बाहुबलियों की विरासत पर सियासी जंग, कोई बेटा उतरेगा मैदान में, किसी का भाई या पत्नी ने कसी कमर

Bihar Assembly Election 2025 Bahubali leaders: बिहार की राजनीति में बाहुबलियों का असर दशकों से देखने को मिलता रहा है। कई नेता जेल में रहते हुए भी चुनाव जीते, सरकारें बनाईं और सत्ता की चाभी अपने हाथ में रखी। लेकिन अब इस सत्ता समीकरण में थोड़ा बदलाव दिख रहा है। 2025 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, बाहुबलियों के परिवार के सदस्य बेटे, भाई या पत्नी-सियासी विरासत संभालने की तैयारी में लग चुके हैं। वे न सिर्फ पारिवारिक पहचान के सहारे उतरना चाहते हैं, बल्कि पार्टी से टिकट पाने की पूरी कवायद भी शुरू हो चुकी है।

इस रिपोर्ट में विस्तार से जानिए, कौन-कौन मैदान में उतरने की तैयारी में है, किस बाहुबली के परिवार से कौन चुनाव लड़ेगा, संभावित सीटें और पार्टियों की रणनीति और क्या यह सिर्फ नामों की अदला-बदली है या बिहार की राजनीति में किसी नए दौर की शुरुआत?

Bihar Chunav 2025

आनंद मोहन - बेटे चेतन और पत्नी के सहारे सियासी वापसी की तैयारी

बिहार की राजनीति में बाहुबल और रसूख के प्रतीक माने जाने वाले आनंद मोहन एक बार फिर सुर्खियों में हैं। IAS अधिकारी जी. कृष्णैया हत्याकांड में लंबी सजा काटने के बाद हाल ही में जेल से रिहा हुए आनंद मोहन खुद सीधे चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा अब बेटे और पत्नी के ज़रिए आगे बढ़ रही है।

उनके बेटे चेतन आनंद, जो वर्तमान में RJD के विधायक हैं, 2025 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट बचाने के लिए ज़ोर-शोर से तैयारी कर रहे हैं। वहीं, आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद भी सक्रिय राजनीति में बनी हुई हैं वे शिवहर से सांसद रह हैं। RJd छोड़ JDU में शामिल हो चुके आनंद मोहन परिवार को आगामी विधानसभा चुनाव में किसी एक सदस्य के लिए टिकट मिल सकता है।

क्या अनंत सिंह की विरासत संभालेंगी नीलम देवी?

मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह अब चुनावी राजनीति से बाहर हैं, लेकिन उनकी पत्नी नीलम देवी मैदान में डटी हैं। 2020 में RJD से विधायक बनीं, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह ने JDU का साथ दिया। अब नीलम देवी भी जेडीयू के करीब नजर आ रही हैं। पर क्या नीतीश कुमार उन्हें टिकट देंगे? यह बड़ा सवाल है। सियासी विरासत, दल-बदल और टिकट की टेंशन के बीच मोकामा की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर है।

राजबल्लभ यादव - पत्नी ने थामी कमान

बिहारशरीफ से RJD के पूर्व विधायक राजबल्लभ यादव नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में दोषी करार दिए गए। उनकी गैरमौजूदगी में उनकी पत्नी विभा देवी अब पार्टी की प्रमुख चेहरा बन चुकी हैं। संभावना है कि वह फिर से चुनाव लड़ेंगी।

प्रभुनाथ सिंह - भाई और बेटे को उतारने की तैयारी

सारण से पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह भी हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं। उनके परिवार की ओर से उनके भाई और बेटे दोनों ही चुनावी रणनीति में सक्रिय हैं। माना जा रहा है कि महाराजगंज या गोपालगंज में से किसी एक सीट से परिवार का कोई सदस्य चुनावी मैदान में होगा।

मुन्ना शुक्ला - पत्नी अन्नू शुक्ला की वापसी तय

विलासपुर कांड के आरोपी और कई बार के विधायक मुन्ना शुक्ला की पत्नी अन्नू शुक्ला पहले भी विधायक रह चुकी हैं। 2025 में वह फिर से वैशाली जिले की किसी सीट से NDA के सहयोग से मैदान में उतर सकती हैं।

पप्पू यादव की सियासी चाल: खुद मैदान में

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव 2025 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर दमखम से उतरने की तैयारी में हैं। जनसमस्याओं पर मुखर रहने वाले पप्पू खुद को 'जनता का नेता' कहते हैं।

रामा सिंह - बेटे पर दांव

लोक जनशक्ति पार्टी से जुड़ाव रखने वाले बाहुबली रामा सिंह खुद तो अब सक्रिय नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे देवेंद्र सिंह राजनीति में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। वैशाली सीट से उन्हें टिकट मिलने की चर्चा है।

सुनील पांडे बेटे के ज़रिए फिर से सियासी पावर में

बिहार की राजनीति में एक दौर में बाहुबली की पहचान रखने वाले सुनील पांडे अब खुद तो चुनावी मैदान में नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे विशाल प्रशांत के ज़रिए उन्होंने सियासी वापसी कर ली है। तरारी उपचुनाव में बीजेपी उम्मीद
वार के तौर पर विशाल की जीत ने यह साफ कर दिया कि पांडे परिवार का असर अब भी कायम है।

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अशोक महतो - जेल से रिहा होकर रचाई शादी

बिहार के कुख्यात लेकिन राजनीतिक रूप से सक्रिय चेहरों में शामिल अशोक महतो 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ही जेल से रिहा हुए थे। राजद (RJD) ने उन्हें मुंगेर लोकसभा सीट से टिकट दिया, लेकिन कानूनी वजहों से वे खुद चुनाव नहीं लड़ सके।

ऐसे में उन्होंने चुनाव से ठीक पहले एक महिला से शादी की और फिर उसे अपना चुनावी चेहरा बनाया। उनकी पत्नी ने ही मुंगेर से राजद के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। लेकिन केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के हाथों हार झेलनी पड़ी। अशोक महतो अब 2025 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हैं और माना जा रहा है कि या तो वे खुद मैदान में उतरेंगे या फिर पत्नी को आगे रखकर अपने प्रभाव को बनाए रखेंगे।

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