मनोहर लाल सरकार का नया कदम, सरकारी विभागों की अनुपयोगी जमीन लैंड बैंक में होगी शामिल

चंडीगढ़, 6 जुलाई। हरियाणा सरकार ने नया कदम उठाया है। राज्‍य में अब सरकारी विभागों की अनुपयोगी जमीन सरकार के 'लैंड बैंक' में शामिल की जाएगी। राज्‍य सरकार ने विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्‍धता के वास्‍ते 'लैंड बैंक' बनाया था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य सरकार की लैंड बैंक नीति के तहत सभी जिला उपायुक्तों को जल्दी से जल्दी अपने-अपने जिलों की संपूर्ण भूमि का डाटा तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, चिन्हित भूमि की जीआइएस मैपिंग करवाने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि सभी डाटा डिजिटल रूप में उपलब्ध हो सके। विभिन्न विभागों के पास पड़ी अनुपयोगी भूमि अब सरकार के नाम होंगी और उन्हें भूमि बैंक में जमा किया जाएगा। जमीन की मलकीयत हरियाणा सरकार की होगी। लैंड बैंक में एकत्रित भूमि का उपयोग विकास परियोजनाओं के लिए आसानी से किया जा सकेगा।

Unused land of Haryana govt will be included in land bank

मुख्यमंत्री वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये जिला उपायुक्तों के साथ लैंड बैंक की समीक्षा की। मनोहर लाल ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जिले की संपूर्ण भूमि, चाहे वह हरियाणा सरकार की मलकीयत वाली भूमि हो, ग्राम पंचायत, बोर्ड या निगम तथा निजी भूमि हो, उस सभी का विस्तृत आकलन किया जाए। उन्होंने कहा कि स्वामित्व योजना, लार्ज स्केल मैपिंग योजना के तहत की जा रही भूमि की मैपिंग तथा शहरी क्षेत्रों में की जा रही ड्रोन मैपिंग का कार्य भी जल्दी पूरा किया जाए, तभी जिले की वास्तविक भूमि का आकलन किया जा सकेगा।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों से कहा कि बरसात का मौसम अभी शुरू हुआ है और अगले दो माह तक बरसात का मौसम रहने वाला है। इसलिए शहरी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए सीवरेज व नालियों की सफाई साथ-साथ करवाना सुनिश्चित करें। इसके अलावा, जहां कहीं बरसात के कारण सड़कों की हालत खराब हो रही है, वहां भी मरम्मत या पैचिंग का कार्य करवाया जाए। बैठक में मुख्य सचिव संजीव कौशल, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और वित्त आयुक्त पीके दास तथा चकबंदी एवं भू-रिकार्ड विभाग की निदेशक आमना तसनीम ने भागीदारी करते हुए मुख्यमंत्री को पूरी डिटेल की।

मेरा पानी मेरी विरासत योजना के तहत अभी तक सिर्फ गैर बासमती धान की जगह ही वैकल्पिक फसलें लगाने पर किसान इस योजना का लाभ उठा सकते थे, लेकिन अब बासमती धान की जगह भी वैकल्पिक फसलें लगाने पर किसान योजना का लाभ उठा सकेंगे। हरियाणा के कृषि तथा किसान कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डा. सुमिता मिश्रा ने बताया कि किसानों के हित को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इस योजना का विस्तार करते हुए पापुलर और सफेदा को वैकल्पिक फसलों की सूची में शामिल किया है ताकि धान के क्षेत्र को कम किया जा सके।

उन्‍होंने बताया कि इस सूची में पहले मक्का, कपास, खरीफ दलहन (अरहर, मूंग, मोठ, उड़द, सोयाबीन व गवार), खरीफ तिलहन (मूंगफली, अरंड व तिल), चारा फसलें, बागवानी/सब्जी (खरीफ प्याज सहित), खाली खेत शामिल थे। बासमती व गैर बासमती दोनों प्रकार के धान की जगह उसी किला नंबर में इन वैकल्पिक फसलों को उगाने पर सात हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान राशि सीधे पात्र किसानों के बैंक खातों में भौतिक सत्यापन उपरांत दी जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसान मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर 31 जुलाई तक अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।

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