सावन विशेष : कजरारे..कजरारे... तेरे नैना
कुमद मेहरोत्रा के मुताबिक स्वर्णाभूषण शरीर के ऊपरी भाग में घारण किये जाते हैं और वेदांग की मान्यता है कि सोना संसार के पालक श्री हरि विष्णु को सर्वाधिक प्रिय हैं। इसलिए मान्यता है कि स्वर्ण आभूषण नाभि से ऊपर ही धारण किये जाये। इसलिए श्रृंगार का क्रम सिर से होते हुए पैरों तक पहुंचता है। कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 2 बिंदिया के बारे में, आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 3 के बारे में, जिसें हम काजल कहते हैं।
स्त्री की आंखो की उपमा मछली और हिरणी से दी जाती है या तो वह मीनाक्षी होती है या मृगनयनी। सृष्टि के ये दोनों जीव बेहद चंचल होते है। इनकी चंचलता को किसी की नजर लग जाये तो नजर का अभिशाप आंखो में होकर हृदय में उतर जाता है। काजल ऐसी अशुभ नजरों से बचाव करता है। इसलिए काजल लगाना हर स्त्री के लिए बेहद शुभ माना जाता है। जहां ये आपको बुरी नजर से बचाता है वहीं ये आपकी सुंदरता में चार चांद लगा देता है। ( कल पढ़े श्रृंगार नंबर 4 के बारे में)













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