Bihar News: JDU विधायक के भांजे की गोली मार कर हत्या, तेजस्वी बोले- बिहार में कानून व्यवस्था ध्वस्त
Bihar News: बिहार के खगड़िया जिले में गुरुवार ( 10 अप्रैल) को अज्ञात हमलावरों ने नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के विधायक पन्नालाल सिंह पटेल के भतीजे कौशल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
हत्या की खबर ने एक बार फिर से बिहार की कानून व्यवस्था के के पीछे कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं इस मामले को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है।
पुलिस ने मामले को लेकर किया बड़ा खुलासा
खगड़िया के पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि, 'हमें जानकारी मिली थी कि शिव कौशल सिंह को कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी। अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें सिर के पिछले हिस्से में गोली मारी गई थी। हमें कुछ नाम मिले हैं। मृतक के परिवार ने बताया है कि घटना के पीछे पारिवारिक रंजिश है।'

'पारिवारिक विवाद के कारण हो सकता है'
एसपी ने आगे बताया, 'परिवार का मानना है कि यह किसी पारिवारिक विवाद के कारण हो सकता है, लेकिन वे अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। पोस्टमार्टम के बाद ही और तथ्य सामने आएंगे। बताया गया है कि कौशल सिंह को सिर में एक या दो गोलियां मारी गईं। कुछ चश्मदीदों ने बताया कि अज्ञात हमलावर आए और फायरिंग कर दी।'
कैसे घटी घटना?
जानकारी के मुताबिक, घटना उस वक्त हुई जब कौशल सिंह अपनी पत्नी के साथ गोदाम से घर लौट रहे थे। हमलावरों ने घात लगाकर दो से तीन गोलियां चलाईं, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। परिवार ने उन्हें पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यह वारदात चौथम थाना क्षेत्र के कैथी इलाके में हुई।
इस पर है शक
पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आ रही है कि हत्या में परिवार के ही कुछ सदस्य शामिल हो सकते हैं और मामला व्यक्तिगत रंजिश का है। वहीं परिवार का आरोप है कि कौशल सिंह का अपने भाई बिजल सिंह से विवाद था और हत्या में उनका हाथ होने की आशंका है।
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तेजस्वी यादव का नीतीश सरकार पर हमला
वहीं बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार पर कानून व्यवस्था की विफलता का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, 'अपराधियों का हौसला तभी बढ़ता है जब सरकार की साख खत्म हो जाती है। ऊपर दी गई घटनाओं में अपराधियों का साहस और दुस्साहस साफ दिख रहा है।
मीडिया, अभिजात वर्ग और बुद्धिजीवी इसको कभी कानून व्यवस्था की समस्या नहीं कहेंगे। क्या उन्हें लगता है कि कानून व्यवस्था के ध्वस्त हो चुके हालात में इस तरह की बेकाबू आपराधिक घटनाएं राज्य के लिए अच्छी हैं? क्या एनडीए के घटक दल इन घटनाओं को जश्न की फायरिंग समझ कर चुप बैठे हैं?'












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