अभिषेक बनर्जी-सयानी घोष की ‘प्रॉपर्टी’ का क्या है सच? BJP के 43 ठिकानों की लिस्ट के पीछे की पूरी इनसाइड स्टोरी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक नया और बेहद दिलचस्प 'प्रॉपर्टी ड्रामा' चल रहा है। लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बंगाल में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदले हैं और अब सारा टकराव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नंबर दो नेता अभिषेक बनर्जी के बीच सिमट गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में है कोलकाता नगर निगम (KMC) के डेटाबेस से निकली 43 संपत्तियों (Properties) की एक लिस्ट, जिसने बंगाल से लेकर सोशल मीडिया तक तहलका मचा दिया है।

इस विवाद में सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया जब इस लिस्ट में टीएमसी के दो फायरब्रांड सांसदों-अभिषेक बनर्जी और जादवपुर से सांसद सयानी घोष-का नाम एक साझी संपत्ति (Joint Property) के तौर पर सामने आया। इसके बाद तो विपक्ष को जैसे एक बड़ा हथियार मिल गया। लेकिन अब सयानी घोष ने इस पूरे मामले पर तस्वीरों और सबूतों के साथ ऐसा पलटवार किया है, जिसने इस कहानी को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। आइए इस पूरे विवाद को समझते हैं कि आखिर यह 'नाम का फेरबदल' है या फिर राजनीतिक बदले की कार्रवाई।

abhishek banerjee saayoni ghosh

क्या है 43 संपत्तियों का पूरा विवाद?

इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत तब हुई जब बंगाल बीजेपी ने कोलकाता की पॉश लोकेशंस पर स्थित 43 संपत्तियों की एक सूची सार्वजनिक की। बीजेपी का दावा है कि ये तमाम संपत्तियां सीधे या परोक्ष रूप से टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से जुड़ी हुई हैं। बीजेपी के मुताबिक, इनमें से कुछ संपत्तियां उनके करीबियों, रिश्तेदारों या साझीदारों के नाम पर दर्ज हैं।

शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने साफ कर दिया है कि वे इस पूरी लिस्ट की गहराई से जांच करवाएंगे। जांच इस बात की होगी कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए पैसा कहां से आया, इसके पीछे की फंडिंग का सोर्स क्या है और क्या इनमें किसी तरह की वित्तीय अनियमितता या घोटाला शामिल है। बीजेपी का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी के पास उनकी घोषित संपत्ति से कहीं ज्यादा बेनामी संपत्तियां हैं।

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'अभिषेक-सयानी' की साझी संपत्ति पर विवाद

बीजेपी द्वारा जारी की गई इस लिस्ट में जिस एक प्रॉपर्टी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, उसका पता था- 19 D, 7 टैंक लेन, कोलकाता। इस प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के कॉलम में दो नाम लिखे थे: अभिषेक बनर्जी और सयानी घोष।

चूंकि ये दोनों ही नाम टीएमसी के दिग्गज नेताओं और सांसदों के हैं, इसलिए सोशल मीडिया पर तुरंत यह कयास लगाए जाने लगे कि दोनों नेताओं ने मिलकर कोई गुप्त निवेश किया है। इस लिस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स और विपक्षी दल सक्रिय हो गए और टीएमसी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने शुरू कर दिए।

सयानी घोष का पलटवार: 'सत्यमेव जयते' और असली कपल की एंट्री

इस विवाद के बढ़ते ही जादवपुर से टीएमसी सांसद सयानी घोष ने मोर्चा संभाला और इस पूरे दावे की धज्जियां उड़ा कर रख दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर सबूतों, तस्वीरों और कोलकाता नगर निगम (KMC) की जांच रिपोर्ट के साथ एक लंबा पोस्ट शेयर किया।

सयानी घोष ने जो खुलासा किया, उसने बीजेपी के दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। सयानी ने बताया कि केएमसी के भवन विभाग के अधिकारियों ने जब मौके पर जाकर जांच की, तो वहां की हकीकत कुछ और ही निकली:

🔹नामों का अजीब संयोग: उस फ्लैट में रहने वाले मकान मालिक का नाम सचमुच अभिषेक बंदोपाध्याय (अभिषेक बनर्जी का ही एक रूप) है, जो राजनीति में नहीं बल्कि प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं।

🔹पत्नी का नाम भी सयानी: सबसे मजेदार बात यह है कि उनकी पत्नी का नाम भी सायनी घोष है, जो पेशे से एक स्कूल शिक्षिका (School Teacher) हैं।

🔹मध्यमवर्गीय परिवार: यह साधारण सा कपल अपनी दो छोटी बेटियों के साथ पिछले तीन सालों से इस फ्लैट में रह रहा है। उन्होंने तीन साल पहले लोन या अपनी जमा-पूंजी से इसे संयुक्त रूप से खरीदा था और केएमसी के सामने कब्जे से जुड़े सभी वैध कानूनी दस्तावेज भी पेश किए।

🔹पते में भी अंतर: सयानी घोष ने एक और तकनीकी खामी उजागर की। बीजेपी की लिस्ट में जिस प्रॉपर्टी का पता 19 D, 7 टैंक लेन लिखा था, असल में उस बेकसूर कपल के फ्लैट का पता 19 B, 7 टैंक लेन है।

टीएमसी सांसद सयानी घोष ने इस साधारण परिवार की तस्वीरें साझा करते हुए गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महज नाम के एक जैसे होने (Name-Sake) के कारण एक आम परिवार को पुलिस, प्रशासन और मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ा। सयानी ने इसे 'बदले की राजनीति' का सबसे घटिया उदाहरण बताया, जिसका मकसद सिर्फ दो राजनेताओं की छवि को धूमिल करना था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "यह घोष किसी के दबाव में नहीं आएगी और झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"

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केएमसी नोटिस और 'शांतिनिकेतन' पर बढ़ता शिकंजा

यह विवाद सिर्फ एक साझी संपत्ति तक सीमित नहीं है। इससे ठीक एक दिन पहले कोलकाता नगर निगम (KMC) ने खुद अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को नोटिस जारी किया था। ध्यान देने वाली बात यह है कि केएमसी अभी भी टीएमसी के नियंत्रण में है और फिरहाद हाकिम कोलकाता के मेयर हैं। इसके बावजूद इन नोटिसों का जारी होना बेहद चौंकाने वाला था।

इस कार्रवाई के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

🔹अवैध निर्माण का आरोप: केएमसी ने अभिषेक बनर्जी के हरीश मुखर्जी रोड स्थित मुख्य आवास 'शांतिनिकेतन' समेत कई ठिकानों पर अवैध निर्माण का आरोप लगाया है।

🔹बिल्डिंग प्लान की मांग: निगम ने इन सभी इमारतों के अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान, लिफ्ट और एस्केलेटर की स्थापना से जुड़े तकनीकी दस्तावेज मांगे हैं।

🔹7 दिनों का अल्टीमेटम: नोटिस में साफ कहा गया है कि अगर निर्माण अवैध पाया जाता है या जरूरी कागजात नहीं मिलते हैं, तो सात दिनों के भीतर अवैध ढांचे को गिराना होगा।

शुभेंदु अधिकारी का दावा बनाम अभिषेक की खुली चुनौती

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी इस मामले को लेकर बेहद हमलावर हैं। उन्होंने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी पर भ्रष्टाचार के जरिए साम्राज्य खड़ा करने का आरोप लगाया है। शुभेंदु अधिकारी का दावा है कि:

"अभिषेक बनर्जी के पास बेहिसाब संपत्तियां हैं। इनमें से 14 संपत्तियां उनकी कंपनी 'लीप्स एंड बाउंड्स' (Leaps and Bounds) के नाम पर रजिस्टर्ड हैं, 4 संपत्तियां सीधे उनके खुद के नाम पर हैं और 6 संपत्तियां उनके पिता के नाम पर दर्ज हैं।"

शुभेंदु अधिकारी ने एलान किया है कि उनकी सरकार किसी भी भ्रष्टाचारी को नहीं छोड़ेगी और सबको जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

दूसरी तरफ, टीएमसी के नंबर दो नेता अभिषेक बनर्जी ने भी इस पर बेहद कड़ा और बेबाक रुख अपनाया है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बीजेपी सरकार को खुली चुनौती दी। अभिषेक ने कहा:

"वे जो चाहें कर लें। चाहे वे मेरा घर गिरा दें या मुझे जितने चाहें उतने नोटिस भेजें, मैं इन गीदड़ भभकियों के आगे झुकने वाला नहीं हूं। चाहे जो हो जाए, बीजेपी के इस राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ मेरी लड़ाई सड़क से लेकर अदालत तक जारी रहेगी।"

क्या वाकई यह सिर्फ 'नाम का फेर' है?

इस पूरे विवाद का अगर निष्पक्ष विश्लेषण किया जाए, तो टीएमसी के दावों में दम नजर आता है। पूर्व टीएमसी राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने भी इस लिस्ट को पूरी तरह से 'फर्जी और भ्रामक' करार दिया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी ने सिर्फ केएमसी की वेबसाइट पर जाकर 'अभिषेक बनर्जी' नाम सर्च किया और जितने भी रिजल्ट आए, उन्हें बिना किसी वेरिफिकेशन के लिस्ट में डाल दिया। कोलकाता जैसे महानगर में 'अभिषेक बनर्जी' या 'अभिषेक बंदोपाध्याय' नाम के हजारों लोग हो सकते हैं।

चुनाव आयोग को दिए गए 2024 के हलफनामे के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने अपनी कुल चल संपत्ति लगभग 2.3 करोड़ रुपये, सालाना आय 1.4 करोड़ रुपये और देनदारियां (कर्ज) 36 लाख रुपये घोषित की थीं।

टीएमसी का कहना है कि बीजेपी लोकसभा चुनाव में मिली हार की हताशा को छिपाने के लिए और टीएमसी नेताओं को बदनाम करने के लिए यह फेक नैरेटिव चला रही है। पार्टी ने पत्रकारों से भी अपील की है कि वे बीजेपी के बहकावे में आने के बजाय लिस्ट में दिए गए नंबरों पर फोन करके या पते पर जाकर खुद सच्चाई की जांच करें।

बंगाल में चल रहा यह संपत्ति विवाद महज एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह दो राजनीतिक विचारधाराओं और ताकतों के बीच का शक्ति प्रदर्शन है। एक तरफ जहां बीजेपी सरकार अभिषेक बनर्जी को घेरकर भ्रष्टाचार विरोधी अपनी छवि को मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ टीएमसी ने 'नाम के फेर' वाले सबूत को पेश करके बीजेपी के इस पूरे कैंपेन की क्रेडिबिलिटी (विश्वसनीयता) पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या शुभेंदु अधिकारी की सरकार इन 43 संपत्तियों में से किसी का सीधा संबंध अभिषेक बनर्जी से साबित कर पाती है, या फिर यह मामला भी केवल राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया वॉर तक ही सीमित रह जाता है। लेकिन फिलहाल, सयानी घोष द्वारा पेश किए गए 'सत्यमेव जयते' वाले सबूतों ने टीएमसी को इस राउंड में बढ़त जरूर दिला दी है।

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