घरों, मंदिरों में रखा गोल्‍ड मार्केट में आएगा! सरकार लागू कर सकती है नया सिस्‍टम, क्‍या होता है 'बुलियन बैंक'?

भारत में सोने की बढ़ती मांग और उसके भारी आयात को लेकर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी चुनौती के समाधान के तौर पर ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने सरकार को 'बुलियन बैंक' या गोल्ड बैंकिंग सिस्टम शुरू करने का सुझाव दिया है। इसका उद्देश्य घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में पड़े निष्क्रिय सोने को वित्तीय प्रणाली में लाकर उसका उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करना है।

इससे सोने के आयात पर देश की निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

Bullion Bank

भारत में सबसे अधिक सोना होता है आयात

भारत में सोना केवल एक निवेश नहीं, बल्कि भावनाओं और परंपरा का प्रतीक है। शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, हर मौके पर सोने की खरीदारी होती है। हालांकि, यही बढ़ता सोने का आयात अब देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना रहा है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े आयातक देशों में से एक है।

गोल्ड बैंकिंग का दिया प्रस्‍ताव

प्रतिवर्ष अरबों डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ सोना खरीदने में खर्च हो जाता है। इसी चिंता को देखते हुए, AIJGF ने सरकार के समक्ष 'बुलियन बैंक' बनाने का सुझाव रखा है। संगठन का मानना है कि सोने की मांग कम करने की बजाय, देश में पहले से मौजूद निष्क्रिय सोने का उपयोग बढ़ाना चाहिए, जो वर्तमान में आर्थिक चक्र से बाहर है।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को भेजे गए प्रस्ताव में फेडरेशन ने बताया कि भारतीय घरों, मंदिरों और गोल्ड ETF में लाखों टन सोना आर्थिक रूप से निष्क्रिय पड़ा है। अगर इसे एक विनियमित प्रणाली के जरिए बाजार में शामिल किया जाए, तो भारत को हर साल भारी मात्रा में सोना आयात करने की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

'गोल्ड बैंकिंग सिस्‍टम क्‍या है?

प्रस्तावित 'बुलियन बैंक' मॉडल के तहत, लोग अपना सोना बैंकिंग सिस्टम में जमा कर ब्याज या वित्तीय लाभ पा सकेंगे। वहीं, ज्वेलर्स, रिफाइनर्स और एक्सपोर्टर्स इस सोने को उधार लेकर अपने कारोबार में उपयोग कर पाएंगे, जिससे नए आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनेगी।

AIJGF का कहना है कि निष्क्रिय पड़े सोने को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना बेहद जरूरी है। खास तौर पर मंदिरों और बड़े निवेशकों के पास रखे सोने को औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल करने से यह देश के लिए एक बड़ा आर्थिक संसाधन बन सकता है, जिससे विकास को गति मिलेगी।

निष्क्रिय सोने को आर्थिक संसाधन बनाने की योजना

संगठन ने गोल्ड ETFs को भी नियंत्रित तरीके से अपने फिजिकल गोल्ड का कुछ हिस्सा उधार देने की अनुमति देने का सुझाव दिया है, ताकि घरेलू बाजार में तरलता बढ़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ज्वेलरी इंडस्ट्री को भी फायदा मिलेगा क्योंकि ज्वेलर्स को आसानी से घरेलू सोना उपलब्ध होगा और उनकी परिचालन लागत कम होगी।

क्‍या ये सिस्‍टम लागू करना आसान होगा?

हालांकि, इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा। भारतीय परिवारों का भरोसा जीतना एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि वे पारंपरिक रूप से अपना सोना घर में सुरक्षित रखते हैं। सरकार को जमा किए गए सोने की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए मजबूत नियामक ढाँचा भी तैयार करना होगा ताकि जनता का विश्वास जीता जा सके।

फिलहाल, सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट और विदेशी मुद्रा पर पड़ रहे दबाव को देखते हुए, 'बुलियन बैंक' भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

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