BPSC Exam Protest: बिहार में पिछले पांच सालों में हुए 400 छात्र प्रदर्शन, केरल के बाद दूसरे नंबर पर
BPSC Exam Protest: कपकपा देने वाली ठंड के बीच बिहार की राजधानी पटना में बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अभ्यर्थियों का विरोध प्रदर्शन अभी जारी है। पिछले 15 दिन से छात्र लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार को 48 घंटे का वक्त दिया था, जो खत्म हो रहा है।
दरअसल, छात्र यहां पर कथित पेपर लीक के कारण 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (CCE) की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे है। इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है कि बिहार में छात्र सड़कों पर उतरे हैं।

बिहार राज्य में छात्र प्रदर्शनों का एक शानदार इतिहास रहा है। बता दें कि साल 2018 से 2022 के बीच 400 विरोध प्रदर्शन हुए हैं। यह केरल के बाद दूसरे स्थान पर है, जहां इसी अवधि के दौरान 510 विरोध प्रदर्शन हुए थे। हरियाणा में 253 छात्र विरोध प्रदर्शन हुए। महत्वपूर्ण संख्या वाले अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश (87), तेलंगाना (84) और हिमाचल प्रदेश (52) शामिल हैं।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2014 से 2022 तक 09 सालों में भारत में छात्र आंदोलन की 3,475 से अधिक घटनाएं हुईं। इतना ही नहीं, सबसे अधिक विरोध प्रदर्शन 2017 में 562 घटनाओं के साथ हुए, इसके बाद 2018 में 507 घटनाएं हुईं।
खबर के मुतबिक, इन 9 सालों में बिहार के अदंर छात्र प्रदर्शन की 527 घटनाएं हुईं, जिनमें से सबसे अधिक 210 घटनाएं 2021 में दर्ज की गईं। आपको बता दें कि 30 दिसंबर, 2024 को 10 बीपीएससी उम्मीदवारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की राजधानी पटना में मुख्य सचिव अमृत लाल मीना से मुलाकात की और अपनी शिकायतों पर चर्चा की।
हालांकि, नीतीश सरकार ने 13 दिसंबर को आयोजित बीपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने और फिर से परीक्षा लेने की मांगों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। बीपीएससी सचिव सत्य प्रकाश शर्मा ने मीडिया को बताया कि पटना में बापू परीक्षा केंद्र को छोड़कर, अन्य सभी 911 केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से आयोजित की गई थी।
इन केंद्र पर पेपर लीक या हिंसा का कोई मामला नहीं देखा गया था। तो वहीं, कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी के साथ-साथ दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने छात्रों के खिलाफ पुलिस के बल प्रयोग की आलोचना की। बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने पुलिस की कार्रवाई को "बहुत दर्दनाक" बताया।
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उन्होंने जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर पर एनडीए सरकार की "बी-टीम" के रूप में काम करने और प्रदर्शनकारी छात्रों को गुमराह करने का आरोप लगाया। तेजस्वी यादव ने कहा कि किशोर के समूह ने प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद उम्मीदवारों को पटना के गांधी मैदान की ओर मार्च करने के लिए प्रोत्साहित किया।
हालांकि, किशोर ने कहा कि वह छात्रों की जायज मांग का समर्थन करने के लिए उनके साथ शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि मैं इन छात्रों के साथ खड़ा हूं क्योंकि मैं उनका दर्द समझ सकता हूं। कहा कि अगर अधिकारियों के साथ छात्रों की बैठक विफल रही, तो वह अगले साल 2 जनवरी से अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे।
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