Nepal News: रूबी ठाकुर कौन? 26 साल की उम्र में नेपाली संसद की बनीं डिप्टी स्पीकर, पिता सऊदी में मजदूर
Ruby Thakur Youngest Deputy Speaker Nepal: नेपाल की राजनीति में आए इस बड़े बदलाव ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां "जेन जी" (Gen Z) युवाओं ने पुरानी राजनीतिक पार्टियों को हटाकर सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।
36 वर्षीय बालेंद्र शाह देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने हैं, तो वहीं मात्र 26 साल की रूबी ठाकुर सबसे कम उम्र की डिप्टी स्पीकर बनकर उभरी हैं। यह बदलाव दिखाता है कि अब नेपाल के युवा सिर्फ वोट देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे देश चलाने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहे हैं।

Ruby Thakur: संघर्ष से संसद तक
रूबी ठाकुर का सफर किसी मिसाल से कम नहीं है। उनका जन्म साल 2000 में धनुषा के एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता सऊदी अरब में मजदूरी करते हैं और मां खेती का काम संभालती हैं। रूबी ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के बाद एक कंसल्टेंसी में 20,000 रुपये की नौकरी भी की। अपनी मेहनत और हरक साम्पांग की विचारधारा से प्रेरित होकर वह राजनीति में आईं और आज नेपाल की प्रतिनिधि सभा में दूसरी सबसे बड़ी भूमिका निभा रही हैं।
Gen Z politics Nepal: ऐतिहासिक चुनावी जीत
नेपाल की संसद (प्रतिनिधि सभा) में कुल 275 सीटें हैं। डिप्टी स्पीकर के चुनाव में रूबी ठाकुर को भारी समर्थन मिला। उन्हें कुल 229 वोट हासिल हुए, जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है। खास बात यह है कि उन्हें अपनी पार्टी 'श्रम संस्कृति' के अलावा सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों का साथ मिला। नेपाल के संविधान के मुताबिक स्पीकर या डिप्टी स्पीकर में से एक महिला होनी चाहिए, और रूबी ने इस जिम्मेदारी को युवा जोश के साथ स्वीकार किया है।
ये भी पढ़ें: Balen Shah India Visit: भारत आएंगे नेपाल के पीएम बालेन शाह, PM मोदी का न्योता किया स्वीकार
Nepal 2026 elections: कैसे चुनी गईं रूबी ठाकुर?
नेपाल में चुनाव के लिए "मिक्स्ड इलेक्टोरल सिस्टम" का इस्तेमाल होता है। इसमें एक वोट उम्मीदवार को और दूसरा पार्टी को दिया जाता है। रूबी ठाकुर को समानुपातिक प्रणाली (PR) के जरिए चुना गया है। इस व्यवस्था का मकसद समाज के हर तबके को संसद तक पहुंचाना है। रूबी को मधेशी समुदाय के कोटे से सांसद बनाया गया। इस सिस्टम की वजह से ही आज एक साधारण पृष्ठभूमि वाली लड़की देश के सर्वोच्च सदन के महत्वपूर्ण पद पर बैठ पाई है।
ये भी पढ़ें: Iran War Impact: भारत के पड़ोस में गैस-तेल का संकट, आधे भरे मिलेंगे सिलेंडर, 2 दिन छुट्टी- वर्क फ्रॉम होम भी
सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी जारी
राजनीति के साथ-साथ रूबी अपनी सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी जारी रखे हुए हैं। उन्होंने संकल्प लिया है कि वह संसद में सामाजिक बुराइयों जैसे दहेज प्रथा, बाल विवाह और महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाएंगी। उनका मानना है कि कानून होने के बावजूद मधेशी इलाकों में ये समस्याएं आज भी मौजूद हैं। रूबी का चुना जाना नेपाल की लाखों लड़कियों के लिए एक प्रेरणा है कि कड़ी मेहनत से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।












Click it and Unblock the Notifications