Chaitra Navratri: खुदाई कर निकाली गई मूर्ति को किया गया था स्थापित, अनोखी है मान्यता
Chaitra Navratri: चैत के महीने में हर साल यहां अखंड किया जाता है, जिसमें 7 गांव के लोग शिरकत करते हैं।

Temple In Bihar: बिहार के विभिन्न ज़िलों में कई ऐतिहासिक मूर्तियां हैं, जिसकी अलग-अलग मान्यताएं हैं। आज हम आपको बिहार के नालंदा ज़िले की एक ऐसी ही ऐतिहासिक मूर्ति के बारे में बातान जा रहे हैं। नालंदा ज़िले के तिऊरी गांव में भगवान बुद्ध की ऐतिहासिक मूर्ति है। इस बेश कीमती को प्रतिमा को ग्रामीण भैरो बाबा की संज्ञा देते है। गांव वालों का मानना है कि इस मंदिर में पूजा करने पर श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है। आज तक कोई भी यहां आने के बाद निराश नहीं हुआ है।
नालंदा ज़िला मुख्यालय बिहार शरीफ से 7 किलोमीटर की दूरी पर तिऊरी गांव स्थित मध्य विद्यालय के प्रांगण में मूर्ति स्थापित है। गांव में कई बार चोर भगवान बुद्ध की बेशकीमती मूर्ति को चुराने आए, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। सैकड़ों साल पुरानी प्रतिमा को चुराने के चक्कर में चोर हादसे का शिकार होते चले गए। ग्रामीण बताते हैं कई सालों से तिउरी मध्य विद्यालय में मूर्ति स्थापित है। सैकड़ों साल पुरानी मूर्ति गांव के बगल वाले कब्रिस्तान में दफ़न थी। खुदाई कर मूर्ति को बाहर निकाल कर स्थापित किया गया।
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सरकार ने भी इस मूर्ति को अपने कब्जे में लेना चाहा लेकिन ग्रामीण राज़ी नहीं हुए। वहीं दूसरे राज्यों की सरकार करोड़ों कीमत देकर मूर्ति खरीदनी चाही लेकिन उन्हे भी मूर्ति नहीं बेची गई। ग्रामीणों की मानें तो चोर मूर्ति को चोरी करने में नाकाम हुए तो मूर्ति को क्षतिग्रस्त करने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो पाये। वहीं चोर ही बर्बाद हो गए। इस तरह की घटना होता देख ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर मंदिर का बेहतर तरीक़े से निर्माण करवाया और मंदिर में ताला लगा दिया। अब ताला लगाकर ही रखते हैं ताकि कोई घटना नहीं हो। चैत के महीने में हर साल यहां अखंड किया जाता है, जिसमें 7 गांव के लोग ही शिरकत करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि बेऔलाद महिलाएं यहां पूजा करती हैं तो उनकी मनोकामना पूरी होती है।
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