Afghanistan Crisis: बेटियां बेचने पर मजबूर क्यों अफगानिस्तानी पिता? रोजाना हो रहा नाबालिगों के जिस्म का सौदा!
Afghanistan Crisis: आर्थिक संकट से टूट चुके अफगानिस्तान में कई परिवार अब ऐसे फैसले लेने को मजबूर हो गए हैं, जिनकी कल्पना भी करना मुश्किल है। हाल के महीनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं, जहां परिवार दो वक्त की रोटी, इलाज या कर्ज चुकाने के लिए अपनी बेटियों को बेच रहे हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि ये कहानी सिर्फ गरीबी कि तो आप गलत हैं। ये अब एक इतना बड़ा इंसानी संकट बन चुका है जिसमें देह व्यापार, नाबालिगों का सौदा और महिलाओं के अधिकार जैसे गंभीर मुद्दे हैं। जानेंगे कि आखिर माता-पिता ऐसा करने को क्यों मजबूर हैं।
घोर प्रांत में गरीबी ने तोड़ दिए परिवार
बीबीसी में पत्रकार योगिता लिमये के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान के घोर प्रांत की बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। यहां कई परिवार बढ़ती गरीबी और बेरोजगारी के कारण मुश्किल और दर्द भरे फैसले लेने को मजबूर हैं। खाने के लिए पैसे नहीं हैं, रोजगार नहीं है और बच्चों का पेट भरना भी मुश्किल हो चुका है। हालात ये हैं कि मजदूरी की तलाश में निकले 50 लोगों में से सिर्फ एक को काम मिल पा रहा है।

सात साल की बेटियों को बेचने को मजबूर पिता
घोर प्रांत के रहने वाले अब्दुल राशिद अजीमी अपनी सात साल की जुड़वां बेटियों रुकिया और रोहिला में से एक को बेचने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे कर्ज में डूब चुके हैं और परिवार के लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाना भी मुश्किल हो गया है। बीबीसी के इंटरव्यू में अजीमी रो पड़े। उन्होंने कहा, “मैं अपनी बेटियों को बेचने को तैयार हूं। मैं गरीब हूं, कर्ज में डूबा हूं और पूरी तरह बेबस हूं।”
“मेरे बच्चे रोटी मांगते हैं, लेकिन मेरे पास कुछ नहीं”
अब्दुल राशिद अजीमी ने अपनी हालत बताते हुए कहा कि वे रोज काम की तलाश में निकलते हैं, लेकिन खाली हाथ लौटते हैं। उन्होंने कहा, “मैं सूखे होंठों के साथ, भूखा-प्यासा और परेशान होकर घर लौटता हूं। मेरे बच्चे मुझसे कहते हैं 'बाबा, हमें रोटी दो।’ लेकिन मैं उन्हें क्या दूं? काम ही नहीं है।” उन्होंने अपनी बेटी रोहिला को गले लगाते हुए कहा कि यह फैसला उनका दिल तोड़ देता है, लेकिन परिवार को बचाने के लिए उनके पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा।
इलाज के लिए पांच साल की बेटी को बेचना पड़ा
ऐसी ही एक और घटना में सईद अहमद नाम के व्यक्ति को अपनी पांच साल की बेटी शैका को एक रिश्तेदार को बेचना पड़ा। शैका अपेंडिसाइटिस और लीवर में सिस्ट जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थी, लेकिन परिवार के पास इलाज के पैसे नहीं थे। सईद अहमद ने बताया, “मेरे पास इलाज का खर्च उठाने के लिए पैसे नहीं थे। इसलिए मुझे अपनी बेटी को रिश्तेदार को बेचना पड़ा।”
इलाज के बदले तय हुई शादी
रिपोर्ट के मुताबिक, शैका की सर्जरी के लिए 2 लाख अफगानी का समझौता किया गया। इस समझौते के तहत भविष्य में शैका को उसी रिश्तेदार के परिवार में शादी करनी होगी। सईद ने शुरुआत में सिर्फ ऑपरेशन के लिए जरूरी रकम ली ताकि उनकी बेटी कुछ साल और उनके साथ रह सके। उन्होंने कहा, “अगर मैंने पूरी रकम उसी समय ले ली होती, तो वह उसे तुरंत अपने साथ ले जाता। इसलिए मैंने उससे कहा कि अभी इलाज के लिए पैसे दे दो और बाकी रकम अगले पांच सालों में दे देना। उसके बाद वह उसे ले जा सकता है। वह उसकी बहू बन जाएगी।”
यूनाइटेड नेशंस ने दी गंभीर चेतावनी
यूनाइटेड नेशंस के मुताबिक, अफगानिस्तान की लगभग तीन-चौथाई (लगभग 75 फीसदी) आबादी अपनी बुनियादी जरूरतें तक पूरी नहीं कर पा रही है। देश में बेरोजगारी तेजी से बढ़ी है और स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद कमजोर हो चुकी है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सहायता भी लगातार कम होती जा रही है। हालात इतने खराब हैं कि एक अनुमान के अनुसार करीब 47 लाख लोग जो देश की कुल आबादी के 10 प्रतिशत से ज्यादा हैं, भुखमरी के बिल्कुल करीब पहुंच चुके हैं।
बेटियों को ही क्यों बेचा जा रहा है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवार बेटों की बजाय बेटियों को ही क्यों बेच रहे हैं? इसका मुख्य कारण अफगानिस्तान की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था है। वहां बेटों को भविष्य का कमाने वाला माना जाता है, जबकि बेटियों को आर्थिक जिम्मेदारी नहीं समझा जाता। तालिबान शासन के दौरान महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा और रोजगार पर कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। इससे लड़कियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर लगभग खत्म हो गए हैं और परिवार उन्हें आर्थिक बोझ की तरह देखने लगे हैं।
शादी की पुरानी परंपरा भी बनी वजह
अफगानिस्तान में एक पुरानी परंपरा है, जिसमें शादी के समय दूल्हे का परिवार दुल्हन के परिवार को पैसे या उपहार देता है। गरीबी और भूख से जूझ रहे परिवारों के लिए यही रकम तत्काल आर्थिक सहारा बन जाती है। इसी कारण कई परिवार छोटी उम्र में ही अपनी बेटियों की शादी तय कर देते हैं। अफगानिस्तान में बाल विवाह पहले से ही बड़ी समस्या रही है, लेकिन तालिबान द्वारा लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगाने के बाद इसमें और तेजी आई है।
तालिबान की नीतियों ने लड़कियों का जीवन किया खराब
तालिबान ने सत्ता में आते ही महिलाओं के प्रति कड़े कानून कर दिए। जिसमें वे शिक्षा से वंचित हो गईं, उनके साथ अपराध सामान्य हो गया और हाल ही में नाबालिग लड़की की चुप्पी को शादी सहमति वाले कानून ने उनके उत्पीड़ना का रास्ता और खोल दिया। इसी लिए जब बेचने की बारी है आती है तो लोग लड़कों को न बेचकर बेटियों को बेच रहे हैं।
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