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जानिए... क्यों किया जाता है जया-विजया एकादशी का व्रत...?

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी को भगवान विष्णु और लक्ष्मी की कृपा के लिए किया जाने वाला सबसे बड़ा व्रत बताया गया है। यह व्रत जीवन के समस्त भोग, विलास, ऐश्वर्य, सुख, संपत्ति, उत्तम जीवनसाथी और श्रेष्ठ कार्य-व्यवसाय पाने के लिए किया जाता है। प्रत्येक माह में दो एकादशी व्रत आते हैं। इस तरह एक वर्ष में 24 एकादशियां आती हैं। अधिकमास होने पर इनकी संख्या 26 हो जाती हैं। वैसे तो वर्षभर की एकादशी का व्रत किया जाना चाहिए, लेकिन जो जातक पूरे साल की एकादशी का व्रत नहीं कर पाते वे यदि मात्र दो एकादशियां कर लें तो उनके सारे मनोरथ पूरे हो सकते हैं। ये दो एकादशियां हैं जया एकादशी और विजया एकादशी। ये दोनों एकादशियां लगातार आती हैं। इन्हें करके जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में जय और विजय हासिल की जा सकती है।

जया एकादशी माघ मास के शुक्ल पक्ष में आती है। इस बार यह 16 फरवरी को आ रही है और विजया एकादशी फाल्गुन कृष्ण पक्ष में आती है। इस बार विजया एकादशी 2 मार्च को आ रही है। संयोग यह है कि दोनों एकादशियों के दिन शनिवार है। इन दोनों एकादशियों को करने से जातक किसी भी कार्य में पराजित नहीं होता।

जया एकादशी : 16 फरवरी 2019, शनिवार
विजया एकादशी : 2 मार्च, 2019, शनिवार

विशेष संकल्प की पूर्ति के लिए करें

विशेष संकल्प की पूर्ति के लिए करें

जया और विजया एकादशी का व्रत किसी विशेष मनोरथ की पूर्ति के लिए किया जाता है। यदि किसी युवक या युवती का विवाह नहीं हो पा रहा है। किसी की जॉब नहीं लग पा रही है। बिजनेस कार्य-व्यवसाय जम नहीं पा रहा है या नया कार्य प्रारंभ करना है। धन-संपत्ति संबंधी मामले अटके हुए हैं। या कोई अन्य समस्या है तो व्यक्ति को जया और विजया एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। ये दोनों व्रत करने के लिए जया एकादशी के दिन प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं। इस दिन नहाने के जल में गंगाजल डालकर स्नान करें। सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अर्घ्य दें और अपने घर में भगवान विष्णु-लक्ष्मी का पूजन करें। अब मन-वचन और कर्म की पवित्रता रखते हुए अपने किसी अभीष्ट कार्य की पूर्ति के लिए पूर्ण मंत्रोच्चार सहित दोनों एकादशियों के व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा-भक्ति के साथ दोनों एकादशियों का व्रत करें।

व्रत पूर्ण होने पर क्या करें

व्रत पूर्ण होने पर क्या करें

जया और विजया दोनों एकादशी का व्रत पूर्ण कर लेने के बाद विजया एकादशी के अगले दिन यानी फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की द्वादशी (3 मार्च 2019) के दिन प्रात:काल किसी पंडित को पत्नी सहित बुलवाकर एकादशी व्रत का पारणा करवाएं। इसके लिए व्रत पूर्ण होने का पूरा विधान पंडित से करवाएं। पंडित को पत्नी सहित भोजन करवाएं और साथ ही अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों को भोजन करवा सकते हैं।

ये होंगे व्रत के लाभ

ये होंगे व्रत के लाभ

- जया और विजया एकादशी का व्रत करने से जातक के जीवन की समस्त इच्छाएं पूर्ण होने लगती हैं।

- जिस विशेष उद्देश्य की पूर्ति के लिए व्रत किया जाता है तो वह शीघ्र ही पूरी हो जाती है।
- धन, संपत्ति, सुख, वैभव, ऐश्वर्य और भोग विलास की सभी वस्तुएं जातक को सहज ही उपलब्ध होने लगती है।
- मान-सम्मान, पद प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। जॉब में प्रमोशन, बिजनेस में प्रॉफिट होने लगता है।
- दोनों एकादशियों का व्रत करने से जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्र मजबूत होता है। कुंडली के अन्य ग्रह भी संतुलित होते हैं।
- ये दोनों एकादशियां शनिवार के दिन आ रही हैं इसलिए शनि की पीड़ा भी शांत होती है। कालसर्प दोष, सर्प दोष, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण दोष दूर होते हैं।
- वैवाहिक कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

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