Hemant Vaishnav कौन है? गुजरात हत्याकांड का दोषी बना एक्टर, 12 साल काटी फरारी, Amitabh Bachchan-Aamir को ठगा

Hemant Vaishnav Arrested News Update: एक ऐसा शख्स, जिसे अदालत ने हत्या का दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुनाई। जेल में सजा काटते हुए पैरोल पर बाहर आया, लेकिन वापस नहीं लौटा। नाम बदलकर नई पहचान बना ली और बॉलीवुड-गुजराती फिल्मों में सपोर्टिंग एक्टर बनकर सालों तक पुलिस की आंखों से छिपा रहा। इतना ही नहीं बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन, आमिर खान तक की आंख में धूल झोंकी। आखिरकार 21 मई 2026 को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उसे घी-कांटा मेट्रो स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया।

यह है हेमंत नागिंदास पुरुषोत्तमदास वैष्णव (53 वर्ष), जिन्हें हेमंत मोदी (Hemant Modi) के नाम से भी जाना जाता है। उसकी कहानी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगती। अपराध, सजा, फरारी, नई पहचान और ग्लैमर दुनिया। आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे अमिताभ बच्चन ठगे गए और हत्यारा एक्टर बन गया?

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Who Is Hemant Vaishnav: हेमंत वैष्णव कौन है?

हेमंत नागिंदास पुरुषोत्तमदास वैष्णव मूल रूप से अहमदाबाद के सैजपुर बोगा इलाके का रहने वाला है। वह 53 साल का है। पुलिस और अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, वह एक सामान्य बैकग्राउंड से आता था, लेकिन 2005 के एक जमीन विवाद ने उसकी जिंदगी बदल दी। उसके परिवार के बारे में विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सीमित है, क्योंकि फरारी के दौरान उसने अपनी पहचान छिपाई रखी। गिरफ्तारी के समय वह अहमदाबाद में ही रह रहा था। पुलिस जांच में उसके ठिकानों की पड़ताल की जा रही है। फरारी के दौरान उसने 'स्पंदन मोदी' (Spandan Modi) जैसी नई पहचान बनाई थी, जिसके तहत वह मनोरंजन जगत में सक्रिय रहा।

2005 Murder Case: कैसे बना आजीवन कैदी?

15 जून 2005 की रात अहमदाबाद के नरोदा इलाके में आजाद चौक के पास पार्श्वनाथ टाउनशिप क्षेत्र में जमीन विवाद को लेकर दो गुटों में हिंसक झड़प हुई। इस विवाद में नरेंद्र उर्फ नैनो यशवंत कांबले की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में हेमंत वैष्णव समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया। मामले में IPC की धारा 302 (हत्या), 324 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 147, 148, 149 (दंगा), 120B (आपराधिक षड्यंत्र) और बॉम्बे पुलिस अधिनियम की धारा 135(1) लगाई गई। 27 अगस्त 2008 को अदालत ने हेमंत को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वह मेहसाना जिला जेल में सजा काट रहा था।

Parole पर फरारी: 2014 से शुरू हुआ नया अध्याय

25 जुलाई 2014 को गुजरात उच्च न्यायालय ने हेमंत को 30 दिनों की पैरोल दी। पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद वह जेल वापस नहीं लौटा। पुलिस ने उसे पैरोल भगोड़ा घोषित कर दिया। इसके बाद शुरू हुई उसकी 12 साल लंबी फरारी।

फरारी के दौरान हेमंत ने अपनी पहचान बदल ली और स्पंदन मोदी नाम से नया जीवन शुरू किया। वह अहमदाबाद समेत विभिन्न जगहों पर रहा और मनोरंजन उद्योग (Entertainment Industry) में घुल-मिल गया।

बॉलीवुड और ग्लैमर दुनिया में प्रवेश

पुलिस के अनुसार, फरारी के दौरान हेमंत वैष्णव ने 20 से अधिक फिल्मों, वेब सीरीज, टीवी शो और थिएटर प्रोजेक्ट्स में काम किया। उसकी कुछ उल्लेखनीय परियोजनाएं:

  • ठग्स ऑफ हिंदोस्तान (बॉलीवुड)
  • जयेशभाई जोरदार
  • वागले की दुनिया (टीवी शो)
  • थिएटर प्रस्तुतियां
  • आगामी फिल्में: लाहौर 1947 और मलयालम फिल्म एल2: एम्पुरान

IMDb पर हेमंत वैष्णव को Sanduk (2025), Chalees Peti (2024) और Ankahe Khwaab (2023) जैसी फिल्मों से जोड़ा गया है। वह मुख्य रूप से सपोर्टिंग रोल में नजर आया। पुलिस का मानना है कि फिल्मी दुनिया की भीड़-भाड़ और नकली पहचान का फायदा उठाकर वह लंबे समय तक छिपा रहा।

गिरफ्तारी: क्राइम ब्रांच का ऑपरेशन

अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली कि हेमंत अहमदाबाद में ही छिपा हुआ है। टीम ने घी-कांटा मेट्रो स्टेशन के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे मेहसाना जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, जहां वह अपनी बाकी सजा काटेगा।

फरार दोषियों की कहानी: एक पैटर्न

हेमंत की कहानी अकेली नहीं है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने राकेश पटेल उर्फ पप्पी को 24 साल फरारी के बाद प्रयागराज से गिरफ्तार किया था। राकेश ने पैरोल पर बाहर आकर नाम बदलकर नंदलाल वर्मा बनाया और ऑटो पार्ट्स का व्यापार शुरू कर दिया था। ऐसी घटनाएं पुलिस सिस्टम, पैरोल मॉनिटरिंग और अपराधियों की नई पहचान बनाने की क्षमता पर सवाल उठाती हैं।

उठते बड़े सवाल?

  • पैरोल सिस्टम की निगरानी कितनी प्रभावी है? 30 दिन की पैरोल पर बाहर आकर 12 साल फरार रहना आसान कैसे हुआ?
  • फिल्म इंडस्ट्री में बैकग्राउंड चेकिंग की कमी? एक उम्रकैद कैदी सपोर्टिंग रोल में काम कैसे करता रहा?
  • नकली पहचान बनाना कितना आसान है? Aadhaar, PAN या अन्य दस्तावेजों की जांच कहां कमजोर पड़ती है?
  • अपराधी मानसिकता: हेमंत ने फरारी के दौरान ग्लैमर दुनिया को शरण बनाया, यह अपराध और मनोरंजन के बीच की सीमा पर सोचने को मजबूर करता है।

हेमंत वैष्णव की गिरफ्तारी एक फिल्मी ट्विस्ट वाली सच्ची कहानी है। एक तरफ अपराध की सजा, दूसरी तरफ सपनों की दुनिया। लेकिन कानून आखिरकार अपनी राह निकाल ही लेता है। अब हेमंत को बाकी उम्रकैद काटनी होगी। पुलिस आगे की जांच में उसके अन्य ठिकानों, सहयोगियों और फरारी के दौरान कमाए पैसे के स्रोत की भी पड़ताल कर रही है।

यह मामला दिखाता है कि चाहे कितने साल बीत जाएं, अपराध की सजा से बचना मुश्किल है। बॉलीवुड की चकाचौंध में छिपे अपराधी भी अंत में पकड़े जाते हैं।

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