UP में कल होगा मंत्रिमंडल विस्तार, कौन-कौन लेगा मंत्री पद की शपथ? लिस्ट में सपा की बागी विधायक का भी नाम
UP Cabinet Expansion 2026: उत्तर प्रदेश की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट का विस्तार कल (10 मई) होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को होने वाले इस समारोह में 6 नए चेहरे मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।
यूपी में फिलहाल कुल 54 मंत्री हैं, जबकि नियमों के अनुसार यह संख्या 60 तक हो सकती है। अब उन्हीं 6 खाली जगहों को भरने के लिए संभावित नाम सामने आ चुके हैं।

लिस्ट में सपा की बागी विधायक का भी नाम
सूत्रों के अनुसार, इन नामों में सपा की बागी विधायक पूजा पाल और मनोज पाण्डे का नाम सबसे ऊपर है, जो विपक्षी खेमे में हलचल पैदा कर सकता है। इनके अलावा कृष्णा पासवान, भूपेंद्र चौधरी, अशोक कटारिया और रोमी साहनी को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। इस विस्तार के जरिए भाजपा आगामी चुनावों से पहले अपने संगठन और सहयोगी दलों को एक मजबूत संदेश देने की कोशिश कर रही है।
UP में जाट, गुर्जर और सिखों को साधने की बड़ी तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, पश्चिमी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा अपने सबसे बड़े जाट चेहरे चौधरी भूपेंद्र सिंह को कैबिनेट में शामिल कर सकती है। वहीं, गुर्जर समाज के बीच पैठ बढ़ाने के लिए पूर्व मंत्री और एमएलसी अशोक कटारिया की वापसी लगभग तय मानी जा रही है।
कुर्मी वोट बैंक को साधने की भी तैयारी
इतना ही नहीं, लखीमपुर खीरी के निघासन कांड के बाद सिख समुदाय और पंजाबी खत्री बिरादरी की नाराजगी दूर करने के लिए रोमी साहनी को भी मंत्री बनाया जा सकता है। चर्चा यह भी है कि अवध क्षेत्र के कुर्मी वोट बैंक को साधने के लिए इस बिरादरी के एक विधायक को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है।
बंगाल के 'परफॉर्मर्स' का बढ़ेगा कद
इस विस्तार में केवल नई नियुक्तियां ही नहीं, बल्कि मौजूदा मंत्रियों के पोर्टफोलियो में भी बड़े बदलाव के संकेत हैं। सूत्रों का दावा है कि कई राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों को उनके बेहतर काम के आधार पर कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रमोट किया जा सकता है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश सरकार के उन मंत्रियों को 'प्रमोशन' मिलना तय माना जा रहा है, जिन्होंने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर शानदार काम किया था।
बुजुर्ग मंत्रियों पर 'नो रिस्क' पॉलिसी
पार्टी के भीतर एक धड़ा इस पक्ष में भी है कि उम्रदराज मंत्रियों को फिलहाल न हटाया जाए। दरअसल, यूपी में अगले साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होने हैं और कुछ ही महीनों में आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में भाजपा नेतृत्व किसी भी क्षेत्रीय क्षत्रप या अनुभवी बुजुर्ग मंत्री को हटाकर चुनाव से ठीक पहले विरोध मोल लेने के मूड में नहीं है। यह विस्तार कम समय के लिए जरूर है, लेकिन इसका मकसद असंतुष्ट धड़ों को शांत कर चुनाव में एकजुट होकर उतरना है।
UP Election 2027: सत्ता के महासंग्राम की तैयारी शुरू
दरअसल, उत्तर प्रदेश की 18वीं विधानसभा का कार्यकाल मार्च 2022 से मार्च 2027 तक है। 11 मार्च 2022 को गठित इस विधानसभा में 403 सदस्य हैं और इसका कार्यकाल 5 साल का है। यानी मार्च 2027 तक उत्तर प्रदेश में चुनाव संपन्न हो जाएंगे और मार्च में नई सरकार का गठन होगा।
उत्तर प्रदेश देश की सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य है और कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता तक जाने का रास्ता लखनऊ से होकर गुजरता है। बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी का गठबंधन देश के सबसे बड़े राज्य की सत्ता में वापसी कर बीजेपी के विजय रथ को रोकने की कोशिश में लगा है।
















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