Hanuman Jayanti 2022: छत्तीसगढ़ में है एक मंदिर, जहां होती हैं हनुमान जी की स्त्री के रूप में पूजा
बिलासपुर, 16 अप्रैल। हनुमान जी की पूजा तो पूरी दुनिया में की जाती है। सम्पूर्ण भारतवर्ष भारत में हनुमान जी के कई विख्यात मंदिर हैं, लेकिन हम आपको आज एक ऐसे मंदिर के बारे में जानकारी दे रहे हैं जहां उनकी पूजा स्त्री के रूप में होती है। सुनने में थोड़ा अचरजपूर्ण जरूर लगेगा। लेकिन यह सच है कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हनुमानजी देवी के रूप में भी पूजे जाते हैं।

रतनपुर में है मंदिर
जैसा की सभी जानते हैं कि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी हैं ,माना जाता है कि इसी कारण स्त्रियां उनके मंदिर में प्रवेश तक नहीं करतीं है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हनुमान जी की पूजा एक स्त्री के रूप में ही होती है। बिलासपुर शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर धार्मिक नगरी रतनपुर के गिरजाबांध में हनुमान जी को बालरूप या बलिष्ठ पुरुष के रूप में नहीं बल्कि देवी के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर कैसे बना इसके पीछे की पौराणिक कथा भी बेहद दिलचस्प है।

मनोकामना जरूर पूरी होती है पूरी
आपने छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में बसी ऐतिहासिक धार्मिक नगरी रतनपुर के बारे में सुना होगा, जहां माता महामाया का प्रसिद्ध मंदिर है। उसी रतनपुर में भगवान हनुमान का पूजन देवी के रूप में किया जाता है। रतनपुर के गिरजाबांध में स्थित इस मंदिर के प्रति लोगों में बेहद आस्था है। मान्यता है कि कोई भी व्यक्ति अगर यहां यहां पूजा अर्चना करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

10 हजार साल पहले कुंड से निकली है प्रतिमा
रतनपुर के गिरजाबांध में यह हनुमान मंदिर को सदियों से मौजूद में है। स्थानीय लोग बताते है कि भगवान हनुमान की करीब मूर्ति दस हजार साल पुरानी है। लोककथाओं में इस बात का जिक्र होता है कि इस मंदिर का निर्माण पृथ्वी देवजू नाम के शासक ने करवाया था। रतनपुर में कई सालों तक शासन करने वाले राजा पृथ्वी देवजू भगवान हनुमान जी के भक्त थे।
कुष्ठरोग से पीड़ित होने के बाद राजा को एक बार हनुमान जी ने सपने में दर्शन देते हुए मंदिर बनवाने का निर्देश दिया ,जब मंदिर बनाकर तैयार हो गया ,तब फिर से दर्शन देकर हनुमान जी ने राजा को महामाया कुंड से मूर्ति निकाल कर मंदिर में स्थापित करने कहा। स्वप्न में मिले निर्देश के मुताबिक राजा ने जब महामाया कुंड जाकर उससे मूर्ति निकाली , तो हनुमान जी को स्त्री रूप में देखकर अचंभित हो गए। राजा ने पूरे विधि विधान से मंदिर में हनुमानजी की मूर्ति को देवी रूप में स्थापित करवाया,जिसके बाद उनकी बीमारी ठीक हो गई।












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