Bihar News: BPSC छात्रों का आंदोलन भड़का या भड़काया गया, 5 चुभते सवालों का जवाब कौन देगा?
Bihar News: बिहार में बीपीएससी के परीक्षार्थियों के आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। वह बीपीएससी 70वीं की पीटी की परीक्षा को रद्द करने से कम कुछ भी नहीं मांग रहे। जबकि, राज्य सरकार इसके लिए तैयार नहीं दिख रही है। छात्र आंदोलन के लिए बिहार का नाम इतिहास में दर्ज है। यह बात छात्रों को भी पता है और नेता तो उसकी सियासी रोटी खाते ही आए हैं।
इस बार जिस तरह से बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परीक्षार्थियों का हंगामा शुरू हुआ और उसमें जिस तरह से सियासतदानों ने सक्रिय एंट्री की, उसके बाद सब कुछ को पूरी तरह से सहज और स्वाभाविक मान लेना, कम से कम चुनावी साल होने की वजह से ठीक नहीं लगता।

Bihar News: पेपर लीक की अफवाह से शुरू हुआ हंगामा?
पेपर लीक वाला फसाद बापू सेंटर से शुरू हुआ। कहते हैं कि कुछ पेपर कम पड़ गए थे। उसे दूसरे केंद्र से मंगवाने पड़े, जिसकी वजह से परीक्षार्थियों को पेपर थोड़े अंतर से दो बार में मिले। इस बात में कोई दो राय नहीं कि इसमें बीपीएससी की बहुत बड़ी लापरवाही रही।
लेकिन, इसी बात को लेकर हंगामा भड़क गया कि पेपर लीक हो गया। छात्र तो छात्र होते हैं। इसी अफवाह पर परीक्षा बहिष्कार करते हुए बवाल शुरू हो गया। बीपीएमसी की कुख्यात लापरवाही में आग में घी डालने का काम किया पटना के डीएम ने, जिन्होंने एक छात्र को तमाचा लगा दिया। सब कुछ बापू सेंटर पर हुआ था, इसलिए वहां की परीक्षा रद्द हुई।
लेकिन,परीक्षार्थियों ने पूरी पीटी परीक्षा ही रद्द करने की मांग शुरू कर दी और यहीं से बवाल ने आंदोलन का शक्ल अख्तियार करना शुरू कर दिया।
Bihar News: छात्र आंदोलन की पहले से तैयार की जा रही थी जमीन?
ऐसा नहीं है कि हंगामें की शुरुआत पहली बार बापू सेंटर पर पेपर मिलने में देरी से ही हुई। बीपीएससी ने पहले ही कहा था कि नॉर्मलाइजेशन नहीं होगा। फिर परीक्षा के पहले ही कुछ परीक्षार्थियों ने नॉर्मलाइजेशन के विरोध में आयोग के बाहर प्रदर्शन क्यों किया? यह भी आम प्रदर्शन नहीं था। प्रदर्शनकारी उग्र थे और ऐसी स्थिति बनी कि पुलिस ने भी बिना सोचे-समझे जमकर लाठियां भांजनी शुरू कर दीं।
Bihar News: बीपीएससी की दागगार छवि ने हंगामा को दिया मौका?
अगर पूरे विवाद के बैकग्राउंड में जाएं तो बीपीएससी की छवि इतनी दागदार रही है कि उसकी हर कार्रवाई को संदेह से देखने की लोगों को आदत पड़ चुकी है। यह कोई भी परीक्षा आयोजित करवाए, विवादों का होना स्वाभाविक है। 90 के दशक से यह घोटालों, धांधलियों के लिए कुख्यात रहा है।
आयोग के पूर्व अध्यक्षों तक पर भ्रष्टाचार और धांधली के आरोपों में कार्रवाई हो चुकी है। ऐसे में मौजूदा विवाद में भी शायद आयोग की इस छवि की एक बड़ी भूमिका रही है।
Bihar News: बिहार सरकार में कौन है जो आंदोलन को हवा देने की कर रहा था कोशिश?
बीपीएससी के परीक्षार्थियों की नाराजगी बढ़ती जा रही है, क्या बिहार इंटेलिजेंस ने सरकार को इसके लिए आगाह नहीं किया? क्या स्थिति इतनी बेकाबू हो चुकी थी कि सर्दी के मौसम में छात्रों पर लाठीचार्ज के अलावा कोई उपाय ही नहीं बचा था? अगर प्रशासन के लोग समय रहते छात्रों को विश्वास में लेते, उनसे बातचीत करके उन्हें शांत करने की कोशिश करते तो क्या स्थिति इतनी अप्रिय होती? तो सवाल है कि क्या प्रशासन में ऐसे लोग भी बैठे हैं, जो छात्रों को मोहरा बनाने की कोशिशों में लगे हुए थे?
Bihar News: विधानसभा चुनाव की वजह से तो सबकुछ नहीं हुआ?
सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस साल बिहार विधानसभा का चुनाव होना है और स्टूडेंट अपने आप में एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। जिस तरह से आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से लेकर प्रशांत किशोर तक ने इस मुद्दे को लपकने की कोशिश की, उससे लगता है कि कहीं बीपीएससी परीक्षार्थियों को राजनीति का हथियार बनाने की कोशिश तो नहीं हुई?
क्योंकि, परीक्षार्थियों के विरोध-प्रदर्शन में कुछ सियासी संगठनों के झंडे भी नजर आए। यहां तक कि सत्ताधारी एनडीए गठबंधन के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी एक्स के माध्यम से इस आंदोलन को समर्थन देने की बात कह दी।
सरकार ने बाद में मुख्य सचिव को परीक्षार्थियों से बातचीत के लिए आगे बढ़ाया और उपमुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि समस्या का समाधान निकल जाएगा। लेकिन,अगर सरकार पहले ही हालात की गंभीरता को समझती तो न तो परीक्षार्थियों को अपनी तैयारी छोड़कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ता और न ही शायद इसका फायदा अपने हित में उठाने की कोशिश करने वालों को ही मौका मिल पाता!












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