Millets : इन अनाजों से बनते हैं 'सुपरफूड', बाजरा जैसे मिलेट्स की खेती में सुनहरा भविष्य
ज्वार और बाजरा को मिलेट्स यानी मोटे अनाज के रूप में जाना जाता है। पोषक तत्वों से भरपूर इन अनाजों की खेती कर किसान शानदार मुनाफा कमा सकते हैं। जानिए कैसा है मिलेट्स का मार्केट
नई दिल्ली, 24 मई : यूक्रेन और रूस के युद्ध के बीच दुनियाभर में खाद्यान्न संकट गहराने की आशंका है। बदलते पर्यावरण और खेती-किसानी में बढ़ते लागत के बीच कौन सी फसल उपजाई जाए, इस बात को लेकर किसानों के बीच लगातार चिंता का माहौल रहता है। हालांकि, किसानों की चिंता को दूर करने का एक शानदार ऑप्शन मोटे अनाज की खेती हो सकती है। मोटा अनाज यानी मिलेट की खेती यूं तो कई इनोवेटिव बात नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की ओर से 2023 को मिलेट ईयर घोषित किए जाने के बाद इसकी चर्चा और डिमांड दोनों बढ़ी है। हैदराबाद स्थित भारतीय कदन्न (मोटा अनाज) अनुसंधान संस्थान (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिलेट्स रिसर्च- IIMR) एक अनुमान के मुताबिक भारत 170 लाख टन से अधिक मोटे अनाज का उत्पादन करता है। ये एशिया का 80 प्रतिशत और वैश्विक उत्पादन का 20 प्रतिशत है।

मिलेट्स का उत्पादन
अफ्रीका में सबसे अधिक 489 लाख हेक्टेयर जमीन पर मोटे अनाज की खेती होती है। उत्पादन लगभग 423 लाख टन होता है। केंद्र सरकार के मुताबिक भारत मोटे अनाज का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक (138 लाख हेक्टेयर खेत में) है। ऐसे में किसानों को ये जानना चाहिए कि मोटे अनाज की खेती यानी मिलेट फार्मिंग में किस तरह के विकल्प हैं, जिन्हें अपनाकर आर्थिक लाभ कमाया जा सकता है। पढ़िए, मिलेट के मार्केट और किसानों के लिए संभावनाओं पर वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट

बाजरे के उपयोग का प्रमाण यजुर्वेद में भी
मिलेट की खेती से किसानों को मोटा मुनाफा हो सकता है। सेहत के लिए भी मिलेट यानी मोटा अनाज फायदेमंद होता है। मिलेट में सर्वाधिक प्रचतिल बाजरा है। बाजरा में भी कई वेराइटी मौजूद हैं। इनमें प्रियांगु (fox tail millet), स्यामक (black finger millet) और अनु (barnyard millet) प्रमुख हैं। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक उपमहाद्वीप के कई इलाकों में बाजरे के उपयोग का प्रमाण यजुर्वेद में भी मिलता है। 1500 ईसा पूर्व भी बाजरा उगाए और खाए जाते थे। मोटा अनाज खाने वालों के बीच पॉपुलर बाजरे की वेराइटी में रागी (pearl millet), ज्वार (sorghum aka the great millet) और प्रियांगु (fox tail millet) अहम हैं।

भारत में अफ्रीकी बाजरे की खेती
ये काफी दिलचस्प है कि भारत मोटे अनाज, यानी मिलेट का सबसे बड़ा उत्पादक है। भारत में पैदा होने वाला मिलेट वैश्विक उत्पादन का लगभग एक तिहाई है। भारत के अलावा चीन, नाइजर और नाइजीरिया बाजरा के अन्य प्रमुख उत्पादक देश हैं। पश्चिमी अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में उगने वाली प्राकृतिक किस्म वाला बाजरा भारत में भी उपजाया जा रहा है। भारत ने इसे ओकाश्ना वन (Okashna 1) किस्म के रूप में विकसित किया है। डिमांड बढ़ने के कारण भारत में ओकाश्ना वेराइटी के बाजरे (India Okashna 1 millet) की उपज दोगुनी कर दी गई है।

कई स्वादिष्ट व्यंजनों में मिलाते हैं बाजरा
जिम्बाब्वे, नामीबिया, मॉरिटानिया, बेनिन और चाड में भी ओकाश्ना वन (Okashna 1) वेराइटी के बाजरे का ट्रायल उत्साह बढ़ाने वाला रहा है। किसान उत्साह के साथ बाजरे की खेती अपना रहे हैं। रूस, जर्मनी और चीन जैसे कई देशों में बाजरे का उपयोग पारंपरिक दलिया व्यंजनों में किया जाता है। इन्हें मांस या सब्जियों से तैयार ग्रेवी वाली रेसिपी (savoury stews) में भी मिलाया जाता है। वियतनाम की पॉपुलर मिठाई- बन दा के (Banh da ke) में सूखे नारियल के टुकड़े के साथ पिसा हुए बाजरा और मूंग मिलाया जाता है।

भारत में बदल रही फूड हैबिट
हालांकि, यह भी एक विडंबना ही है कि सबसे बड़े मिलेट उत्पादक- भारत में पिछले कुछ दशकों में बाजरे की खपत काफी कम हुई है। आर्थिक विकास और शहरीकरण के साथ, भोजन की आदतें बदल रही हैं। भारत में सीरियल या गेहूं (cereals), रिफाइन्ड चीनी और तेल पर आधारित चीजों को खाने की डिमांड बढ़ रही है।

7000 साल पहले भी बाजरा का सेवन !
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक खेती-किसानी की औपचारिक शुरुआत से पहले हमारे पूर्वज बाजरे पर ही निर्भर रहते थे। जंगली घास जैसी दिखने वाले बाजरे के संबंध में इतिहासकारों का मानना है कि इसका सेवन 7000 साल पहले भी किया जा चुका है। एएनआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि 7000 साल से भी पहले इंसानों ने बाजरा का सेवन किया था, इसके प्रमाण खोजे गए हैं। उत्तरी चीन में मिट्टी के कटोरे में अच्छी तरह संरक्षित अवस्था में नूडल्स भी पाए गए हैं। इस आधार पर लोगों का मानना है कि हजारों वर्ष पहले समुदायों द्वारा की जाने वाली अन्य फसलों की 'खेती' से पहले बाजरे का सेवन किया जाता रहा है।

APEDA के मुताबिक भारत में मिलेट की 8 वेराइटी
भारत से 38 देशों में भेजा जाने वाला जवार एक्सपोर्ट क्वालिटी के मामले में उत्साहजनक आंकड़े दिखाता है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक 2020-21 में 2.298 करोड़ से अधिक, जबकि 2021-22 में 7.408 करोड़ से अधिक का जवार एक्सपोर्ट किया गया। इंपोर्ट करने वाले टॉप तीन देश, सूडान, कनाडा और अमेरिका रहे। APEDA के मुताबिक मिलेट की 8 वेराइटी (APEDA Millet varities) इंडिया से बाहर भेजी जाती है। इनको पहचानने के लिए अलग-अलग एचएस कोड दिए जाते हैं।
| HS CODE | मिलेट की वेराइटी के नाम |
| 10082110 | बीज क्वालिटी के मिलेट (जवार) |
| 10082120 | बीज क्वालिटी के मिलेट (बाजरा) |
| 10082130 | मिलेट (रागी) बीज क्वालिटी वाले |
| 10082910 | मिलेट (जवार) बीज को छोड़कर दूसरे प्रकार |
| 10082920 | मिलेट (बाजरा) बीज को छोड़कर दूसरे प्रकार के अनाज |
| 10082930 | मिलेट (रागी) बीज के अलावा अन्य |
| 10083010 | मिलेट (कैनरी) बीज जैसी क्वालिटी वाले |
| 10083090 | मिलेट (कैनरी) बीज के अलावा अन्य |

बाजरा मधुमेह नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण
आम तौर से बाजरा को 'गरीबों के भोजन' के रूप में पहचाना जाता है। आर्थिक रूप से संपन्न लोग अपनी थाली में बाजरे से बनी चीजें लेने से हिचकते हैं। लगातार बढ़ रही बीमारियां और अपंग बनते जा रहे शरीर से उपजी चिंता के बाद दुनियाभऱ में भोजन पर एक बार फिर गंभीरता से मंथन शुरू हुआ है। यूएन में मिलेट पर रिजॉल्यूशन इसी का प्रमाण है। भोजन विज्ञानियों के मुताबिक बाजरा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (glycemic index) कम होता है। इसका सेवन मधुमेह नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बाजरे में मौजूद डीऑक्सीडेंट्स का परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि बाजरे से उम्र बढ़ने की प्रक्रिया धीमी की जा सकती है। ग्लूटेन संबंधी विकारों और गेहूं की एलर्जी से पीड़ित लोग भी गेहूं की जगह बाजरे का सेवन कर सकते हैं।

लगभग एक सुपरफूड है बाजरा
बाजरा बहुत कठोर होता है। शुष्क, अर्ध-शुष्क और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में (arid, semi arid and drought-prone regions) इसकी फसल काफी अच्छी तरह विकसित होती है। बाजरे की फसल लगभग हर मौसम को सहन कर लेती है। प्रमुख अनाज के रूप में पॉपुलर- गेहूं और चावल के साथ तुलना करने पर बाजरा तनिक भी कमतर नहीं। बाजरे में वजन से अधिक प्रोटीन होता है। फलों और ग्रीन टी की तुलना में इसमें सूक्ष्म पोषक तत्वों का भी भंडार होता है। इसके फायदों को देखते हुए बाजरे को 'न्यूट्रास्युटिकल्स' (nutraceuticals) नाम दिया है - मतलब लगभग एक सुपरफूड।

नवीन पटनायक की सरकार में बाजरा
यह भी उत्साहजनक है कि भारत से बाजरा का एक्सपोर्ट बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में 201 करोड़ रुपये से अधिक बाजरा निर्यात किया गया। बाजरा निर्यातकों में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में शामिल है। बाजरा की मार्केट डिमांड को देखते हुए ओडिशा में बाजरा मिशन चलाया जा रहा है। इससे ओडिशा में बाजरा उत्पादन बढ़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक बाजरे के सेवन से बच्चों का कुपोषण दूर होता है। साथ ही स्तनपान कराने वाली महिलाओं की सेहत पर पॉजिटिव असर पड़ता है।
नवीन पटनायक की सरकार में बाजराओडिशा मिलेट मिशन के तहत राज्य के 13 आदिवासी बहुल जिलों में बाजरा टिफिन सेंटर बनाने की शुरुआत भी की गई है। ओडिशा सरकार की पहल- मिशन बाजरा को संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (UNWFP) का भी साथ मिल रहा है। बाजरा को बढ़ावा देने में ओडिशा के उल्लेखनीय योगदान को सम्मानित करने के लिए भारत सरकार ने भी नवीन पटनायक की सरकार की प्रशंसा की थी। बाजरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए सितंबर, 2021 में नीति आयोग ने ओडिशा सरकार को पौष्टिक अनाज अवॉर्ड देने का ऐलान किया था।

बाजरे के फाइबर से कैंसर से लड़ने में भी मदद
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी ने भी दिसंबर 2021 में किसानों से धान की बजाय बाजरे की खेती करने की अपील की थी। सीएम रेड्डी आंध्र प्रदेश में बाजरा बोर्ड और बाजरे के उत्पादों को बेहतर मार्केट मिले इस मकसद के लिए प्रोसेसिंग यूनिट बनाने का भी ऐलान किया था।
बाजरे में मिलनेवाले पोषक तत्व
मिलेट्स की कैटेगरी में आने वाले- बाजरा और रागी में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इनके सेवन से कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में भी मदद मिलती है। आईसीएमआर (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) फाइबर की कमी पूरी करने के लिए एक वयस्क को दिन में 40 ग्राम फाइबर युक्त चीज खानी चाहिए। रागी और बाजरा इसके बढ़िया विकल्प हैं। अप्रैल, 2018 में पोषक-अनाज के रूप में अधिसूचित बाजरा (millets notified as nutri-cereals) प्रोटीन, फाइबर, खनिज, लौह, कैल्शियम (Protein, Fibre, Minerals, Iron, Calcium) से भरपूर है।

बाजरे से जुड़ा पीएम मोदी का किस्सा
बाजरे से जुड़े कई किस्से ऐसे हैं जो भावुक भी कर सकते हैं। ऐसा ही एक किस्सा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन से जुड़ा है। 1980 की इस घटना में पीएम मोदी एक स्वयंसेवक के घर जाने और बाजरे की आधी रोटी खाने की मार्मिक कहानी अपने साथ सफर करने वाले गुजरात के डॉ अनिल रावल को सुनाते हैं।
सरकार का ध्यान पौष्टिक बीजों पर
मिलेट को बढ़ावा देने के लिए पीएम मोदी ने सितंबर, 2021 में फसलों की 35 किस्में देश को समर्पित की थी। इनमें बाजरा और जवार भी शामिल थे। 35 फसलों की लॉन्चिंग के समय पीएम मोदी ने कहा था, बदलते मौसम में सरकार का ध्यान पौष्टिक बीजों पर है।

APEDA ने बनाए मिलेट इन मिनट्स उत्पाद
गत अप्रैल, 2022 में एशिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खाद्य एवं आतिथ्य मेला (B2B) के दौरान कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA-एपीडा) ने 5 रुपये से 15 रुपये तक की किफायत दरों पर उत्पादों की सीरीज लॉन्च की थी। APEDA के मुताबिक खाने-पीने की ये चीजें लोगों की भाग-दौड़ वाली जिंदगी में उनके सुविधानुसार स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
जल्दी खराब नहीं होते ऐसे उत्पाद
मोटे अनाज से बने सभी उत्पाद ग्लूटेन मुक्त, 100 फीसद नैचुरल हैं। लॉन्च किए गए उत्पादों में क्रीम बिस्कुट, नमकीन बिस्कुट, दूध बिस्कुट, रागी पीनट बटर, ज्वार पीनट बटर, ज्वार उपमा, पोंगल, खिचड़ी और माल्ट (ज्वार, रागी, बाजरा) शामिल हैं। एपीडा ने उपमा, पोंगल, खिचड़ी, नूडल्स, बिरयानी जैसे रेडी-टु-ईट (Ready-to-Eat or RTE) कैटेगरी के उत्पाद भी बनाए हैं। 'मिलेट इन मिनट्स' उत्पादों की ये सीरीज मोटे अनाज से तैयार पहला RTE उत्पाद है। इन्हें बिना किसी एडिटिव्स, फिलर्स और प्रिजर्वेटिव्स के वैक्यूम प्रॉसेस कर पैक किया जाता है। इनकी शेल्फ लाइफ लगभग एक साल होती है, यानी इन उत्पादों में पोषण मूल्य 12 महीनों तक मूल रूप में बरकरार रहता है।

मोटे अनाज को अच्छा मार्केट, महिलाओं की मदद कर रहा APEDA
मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अच्छा मार्केट मिले, इस मकसद से APEDA, निर्यात की कवायद में पूर्वोत्तर क्षेत्र (North East Region) और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों, महिला उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्टार्टअप्स की मदद कर रहा है।

2023 इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर
कृषि मंत्री तोमर ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया था कि मिलेट्स और बाजरा की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारें राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY- RAFTAAR) के तहत योगदान दे सकती हैं। घरेलू और वैश्विक बाजार में बाजरा को और बेहतर बाजार मिले इसके लिए, भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र को 2023 में अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स (2023 International Year of Millets- IYoM) घोषित करने का प्रस्ताव दिया था। भारत के प्रस्ताव को 72 देशों से समर्थन मिलने के बाद मार्च, 2021 में UNGA ने 2023 को इंटरनेशनल मिलेट्स ईयर घोषित कर दिया।

राज्यों में मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा
बाजरा जैसे मोटे अनाज के प्रति केंद्र सरकार के रवैये का पता सरकार के जवाब से लगता है। फरवरी, 2022 में संसद में कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बताया था कि कृषि और किसान कल्याण विभाग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (National Food Security Mission-NFSM)के तहत उत्पादन बढ़ाने के लिए एक उप-मिशन सब मिशन ऑन न्यूट्री सेल (Sub-Mission on Nutri-Cereals (Millets) लागू किया जा रहा है।
राज्यों में मिलेट्स उत्पादन को बढ़ावा
उप-मिशन के तहत गुजरात के 14 जिलों सहित 9 राज्यों के 89 जिलों में बाजरा को बढ़ावा दिया जा रहा है। पूर्वोत्तर राज्यों, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों को कार्यक्रम के तहत जिलों को शामिल करने की छूट दी गई है। सरकार के प्रयासों से मिलेट्स यानी मोटे अनाज का उत्पादन (production of millets) 2020-21 में 17.96 मिलियन टन रहा। 2015-16 में मिलेट्स की पैदावार 14.52 मिलियन टन हुई थी।

इंडिया में मिलेट्स का उत्पादन
कृषि मंत्रालय से पूछे गए एक सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने संसद के बजट सत्र के दौरान बताया था कि देशभर में मिलेट्स यानी मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक 20 से अधिक राज्यों में 2018-19 में मोटे अनाज बाजरा सहित (Coarse Cereals including Millets) 43,059.45 टन पैदा हुआ। 2019-20 में इसकी मात्रा 47,748.37 टन रही जबकि 2020-21 51,323.8 टन मोटे अनाज का उत्पाद हुआ। इस आधार पर कहा जा सकता है कि भारत में मिलेट्स के मार्केट के नजरिए से शानदार अवसर हैं।
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