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राहु-केतु के व्रत दिलाएंगे सारी समस्याओं से मुक्ति

क्या आप जानते हैं यह सब अचानक क्यों होने लगता है। यदि आप अपनी जन्म कुंडली का अध्ययन करवाएंगे तो संभव है कि उसमें राहु-केतु की खराब स्थिति सामने आए। हो सकता है आपके जीवन में आ रही समस्त समस्याओं का कारण राहु-केतु हों। आइये जानते हैं राहु-केतु के कारण समस्या आ रही है तो उसे पहचानें कैसे

Puja

नई दिल्ली। किसी व्यक्ति के जीवन में अचानक कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। सब कुछ ठीक चलते हुए अचानक घर में कोई न कोई व्यक्ति बीमार रहने लगता है। घर के सदस्यों की दुर्घटनाएं होने लगती हैं। धन की हानि होने लगती और परिवार और बाहरी स्थितियों में लड़ाई-झगड़े होने लगते हैं। क्या आप जानते हैं यह सब अचानक क्यों होने लगता है। यदि आप अपनी जन्म कुंडली का अध्ययन करवाएंगे तो संभव है कि उसमें राहु-केतु की खराब स्थिति सामने आए। हो सकता है आपके जीवन में आ रही समस्त समस्याओं का कारण राहु-केतु हों। आइये जानते हैं राहु-केतु के कारण समस्या आ रही है तो उसे पहचानें कैसे और उन्हें दूर कैसे करें।

ऐसे पहचानें समस्या

ऐसे पहचानें समस्या

यदि आपके जीवन में अचानक धन हानि होने लगे। बनते-बनते काम अटकने लगें। अचानक मन विचलित हो। कभी एकदम खुशी महसूस हो और कभी अचानक दुख। आपकी निर्णय क्षमता कमजोर होने लगे। आप चीजों को यहां-वहां रखकर भूल जाएं। आप बेवजह के लड़ाई-झगड़ों में उलझ जाएं। आपके मान-सम्मान में कमी आने लगे.. यदि यह सब आपके जीवन में हो रहा है तो संभव है कि आपकी कुंडली में राहु-केतु की स्थिति ठीक नहीं चल रही है। हो सकता है इस दौरान आपको राहु-केतु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो। गोचर में राहु-केतु की दृष्टि किसी शुभ ग्रह पर पड़ रही हो। यदि ऐसा है तो उसके लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। वे कर सकते हैं।

क्या करें उपाय

क्या करें उपाय

राहु-केतु से संबंधित समस्याएं आएं तो राहु-केतु के व्रत किए जाते हैं। शास्त्रों के अनुसार राहु-केतु के व्रत 18 शनिवार तक किए जाते हैं। इसके अनुसार प्रत्येक शनिवार को व्रत रखें। एक समय भोजन करें और दिनभर काले वस्त्र धारण करें। राहु के व्रत में ऊं भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः मंत्र एवं केतु के व्रत में ऊं स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः मंत्र की 18, 11 या 5 माला जाप करें।

राहु-केतु से संबंधित पीड़ा शांत होगी

राहु-केतु से संबंधित पीड़ा शांत होगी

जाप के समय एक पात्र में जल, दूर्वा और कुशा अपने पास रखें। जाप पूर्ण होने के बाद इन्हें पीपल के वृक्ष की जड़ में चढ़ा दें। भोजन में मीठा चूरमा, मीठी रोटी, रेवड़ी और काले तिल से बने पदार्थ खाएं। रात में पीपल वृक्ष के नीचे घी का दीपक लगाएं। इस प्रकार यह क्रम लगातार 18 शनिवार तक करें। इससे राहु-केतु से संबंधित पीड़ा शांत होती है। यह व्रत वैसे तो किसी भी शनिवार से प्रारंभ किया जा सकता है, लेकिन फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष और चैत्र माह में प्रारंभ करना विशेष फलदायी होता है।

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