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Chilli Farming : इन बातों का रखें ध्यान, मिर्च की फसल से मिलेगी शानदार उपज

मिर्च की खेती (chilli farming) खरीफ सीजन में यानी जून-जुलाई के महीने में कैसे की जाए, ये बड़ा सवाल है। ऐसा इसलिए क्योंकि मॉनसून की बारिश में मिर्च की फसल को नुकसान हो सकता है। जानिए मिर्च की खेती से जुड़े टिप्स

नई दिल्ली, 30 मई : नैचुरल स्वाद के मामले में मिर्च भले ही तीखी हो, इसकी खेती से जुड़ी कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने पर यह किसानों को मीठे परिणाम दे सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत की मिट्टी में उपजने वाली मिर्च बड़ी मात्रा में विदेश में भी एक्सपोर्ट की जाती है और इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। हम बात कर रहे हैं खरीफ सीजन में मिर्च की खेती की। दरअसल, जून और जुलाई के दौरान होने वाली खेती को 'खरीफ सीजन फार्मिंग' की कैटेगरी में गिना जाता है। ये समय मॉनसून का भी होता है।

chilli farming

मिर्च की खेती के लिए कैसा वातावरण चाहिए, खेत में कैसी तैयारी जरूरी है, मॉनसून में होने वाली बरसात से मिर्च की फसल को कैसे बचाएं, इन सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़िए वनइंडिया हिंदी का ये आलेख। खरीफ में मिर्च की खेती के बारे में इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट , पूसा (Indian Agricultural Research Institute) में वैज्ञानिक डॉ अर्पिता श्रीवास्तव बताती हैं कि मिर्च की खेती के लिए नेट हाउस या मच्छरदानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने बताया किमिर्च के बीजों की रोपाई के लिए जमीन से 15 सेंटीमीटर ऊंचाई पर बेड बनाएं। इसमें गोबर की खाद मिलाएं। बरसात में होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए गोबर की खाद में बाविस्टिन और कैप्टाफ को मिट्टी में मिलाकर बेड बनाने की तैयारी करें। बेड तैयार होने के बाद समतल और महीन मिट्टी बनना जरूरी है। बेड यानी थोड़ी खेत में लगभग बराबर दूरी पर थोड़ी ऊंची जमीन का बेस तैयार करना है। इसका कारण बरसात में होने वाले जलजमाव से बचाव है।

बकौल अर्पिता श्रीवास्तव, बीज को अधिक गहराई में नहीं बोना होता। उंगली से धारियां बनाकर उसमें मिर्च के बीज डालें। इसके बाद सूखी घास या पुआल से ढक कर पानी का छिड़काव करते हैं। जहां मिर्च की बुआई हो रही है वहां तापमान 30-32 डिग्री के आसपास होना चाहिए।

एक हफ्ते से 10 दिन में मिर्च के पौधे जम जाते हैं। पौधे निकलने के बाद पुआल-घास हटा दें। इसके बाद सुबह-शाम पानी डालना है। पौधे निकलने के लगभग हफ्ते-10 दिन के बाद खरपतवार हटाने की प्रक्रिया उंगली या हाथों से सतर्कता से करें, जिससे मिर्च के पौधों को नुकसान न पहुंचे। मिर्च के पौधों की तैयारी में एक महीने का समय लगता है। 40-45 दिन में पौधे तैयार हो जाते हैं। 40-45 दिन में पौधे तैयार होने के बाद खुले खेतों में मिर्च की रोपाई की जा सकती है।

खुले खेत में पौधों की रोपाई के दौरान दो पौधों के बीच की दूरी 45-60 सेमी के बीच रखें। एक एकड़ में 100 ग्राम बीज से बुआई की जा सकती है। इतनी जमीन पर लगभग 4500 पौधों की रोपाई होगी। पौधों की रोपाई दोपहर 2 बजे के बाद करें। तेज धूप से बचाव में मदद मिलती है।

पौधों की देखभाल के संबंध में डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि 20-25 दिन के पौधे होने के बाद नाइट्रोजन दोबारा डालने की जरूरत पड़ती है। यूरिया का इस्तेमाल अधिक होता है। उन्होंने कहा कि सुबह की तेज धूप में पौधे सूख जाते हैं। इसलिए दोपहर बाद बुआई के बाद पौधों की मृत्युदर में कमी आती है।

मिर्च की खेती में यूरिया के प्रयोग पर डॉ श्रीवास्तव ने कहा, पहले 25 दिन में यूरिया डालना होता है। फिर 15 दिन बाद डालना चाहिए। लगभग 40 दिन के बाद पौधों का पूर्ण विकास हो जाता है। 40 दिन के बाद फूल आने लगते हैं। इसके बाद यूरिया नहीं डालना है। ऐसा करने पर फल आने में कमी हो जाती है।

पत्ते मुड़ने की बीमारी से बचाव

मिर्च के पौधों में होने वाली बीमारी के बारे में डॉ श्रीवास्त्व ने कहा, कि पत्ते मुड़ने से बचाव के लिए रोगर नाम की दवा 2 मिली प्रति लीटर में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि नीमबान दवाई 5 एमएल प्रति लीटर पानी के अनुपात में मिलाकर छिड़काव करें। मिर्च के पौधों पर एप्पलॉड नाम की दवा का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। 1.5 एमएल प्रति लीटर के हिसाब से इसका घोल तैयार कर मिर्च के पौधों पर छिड़काव किया जा सकता है।

सफेद मक्खी से बचाव

बकौल डॉ श्रीवास्तव, खेत के चारों और मक्के की दो-तीन क्यारियां लगाने से मक्खी मिर्च की फसल पर नहीं आती। पत्ती मुड़ने की समस्या से मिलेगी निजात। उन्होंने कहा कि एक बार इस्तेमाल की हुई दवा दूसरे सप्ताह नहीं डालनी। दूसरे सप्ताह में दूसरी दवाई डालें। एक ही दवा करने से सफेद मक्खी के खिलाफ दवाई कारगर नहीं रह जाती। उन्होंने कहा कि किसान भाई सफेद मक्खी से बचाव के लिए नीम के तेल की नीमबान दवाई का छिड़काव करें। एक लीटर पानी में 2 मिलीलीटर का अनुपात रखें। हर हफ्ते छिड़काव करना चाहिए।

मिर्च के उत्पादन पर उन्होंने बताया कि फल आने के बाद अगर खेती हरी मिर्च की खेती कर रहे हैं तो फल तोड़ लें। इससे पौधों में और फल लगने की संभावना बढ़ती है। उन्होंने कहा कि एक पौधे से तीन-चार बार मिर्च तोड़े जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लाल मिर्च की खेती कर रहे हैं तो फल तैयार होने के बाद फलों को लाल होने का इंतजार करें। फल तोड़ने के बाद धूप में सुखाना जरूरी। नमी बने रहने पर मिर्च स्टोर करना नुकसान का कारण बनता है, क्योंकि ताजी मिर्च पैक होने पर सड़ने की आशंका होती है।

(सभी फोटो वीडियो ग्रैब; सौजन्य- यूट्यूब @DD KISAN)

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