Bihar Chunav Survey: राहुल का ‘वोट चोरी’ शोर ही NDA की जीत की चाबी? सर्वे में INDIA ब्लॉक को झटका!

Bihar Chunav 2025 Survey: बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान के बीच सामने आए सर्वे (28 अगस्त 2025) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। सर्वे में 58% लोगों ने कहा कि SIR का मकसद सिर्फ नागरिकों को वोट का अधिकार सुनिश्चित करना है। लेकिन राहुल गांधी की 'वोट चोरी' यात्रा और विपक्ष के आरोपों ने इस मुद्दे को गरमा दिया है।

इंडिया टुडे-सीवोटर मूड ऑफ द नेशन (MOTN) सर्वे ने कहा कि 17% लोगों ने इसे सत्तारूढ़ NDA के पक्ष में बताया, जबकि 12% ने इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए। आखिर जनता का मूड क्या कहता है, और NDA की 19 राज्यों में मजबूत पकड़ के बीच SIR विवाद का क्या असर होगा? आइए, इस सियासी तूफान की हर परत खोलते हैं!

Bihar Chunav 2025 Survey

MOTN सर्वे: 58% ने SIR को बताया जायज

इंडिया टुडे-सीवोटर के MOTN सर्वे (1 जुलाई-14 अगस्त 2025) में 2,06,826 लोगों की राय ली गई, जिसमें 54,788 नए साक्षात्कार और 1,52,038 ट्रैकर डेटा शामिल थे। प्रमुख निष्कर्ष:-

  • 58% का समर्थन: 58% उत्तरदाताओं ने कहा कि SIR का उद्देश्य सिर्फ वोटरों को उनका हक देना है।
  • 17% का आरोप: 17% ने माना कि यह सत्तारूढ़ NDA को फायदा पहुंचाने की साजिश है।
  • 12% का संदेह: 12% ने SIR की टाइमिंग को संदिग्ध बताया।
  • 25% अनिर्णय: बाकी 25% ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।

सर्वे में NDA को 324 सीटें (BJP: 260) और INDIA गठबंधन को 208 सीटें मिलने का अनुमान है, जो NDA की 116 सीटों की बढ़त दिखाता है।

SIR क्या है और क्यों विवाद?

चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में SIR शुरू किया, जो 30 सितंबर तक चलेगा। यह 2003 के बाद मतदाता सूची की पहली बड़ी समीक्षा है। करीब 3 करोड़ लोगों को जन्म तिथि और जन्म स्थान के दस्तावेज जमा करने होंगे। आयोग का दावा है कि इसका मकसद:-

  • डुप्लिकेट वोटरों को हटाना।
  • मतदाता सूची में गलतियां सुधारना।
  • प्रवास और जनसांख्यिकीय बदलावों को अपडेट करना।

लेकिन विपक्ष ने इसे 'वोट चोरी' की साजिश करार दिया। राहुल गांधी, तेजस्वी यादव, और ममता बनर्जी ने SIR को NRC से जोड़कर अल्पसंख्यकों और प्रवासियों के मताधिकार पर खतरे का आरोप लगाया। तेजस्वी ने दावा किया कि उनका नाम भी सूची से हटाया गया, जिसे EC ने 'फर्जी EPIC नंबर' बताकर खारिज किया।

राहुल की 'वोट चोरी' यात्रा: कितना असर?

राहुल गांधी ने 7 अगस्त को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कर्नाटक के महादेवापुरा में 1,00,250 फर्जी वोटरों का दावा किया। 17 अगस्त को सासाराम से 'वोटर अधिकार यात्रा' शुरू कर इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया। X पर उन्होंने लिखा, 'वोट चोरी लोकतंत्र पर हमला है। EC डिजिटल वोटर लिस्ट दे।' कांग्रेस ने votechori.in वेबसाइट लॉन्च की।

लेकिन MOTN सर्वे में सिर्फ 32% ने राहुल के दावों को विश्वसनीय माना, जबकि 58% ने इसे 'विपक्ष की हताशा' कहा। EC ने राहुल से शपथपत्र मांगा, जिसे उन्होंने खारिज कर दिया। ECISVEEP ने कहा, 'वोटर लिस्ट PDF में उपलब्ध है, मशीन-रीडेबल डेटा गोपनीयता के कारण नहीं।'

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SIR विवाद का असर

  • NDA की जीत: 58% जनता का SIR को समर्थन NDA की साख को मजबूत करता है। बिहार में 33-35 सीटों का अनुमान NDA की पकड़ दिखाता है।
  • विपक्ष की कमजोरी: राहुल की यात्रा ने शोर मचाया, लेकिन सबूतों की कमी और EC के जवाब ने इसे कमजोर किया।
  • चुनावी प्रभाव: बिहार विधानसभा चुनाव (अक्टूबर-नवंबर 2025) में SIR का असर अहम होगा। अगर विपक्ष इसे मुद्दा नहीं बना सका, तो NDA की राह आसान होगी।

बिहार का SIR विवाद सियासी जंग का नया मोर्चा बन गया है, लेकिन MOTN सर्वे दिखाता है कि 58% जनता इसे वोटर अधिकार का कदम मानती है। क्या राहुल की 'वोट चोरी' यात्रा NDA की सियासी बादशाहत को चुनौती दे पाएगी?

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