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Bihar Election: बिहार में कांग्रेस की नजर दलित वोट बैंक पर, क्या राहुल गांधी ही बिगाड़ेंगे तेजस्वी का खेल?

Bihar Election: बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव (Bihar Vidhansabha Chunav 2025) होने वाले हैं। चुनाव से पहले एनडीए (NDA) और इंडिया गठबंधन दोनों के ही नेताओं ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राहुल गांधी खुद बिहार चुनाव में एक्टिव मोड में हैं और गुरुवार को वह पटना पहुंचे। यहां उन्होंने छात्रों के साथ फुले फिल्म भी देखी और आंबेडकर हॉस्टल के स्टूडेंट्स के साथ काफी वक्त बिताया। यहीं से उन्होंने 'शिक्षा न्याय संवाद' यात्रा शुरू की है। पिछले 5 महीने में राहुल की बिहार की यह पांचवी यात्रा है। कांग्रेस की रणनीति देखते हुए लग रहा है कि राहुल गांधी का फोकस बिहार में दलित वोट बैंक पर है।

राहुल गांधी की आक्रामक चुनावी प्रचार से बिहार में कांग्रेस का संगठन मजबूत होगा या नहीं, यह तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा। जिस तरह से वह जाति जनगणना पर मुखर हैं और पटना में अंबेडकर छात्रावास से उन्होंने शिक्षा संवाद यात्रा की शुरुआत की है, उसे देखते हुए उनकी चुनावी रणनीति की झलक जरूर मिल गई है। यह स्पष्ट है कि कांग्रेस की नजर दलित वोट बैंक पर है, लेकिन इससे तेजस्वी यादव और आरजेडी (RJD) का गेम बिगड़ भी सकता है।

Bihar Election

Bihar Election में दलित वोट बैंक की अहम भूमिका

बिहार की चुनावी राजनीति से लेकर सामाजिक जीवन तक में दलितों की अहम भूमिका रहती है। प्रदेश में दलितों की आबादी करीब 19% है और 90 के दशक तक दलित कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक हुआ करते थे। हालांकि, प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस जिस तरह से कमजोर होती गई और नीतीश कुमार का उभार हुआ, तो यह वोट बैंक नीतीश की तरफ झुकता चला गया। बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 38 सीटें अनुसूचित जाति और 2 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा, 20 से 25 ऐसी सीटें और भी हैं जहां दलित समुदाय का वोट चुनावी हार-जीत का समीकरण तय करते हैं। इन सभी पक्षों को देखते हुए कांग्रेस अब अपने पुराने वोट बैंक को फिर से लुभाने में जुट गए हैं।

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कांग्रेस ने दलित चेहरे पर खेला बड़ा दांव

कांग्रेस ने बिहार में दलित वोट बैंक को ध्यान में रहते हुए संगठन स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। चुनाव से कुछ महीने पहले ही कांग्रेस ने कांग्रेस ने अपने प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को हटाकर दलित नेता राजेश राम को प्रदेश का अध्यक्ष नियुक्त किया है। दलित समुदाय से आने वाले सुशील पासी को बिहार का सह-प्रभारी बनाया गया है। पटना में राहुल गांधी का आंबेडकर हॉस्टल में छात्रों से मिलना, दलित समुदाय के सबसे बड़े नायकों में से एक फुले दंपती पर बनाई फिल्म फुले देखना और फिर एससी/एसटी समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात करना भी इसका संकेत देते हैं। स्पष्ट है कि कांग्रेस की नजर अपने पारंपरिक वोट बैंक पर है।

राहुल गांधी तेजस्वी यादव का गेम बिगाड़ेंगे?

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आरजेडी कुछ वामपंथी और छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है। हालांकि, दलित वोट बैंक पर राहुल और कांग्रेस का फोकस आरजेडी (RJD) और तेजस्वी यादव की महत्वाकांक्षाओं को चोट पहुंचा सकती है। आरजेडी का पारंपरिक वोट बैंक MY (मुस्लिम, यादव) समीकरण है। इसमें तेजस्वी बार-बार पिछड़ा, महिला और युवा को जोड़ने की भी बात करते हैं. अब एक ही वर्ग के वोट के लिए गठबंधन के दो दलों के बीच रस्साकशी जैसा माहौल बन सकता है, जिससे वोट छिटकने की आशंका रहती है।

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