Alberta Separation Crisis: दुनिया के नक्शे पर 2026 में आएगा ये नया देश? US की कनपटी पर हो सकते हैं टुकड़े!
Alberta Separation Crisis: ग्लोबल लीडर्स फिलीस्तीन को मान्यता देने और एक नए देश के तौर पर लगे रहे गए उधर अमेरिका के बगल में एक नय देश दुनिया के नक्शे पर खुद को दर्ज कराने में लगा है। अगर सब कुछ ठीक रहता है तो साल 2026 के अंत तक दुनिया के नक्शे पर Alberta को कनाडा से अलग होकर एक नए देश के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
कनाडा की राजनीति में उथल-पुथल
Alberta की प्रीमियर Danielle Smith ने प्रांत के संभावित अलगाव को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अक्टूबर में जनमत संग्रह यानी रेफरेंडम के लिए मतदान कराया जाएगा। इस घोषणा के बाद अल्बर्टा की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई। फैसले के कुछ ही समय बाद प्रांत के दो कैबिनेट मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया, जिससे सरकार के भीतर बढ़ते तनाव की चर्चा शुरू हो गई।

इस्तीफों के बाद कैबिनेट में बड़ा फेरबदल
दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद प्रीमियर डेनिएल स्मिथ को तुरंत अपनी कैबिनेट में फेरबदल करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अलगाव के मुद्दे ने सत्तारूढ़ सरकार के अंदर भी मतभेद पैदा कर दिए हैं। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जनता और अपनी पार्टी दोनों को एकजुट कैसे रखे।
“Forever Canada” नाम से भेजा गया प्रस्ताव
अलगाव की बहस के बीच जनमत संग्रह कराने वाली कमेटी ने “Forever Canada” नाम का एक प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा। यह प्रस्ताव अल्बर्टा के भविष्य और कनाडा के साथ उसके संबंधों को लेकर तैयार किया गया था। हालांकि, इस प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विवाद भी खड़ा हो गया। कमेटी की एक बैठक में उस समय बहस होने लगी जब सत्तारूढ़ United Conservative Party यानी UCP ने समय से पहले एक बयान जारी कर दिया, जिससे इस कमेटी में ही खींचतान दिखने लगी।
अदालत ने फेरा आंदोलन के अरमानों पर पानी
अलगाववादी अभियान को उस समय बड़ा कानूनी झटका लगा जब एक जज ने अलगाव की मांग वाली अल्बर्टा की याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को खासतौर पर फर्स्ट नेशंस समुदायों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। अदालत का मानना था कि अलगाव से जुड़े मुद्दों का असर इन समुदायों के अधिकारों और समझौतों पर भी पड़ सकता है।
अदालत पर भड़के अल्बर्टा के नेता
अदालत के फैसले के बाद प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस फैसले को अलोकतांत्रिक बताया और कहा कि उनकी सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी। स्मिथ का कहना है कि जनता को अपने भविष्य पर फैसला लेने का पूरा अधिकार मिलना चाहिए और अदालत का यह फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है।
अलगाववादियों में भी बढ़ा मतभेद
दिलचस्प बात यह रही कि अदालत के फैसले के बाद अलगाववादी आंदोलन के अंदर भी मतभेद सामने आने लगे। कुछ अलगाववादी नेताओं और समर्थकों ने जनमत संग्रह के सवाल को लेकर खुद प्रीमियर स्मिथ को हटाने तक की धमकी दे दी। इससे साफ हो गया कि आंदोलन के भीतर रणनीति और नेतृत्व को लेकर एकमत नहीं है।
कनाडा की राजनीति में बढ़ सकती है और उथल-पुथल
अल्बर्टा में अलगाव की मांग, अदालत का फैसला, मंत्रियों के इस्तीफे, पाइपलाइन समझौते और फर्स्ट नेशन समुदायों के विरोध के बाद अब कनाडा की राजनीति में और ज्यादा उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। अक्टूबर में होने वाला संभावित जनमत संग्रह आने वाले समय में कनाडा की राजनीति और राष्ट्रीय एकता दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकता है। देखना होगा कि अल्बर्टा खुद को कनाडा से अलग कर पाता है या नहीं।
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