क्या बेटे के कारण महेश्वर हजारी होंगे नीतीश कैबिनेट से ऑउट? लगा कांग्रेस के लिए गुपचुप प्रचार करने का आरोप!
Lok Sabha Election: बिहार के समस्तीपुर लोकसभा सीट पर मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दो बेहद करीबी मंत्रियों और जेडीयू नेताओं के बच्चे इस बार चुनाव मैदान में हैं। खास बात ये है कि दोनों को ही टिकट किसी तीसरी पार्टी ने दिया है।
एक तरफ अशोक चौधरी की बेटी शांभवी हैं जिन्हें चिराग की पार्टी एलजेपी रामविलास के सिंबल मिला है। वहीं, दूसरी ओर हैं महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी हजारी जिन्हें कांग्रेस ने टिकट दिया है।
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बीते दिनों नीतीश कुमार शांभवी चौधरी के पक्ष में चुनाव प्रचार करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि महेश्वर हजारी के साथ उनके संबंधों में खटास आने की अटकलें तेज हो गईं। दरअसल, महेश्वर हजारी जेडीयू नेता हैं इस लिहाज से वो एनडीए का हिस्सा हुए। जबकि उनके सुपुत्र कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। कांग्रेस इंडिया ब्लॉक का हिस्सा है और इस वजह से पिता-पुत्र दोनों विरोधी दलों का हिस्सा हैं।
कैंडिडेट्स के ऐलान के बाद महेश्वर हजारी का बयान भी सामने आया था जिसमें वो कह रहे थे कि बेटे की जहां जाने की इक्षा हो जा सकता है उनकी निष्ठा जेडीयू के साथ रहेगी। लेकिन अब ये चर्चा तेज है कि बेटे की वजह से बिहार कैबिनेट में पिता की नैया डूब सकती है।
चुनाव प्रचार शुरू होने से पहले ये कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार अपने दोनों ही मंत्रियों को खुश रखने की कोशिश करेंगे। भले वो शांभवी के पक्ष में प्रचार करें लेकिन कांग्रेस प्रत्यासी सन्नी हजारी की ओर उनका रुख नर्म रहेगा। हालांकि, इन सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए जनसभा को संबोधित करने के दौरान नीतीश कुमार ने बिना नाम लिए महेश्वर हजारी पर निशाना साधा। उन्होंने हजारी को कैबिनेट से छुट्टी की भी चेतावनी दे दी।
नीतीश की अपने करीबी को चेतावनी!
दरअसल, महेश्वर हजारी नीतीश कुमार के पुराने सहयोगी रहे हैं। जब भी नीतीश कुमार सत्ता में रहे हैं कोई न कोई विभाग महेश्वर हजारी के जिम्मे रहा है। अब नीतीश कुमार ने समस्तीपुर के कल्याणपुर में आयोजित सभा में महेश्वर हजारी का नाम लिए बिना कहा कि गड़बड़ी करनेवालों को चुनाव के बाद मुक्त करेंगे। सीएम ने कहा कि साथ रहकर गड़बड़ी करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा।
इसके बाद से ही अटकलें तेज हो गई हैं कि नीतीश महेश्वर हजारी पर निशाना साध रहे हैं। मंत्री हजारी पर आरोप है कि वह चुपके से बेटे का प्रचार कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की सच्चाई सामने नहीं आई है। लेकिन, नीतीश कुमार के इस बयान को इस आरोप से जोड़ कर देखा जा रहा है। यही वजह है कि बिहार का राजनीतिक माहौल ज्यादा गरम हो गया है।
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बेटे के लिए गुपचुप प्रचार की चर्चा तेज !
हालांकि महेश्वर हजारी खुलकर अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार करते नजर नहीं आए हैं लेकिन स्थानीय मीडिया के अनुसार पर्दे के पीछे से चुनाव प्रचार की कमान उन्होंने ही संभाल रखी है। जाहिर तौर पर यह वक्त महेश्वर हजारी के लिए काफी मुश्किलों से भरा हुआ है।
यदि वह खुलकर अपने बेटे के लिए चुनाव प्रचार करते हैं तो उन पर तुरंत कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बयान के बाद यह आशंका गहरी हो गई है कि हजारी की जगह बिहार की कैबिनेट में बचेगी या नहीं। समस्तीपुर लोकसभा सीट पर चौथे चरण के अंतरगत 13 मई को मतदान होना है।
लोकल मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो सन्नी हजारी दिनभर चुनाव प्रचार करते हैं, जबकि महेश्वर हजारी अपने बेटे के चुनाव के सिलसिले में रात को लोगों से मुलाकात करते हैं। हालांकि जीत किसकी होगी ये तो 4 जून को पता चलेगा। लेकिन महेश्वर हजारी का मंत्री पद बचेगा या नहीं ये भी अब एक बड़ा सवाल हो गया है। अब आने वाला वक्त ही बता सकता ही कि हजारी बिहार के मंत्रिमंडल में बने रहेंगे या पुत्र मोह उनकी कुर्सी के लिए खतरा साबित होगा।
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