TN Politics 2026: कांग्रेस ने छोड़ा स्टालिन का साथ, अखिलेश ने थामा हाथ! बोले- मुसीबत में साथ छोड़ने वाले नहीं

TN Politics 2026: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सियासी उठापटक अब राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति तक पहुंच गई है। कांग्रेस द्वारा डीएमके से दूरी बनाकर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को समर्थन देने के फैसले के बाद INDIA गठबंधन के भीतर असहजता खुलकर सामने आने लगी है।

इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर अप्रत्यक्ष हमला बोलते हुए बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

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Akhilesh Yadav support DMK: अखिलेश यादव ने स्टालिन को दिया सहारा

अखिलेश यादव ने शुक्रवार, 8 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के साथ तस्वीर साझा की। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा,'हम वो लोग नहीं हैं जो मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ छोड़ देते हैं।'

राजनीतिक हलकों में अखिलेश का यह बयान कांग्रेस के खिलाफ तंज के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि एक दिन पहले ही कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके से नाता तोड़कर विजय की TVK सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था।

INDIA Alliance Rift: तमिलनाडु में बदले समीकरण ने बढ़ाई INDIA ब्लॉक की बेचैनी

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने अपने पहले ही चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से पार्टी अभी भी पीछे है।

कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों का समर्थन देकर विजय की दावेदारी को मजबूत किया है। लेकिन इसके साथ ही उसने डीएमके से दूरी बना ली, जिसने INDIA गठबंधन के भीतर नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम विपक्षी एकजुटता की राजनीति पर असर डाल सकता है, खासकर तब जब भाजपा के खिलाफ राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों को साथ रखने की चुनौती पहले से मौजूद है।

अखिलेश-ममता-स्टालिन की तस्वीर के राजनीतिक मायने

दिलचस्प बात यह है कि अखिलेश यादव ने यह बयान ऐसे समय दिया है जब वे कोलकाता में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से मुलाकात कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल में TMC की चुनावी हार के बाद यह मुलाकात विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की तरफ इशारा मानी जा रही है। तस्वीर में डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन की मौजूदगी ने संदेश को और स्पष्ट कर दिया। माना जा रहा है कि अखिलेश ने कांग्रेस को यह जताने की कोशिश की है कि क्षेत्रीय दलों के बीच भरोसे की राजनीति अभी भी कायम है।

वाम दलों की बैठकें, विजय के समर्थन पर फैसला आज

तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर अब वाम दलों की भूमिका अहम हो गई है। चेन्नई में CPI(M) की कार्यकारिणी बैठक जारी है, वहीं CPI की बैठक भी पार्टी कार्यालय में चल रही है। दोनों दलों के पास विधानसभा में 2-2 विधायक हैं। इसके अलावा विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) के भी 2 विधायक हैं। अगर CPI, CPI(M) और VCK विजय की TVK को समर्थन दे देते हैं, तो विजय का गठबंधन आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर सकता है।

TVK ने शुरू किया समर्थन जुटाने का अभियान

7 मई की रात TVK के संयुक्त महासचिव सीटीआर निर्मल कुमार ने पार्टी नेताओं के साथ CPI कार्यालय पहुंचकर समर्थन मांगा। इससे पहले TVK प्रमुख विजय ने भी वाम दलों को पत्र भेजकर समर्थन की अपील की थी। CPI(M) नेता पी शणमुगम ने कहा कि पार्टी को विजय का पत्र मिला है और इस पर राज्य समिति की बैठक में चर्चा होगी। उन्होंने कहा-संविधान के अनुसार सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते विजय को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए। तमिलनाडु में पहली बार ऐसी त्रिशंकु विधानसभा बनी है।

राज्यपाल की भूमिका पर भी उठे सवाल

सरकार गठन को लेकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर की भूमिका भी चर्चा में है। वाम दलों और CPI ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल विजय से पहले बहुमत साबित करने की मांग कर रहे हैं, जो संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है। CPI ने बयान जारी कर कहा,सबसे बड़ी पार्टी के नेता को पहले सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए। शपथ से पहले बहुमत साबित करने की शर्त उचित नहीं है।

क्या INDIA गठबंधन में बढ़ेगी दूरी?क्यों टूटा कांग्रेस-DMK का 20 साल पुराना रिश्ता?

कांग्रेस और DMK का साथ 2004 से चला आ रहा था। लेकिन 2026 के चुनाव परिणामों में मिली हार के बाद कांग्रेस ने भविष्य की राजनीति (2029 लोकसभा चुनाव) को देखते हुए विजय की TVK के साथ जाना बेहतर समझा। कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम ने कहा कि तमिलनाडु की जनता 'बदलाव' चाहती थी और कांग्रेस उसी जनादेश का सम्मान कर रही है।

तमिलनाडु की सियासत अब सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रह गई है। कांग्रेस के फैसले के बाद विपक्षी दलों के बीच भरोसे और रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। अखिलेश यादव का बयान इसी असहजता की तरफ इशारा करता है। अब नजर तमिलनाडु में सरकार गठन पर है, लेकिन साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या यह घटनाक्रम 2029 की राष्ट्रीय विपक्षी राजनीति और INDIA गठबंधन की एकजुटता को प्रभावित करता है या नहीं।

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