CBSE के 'OSM' सिस्टम पर मचा बवाल, सच में बदल गईं 12वीं के छात्रों की कॉपियां? शिक्षा मंत्री के बयान से हडकंप
CBSE Class 12 Result Controversy: NEET UG पेपर लीक विवाद के बाद अब देश में परीक्षा व्यवस्था और रिजल्ट सिस्टम को लेकर सवाल और तेज हो गए हैं। इसी बीच CBSE के 12वीं बोर्ड रिजल्ट में सामने आई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें दिखाई गई स्कैन कॉपी उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रही थी।
सोशल मीडिया पर छात्रों ने लगातार शिकायतें कीं, जिसके बाद मामला बड़ा बन गया। अब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने खुद सामने आकर माना है कि कुछ दिक्कतें हुई हैं और सरकार इसे गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की हर शिकायत सुनी जाएगी और जिम्मेदारी भी तय होगी। CBSE ने अब नई तकनीक की निगरानी के लिए IIT और सरकारी बैंकों की मदद ली है।

CBSE ने शुरू की रीवैल्यूएशन प्रक्रिया
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को जानकारी दी कि CBSE ने 12वीं बोर्ड परीक्षा की रीवैल्यूएशन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए IIT कानपुर और IIT मद्रास जैसी बड़ी संस्थाओं को तकनीकी निगरानी में शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि चार सरकारी बैंक - SBI, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक को भी पेमेंट सिस्टम से जोड़ा गया है ताकि छात्र आसानी से आवेदन कर सकें और प्रक्रिया में किसी तरह की दिक्कत न आए।
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सरकार ने मानी गड़बड़ी
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार यह मानती है कि रिजल्ट प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करती है और सुधार के कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी छात्र की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि हर शिकायत का समाधान किया जाए और जहां गलती हुई है वहां जवाबदेही तय हो।
17 लाख छात्रों की कॉपियां हुईं डिजिटल जांच में शामिल
मंत्री ने बताया कि इस साल करीब 17 लाख छात्रों ने 12वीं की परीक्षा दी थी। कुल मिलाकर लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाएं जांच के लिए आईं, जिनमें करीब 40 करोड़ स्कैन पेज शामिल थे। CBSE ने पहली बार डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम लागू किया है। इसके तहत कॉपियों को स्कैन करके ऑनलाइन जांचा गया। बोर्ड का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों को अपनी कॉपी देखने का मौका मिलेगा।
अब तक करीब 4 लाख छात्र अपनी स्कैन कॉपियां देख चुके हैं। इन छात्रों ने लगभग 11 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की मांग की है।
OSM सिस्टम पर क्यों उठा विवाद
CBSE का नया On-Screen Marking यानी OSM सिस्टम इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें जो स्कैन कॉपी दिखाई गई, उसमें उनकी लिखावट जैसी चीजें मेल नहीं खा रही थीं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कॉपी बदलने और गलत अपलोड होने जैसे आरोप लगने लगे। इसी वजह से छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई और बोर्ड को सफाई देनी पड़ी।
CBSE ने कहा- सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित
विवाद बढ़ने के बाद CBSE ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी कर कहा कि OSM सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत तकनीक पर आधारित है। बोर्ड ने कहा कि असली मूल्यांकन प्रक्रिया में किसी तरह की सुरक्षा कमजोरी या तकनीकी खतरे की जानकारी नहीं मिली है।
CBSE का कहना है कि कॉपियों की जांच के दौरान कई स्तर पर क्वालिटी चेक किए गए थे और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रखा गया।
आखिर क्या है OSM सिस्टम
CBSE ने 2026 से 12वीं बोर्ड रिजल्ट के लिए On-Screen Marking सिस्टम लागू किया है। इसमें छात्र पहले की तरह ही कागज पर परीक्षा देते हैं, लेकिन बाद में उनकी कॉपियां स्कैन करके ऑनलाइन जांची जाती हैं। बोर्ड का दावा है कि इससे मानवीय गलती कम होगी और रिजल्ट प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी।
शिक्षकों ने पहले ही जताई थी चिंता
कुछ शिक्षकों और स्कूल प्रिंसिपलों ने पहले ही इस नए सिस्टम को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि कई स्कूलों में डिजिटल व्यवस्था मजबूत नहीं है और इंटरनेट कनेक्टिविटी भी बड़ी समस्या है। कुछ शिक्षकों ने यह भी कहा कि OSM सिस्टम को जल्दबाजी में लागू कर दिया गया। कई सरकारी स्कूलों के शिक्षक तकनीक के इस्तेमाल में पूरी तरह सहज नहीं थे और उन्हें पर्याप्त ट्रेनिंग भी नहीं मिली।
स्कूल प्रिंसिपलों का कहना है कि अगर इस सिस्टम को अगले साल तक तैयारी के साथ लागू किया जाता तो बेहतर रहता।
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