Scam in Ayushman Bharat scheme में बड़ा घोटाला: जबलपुर और ग्वालियर के दो अस्पताल सस्पेंड, फर्जी क्लेम का आरोप
Scam in Ayushman Bharat scheme: मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत 'निरामयम्' योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सालाना ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज देने वाली इस महत्वपूर्ण योजना में गंभीर अनियमितताएं और धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं।
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने थर्ड पार्टी ऑडिट एजेंसी (TPAA) की जांच रिपोर्ट और प्राप्त शिकायतों के आधार पर जबलपुर के लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल और ग्वालियर के ब्रह्माणी हॉस्पिटल को योजना से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। दोनों अस्पतालों पर गलत पैकेज लगाकर, फर्जी क्लेम दाखिल कर और मरीजों को गुमराह करके आर्थिक लाभ उठाने के आरोप लगे हैं।

क्या पाया गया जांच में?
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी नियमित रूप से सूचीबद्ध अस्पतालों के क्लेमों की समीक्षा कर रही है। TPAA की रिपोर्ट में दोनों अस्पतालों में गंभीर वित्तीय और प्रक्रियागत अनियमितताएं सामने आईं:
जबलपुर का लाइफ मेडिसिटी हॉस्पिटल:
- मरीजों को गलत श्रेणी में भर्ती करना।
- गलत पैकेज लगाकर क्लेम दाखिल करना।
- धोखाधड़ी से आर्थिक लाभ उठाना।
- पूर्व में भी इसी तरह की अनियमितताओं पर ₹46 लाख 99 हजार 990 का अर्थदंड लगाया जा चुका है।
- बार-बार चेतावनी के बावजूद गड़बड़ियां दोहराई गईं, इसलिए जनहित में तत्काल निलंबन।
ग्वालियर का ब्रह्माणी हॉस्पिटल:
- मरीजों को गंभीर दिखाकर अनावश्यक क्लेम दाखिल करना।
- गलत तरीके से पैकेज लगाना और धोखाधड़ी।
- पूर्व में ₹21 लाख 8 हजार 300 का अर्थदंड लगाया जा चुका है।
- चेतावनियों के बावजूद अनियमितताएं जारी, इसलिए तत्काल निलंबन।
दोनों अस्पतालों के पास NABH एक्रेडिटेशन सर्टिफिकेट भी नहीं पाया गया, जिसे गंभीर अनियमितता माना गया है।
योजना पर क्या असर?
आयुष्मान भारत 'निरामयम्' योजना गरीब परिवारों को सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज उपलब्ध कराती है। लेकिन ऐसे मामलों से योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि:
पात्र हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी सेवाएं मिलना प्राथमिकता है। किसी भी धोखाधड़ी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोनों अस्पतालों के खिलाफ आगे सख्त कार्रवाई होगी, जिसमें योजना से स्थायी रूप से असंबद्ध करना शामिल है। सभी सूचीबद्ध अस्पतालों की निगरानी जारी रहेगी-दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई।
आम मरीजों पर क्या प्रभाव?
जबलपुर और ग्वालियर के इन अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से इलाज लेने वाले मरीज अब प्रभावित होंगे। उन्हें अन्य सूचीबद्ध अस्पतालों में जाना पड़ेगा। राज्य में योजना के तहत हजारों अस्पताल सूचीबद्ध हैं, लेकिन ऐसे मामलों से गरीब मरीजों का भरोसा टूट सकता है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी ने सभी अस्पतालों को चेतावनी दी है कि योजना का दुरुपयोग न करें। अगर कोई मरीज या हितग्राही ऐसी गड़बड़ी का शिकार हुआ है, तो शिकायत दर्ज करा सकता है-टोल-फ्री नंबर 1800-233-2085 पर संपर्क करें।
यह कार्रवाई योजना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाता है कि कितने और अस्पतालों में ऐसी गड़बड़ियां हो सकती हैं?












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