Iran Vs America: एक तरफ अमेरिका-ईरान का समझौता, दूसरी तरफ लेबनान में तबाही, हर 24 घंटे में 11 बच्चों की मौत
Iran Vs America War: एक तरफ अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव कम करने और संभावित सीजफायर को लेकर बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ लेबनान में इजराइली हमले लगातार जारी हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट ने हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में लेबनान में औसतन हर 24 घंटे में 11 बच्चे हमलों का शिकार हुए हैं। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शांति और समझौते की बात हो रही है, तो जमीनी स्तर पर हिंसा क्यों बढ़ रही है।

Israel Lebanon Attacks: हर दिन बच्चों पर पड़ रही युद्ध की मार
यूनिसेफ के अनुसार पिछले सात दिनों में लेबनान में 77 बच्चे या तो मारे गए हैं या घायल हुए हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर 24 घंटे में 11 बच्चे हमलों का शिकार बन रहे हैं। बच्चों पर बढ़ते खतरे ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। यूनिसेफ का कहना है कि किसी भी संघर्ष में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में सबसे ज्यादा नुकसान मासूमों को उठाना पड़ रहा है।
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सीजफायर के बाद भी नहीं रुके हमले
रिपोर्टों के मुताबिक युद्धविराम लागू होने के बाद भी लेबनान में सैन्य कार्रवाई पूरी तरह नहीं रुकी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार सीजफायर लागू होने के बाद से अब तक 55 बच्चों की मौत और 212 बच्चों के घायल होने की पुष्टि हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि अगर युद्धविराम लागू है तो जमीनी स्तर पर हालात सामान्य क्यों नहीं हो रहे। लगातार हमलों से आम लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।
WHO ने स्वास्थ्य संकट की चेतावनी दी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि बढ़ती सैन्य कार्रवाई लेबनान के स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर असर डाल रही है। युद्धविराम के बाद से स्वास्थ्य केंद्रों पर 27 हमलों की रिपोर्ट सामने आई है। इन घटनाओं में 25 लोगों की मौत और 42 लोग घायल हुए हैं। WHO का कहना है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो इलाज और आपातकालीन सेवाओं पर भारी दबाव पड़ेगा, जिससे आम नागरिकों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
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अस्पताल और मेडिकल सुविधाएं भी निशाने पर
WHO के आंकड़ों के अनुसार अब तक 16 अस्पताल और 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। स्वास्थ्य ढांचे को हुए नुकसान का सीधा असर मरीजों और घायल लोगों के इलाज पर पड़ रहा है। कई इलाकों में लोगों को जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। राहत एजेंसियों का कहना है कि अस्पतालों और मेडिकल सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, क्योंकि संघर्ष के दौरान इन्हीं संस्थानों पर लोगों की सबसे ज्यादा निर्भरता होती है।
शांति की बातचीत और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर
अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच समझौते और तनाव कम करने को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन लेबनान की स्थिति अलग तस्वीर दिखा रही है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों का कहना है कि सिर्फ राजनीतिक बयान या कूटनीतिक बातचीत काफी नहीं है। अगर वास्तव में शांति स्थापित करनी है तो जमीन पर हिंसा रोकना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी होगा। फिलहाल लेबनान में बढ़ते हमले इस बात की याद दिला रहे हैं कि शांति की राह अभी भी आसान नहीं है।












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