सावन विशेष : बिंदिया क्यों उड़ाती है निंदिया?
दोस्तों, कल हमने आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बताया था लेकिन आज हम आपको उन 16 श्रृंगारों की महत्ता के बारे में बताते हैं। आज से लगातार 16 दिन हम आपको बतायेगें कि क्यों महिलाओं को कहा जाता है कि वो 16 श्रृंगार करें। जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह श्रृंगार की महत्ता की लेखिका कुमद मेहरोत्रा ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कुमद मेहरोत्रा के मुताबिक स्वर्णाभूषण शरीर के ऊपरी भाग में घारण किये जाते हैं और वेदांग की मान्यता है कि सोना संसार के पालक श्री हरि विष्णु को सर्वाधिक प्रिय हैं। इसलिए मान्यता है कि स्वर्ण आभूषण नाभि से ऊपर ही धारण किये जाये। इसलिए श्रृंगार का क्रम सिर से होते हुए पैरों तक पहुंचता है। कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 1 मांगटीका के बारे में, आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 2 के बारे में, जिसें हम बिंदिया कहते हैं।
आकर्षण में बिंदिया का अपना ही महत्व है। इसे इस तरह से लगाया जाता है कि मांगटीका का एक छोर इसे स्पर्श करे लेकिन पूरी तरह से ढके नहीं। दोनों भवों के बीचों-बीच ये आज्ञाचक्र होता है, जहां ईस्वरीय ऊर्जा के रूप में हमारे संचित संस्कार केन्द्रीत होते हैं। ( कल पढ़े श्रृंगार नंबर 3 के बारे में)
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