हैं। अगर किसी कंपनी के एंकर निवेशकों में बड़ी इंवेस्टमेंट कंपनियां शामिल हैं तो उस IPO का भाव बढ़ जाता है, उसकी मांग बढ़ जाती है।

    एंकर निवेशकों के लिए नियम में बदलाव

    एंकर निवेशकों के लिए नियम में बदलाव

    एलआईसी के आईपीओ के खुलने से पहले ही सेबी ने एंकर निवेशकों के लिए नियम में थोड़े बदलाव किए है। जिसके तहत अब एंकर निवेशकों को मिले शेयरों का लॉक-इन पीरियड 30 दिन कर दिया गया है। आपको बता दें कि कोई भी अपने कंपनी के विस्तार के लिए पब्लिक के बीच अपनी हिस्सेदारी बेचती है। इसके लिए वो अपना आईपीओ उतारती है। IPO के जरिए ही वो शेयर बाजार में खुद को लिस्ट कर सकती है। कंपनियां कारोबार बढ़ाने के लिए बाजार से कर्ज लेने के बजाय IPO से पैसा जुटाने पर फोकस करती है। इसके लिए वो खुद को शेयर बाजार में लिस्टेड करती हैं और फिर अपने शेयर बेचकर पैसा जुटाती है।

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