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भूकंप के झटके से कांप उठा रोहतक

Haryana
रोहतक। खोखली हो रही धरती के कारण रोहतक शहर सोमवार को एक बार फिर से कांप उठा। सोमवार को करीब 11 बजकर 55 मिनट पर आए भूकंप से पूरा जिला हिल गया। अचानक आए भूकंप के कारण लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी तरह की कोई हानि नहीं हुई। इसके बावजूद लोग बचाव के लिए कमरों से बाहर निकल आए। प्रदेश में लगातार हो रहे भूमि दोहन व प्राकृति से छेड़छाड़ के कारण बड़ा खतरा पैदा हो गया है। अनेक जगह भूमि धंस रही तो भूकंप की घटनाएं भी बढ़ रही है।

सोमवार को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर आए भूकंप से रोहतक शहर, सांपला, महम, सहित आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। अपने मकान, दुकान या फिर ऑफिस में बैठे लोगों को अचानक झटका लगा और छत के पंखे हिलने लगे। जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। लोग अपनी सीट से उठ खड़े हुए। अनेक जगह तो लोग अपने घरों व दुकानों से बाहर भी निकल आए।

इस बार सोमवार को आए भूकंप का केंद्र बिंदु रोहतक शहर रहा, इससे पहले भी 13 जून को आए भूकंप का केंद्र बिंदु भी रोहतक ही था। बार-बार आ रहे भूकंप से लोग खतरा महसूस करने लगे है। प्रदेश के अधिकतर जिलों में इस साल भूकंप के अनेक झटके लग चुके है। बार-बार लग रहे भूकंप के झटके बड़े खतरे का अंदेशा दिला रहे है।

अति संवेदनशील स्थानों में रोहतक शहर

भू-वैज्ञानिकों की माने तो रोहतक व आसपास के शहर भूकंप की दृष्टि से अतिसंवेदनशील माने जाते हैं। रोहतक व इससे लगने वाले आसपास के शहर जोन-4 में आते हैं। ऐसे में एक ज्यादा तीव्रता का एक बड़ा झटका शहर को बड़ी हानि पहुंचा सकता है। रोहतक के साथ लगने वाले स्थान जींद, बहादुरगढ़, सोनीपत, भिवानी अतिसंवेदनशील इलाकों की गिनती में ही आते हैं।

कंडम भवनों तले मंडरा रहा है खतरा

कंडम व प्राचीन भवनों पर भूकंप का कभी भी कहर टूट सकता है। भूकंप के झटके से से तबाह हुए भवनों की चपेट में आने से कभी लोगों की जिंदगी तबाह हो सकती है, इसके बावजूद नगर निगम व जिला प्रशासन इस मामले में बेफिक्र बना हुआ है। नगर निगम के पास तो कंडम व जर्जर भवनों की सूचि तक उपलब्ध नहीं है, न ही सालों से कंडम भवनों का सर्वे करवा कर उन्हें डेंजर घोषित किया गया है, जबकि शहर के पुराने इलाके में दर्जनों भवन ऐसे है जो कंडम हो चुके है।

क्यों आता हैं भूकंप

भूगर्भ में विभिन्न प्रकार की चट्टान हैं। पृथ्वी के गर्भ में जब कभी भी कोई हलचल होती है तो कोई चट्टान खिसक जाती हैं। इससे तरंग निकलकर उस हलचल को और बढ़ा देती हैं, जिससे भूकंप आ जाता है।
वर्ष 2012 में प्रदेश में कहां-कहां आया भूकंप

शहर तारीख तीव्रता

सोनीपत 28 जनवरी 3.5, सोनीपत 29 जनवरी 3.2. बहादुरगढ़ 5 मार्च 4.9. रोहतक 13 जून 2.8, झज्जर 19 जून 3.5, सोनीपत 22 जून 3.5, सोनीपत 22 जून 3.4, भिवानी 02 जुलाई 3.3।

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