Karnataka New CM Cabinet: DKS सरकार में किसे मिलेगा कितना पावर? सतीश जारकीहोली से यतिंद्र तक टिकी सबकी नजर
Karnataka New CM Cabinet: कर्नाटक की राजनीति में लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब लगभग विराम लग गया है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ माना जा रहा है।
हालांकि कांग्रेस हाईकमान के सामने केवल मुख्यमंत्री बदलने की चुनौती नहीं है, बल्कि उससे कहीं बड़ी चुनौती नई सरकार और संगठन के बीच ऐसा संतुलन बनाने की है जिससे पार्टी के भीतर किसी तरह का शक्ति संघर्ष न उभरे।

दिल्ली में पिछले कई दिनों से कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं की बैठकों का केंद्र बिंदु यही रहा है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के बाद पार्टी के विभिन्न गुटों, जातीय समूहों और क्षेत्रीय हितों को कैसे साधा जाए। कांग्रेस नहीं चाहती कि सत्ता हस्तांतरण के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार समर्थकों के बीच कोई टकराव पैदा हो, क्योंकि इससे 2028 विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों की तैयारियों पर असर पड़ सकता है।
कैबिनेट में बदलाव को लेकर सिद्धारमैया को पहले ही मिल गया था संकेत
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस हाईकमान ने पहले ही सिद्धारमैया को यह संकेत दे दिया था कि अब नेतृत्व परिवर्तन का समय आ गया है। हालांकि उसी समय डीके शिवकुमार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई। पार्टी नेतृत्व पहले नई कैबिनेट की संरचना और सत्ता संतुलन का पूरा खाका तैयार करना चाहता था। कांग्रेस की रणनीति यह रही कि मुख्यमंत्री बदलने से पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि नई सरकार में सिद्धारमैया खेमे को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले और किसी भी तरह की असंतुष्टि को शुरुआती दौर में ही नियंत्रित किया जा सके।
3 जून को हो सकता है शपथ ग्रहण
जानकारी के अनुसार शनिवार, 30 मई की शाम बेंगलुरु के विधान सौधा में कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक आयोजित की जा रही है, जहां डीके शिवकुमार को औपचारिक रूप से विधायक दल का नेता चुना जा सकता है। इसके बाद राज्यपाल से मुलाकात और सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू होगी।
सूत्रों का दावा है कि डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण समारोह 3 जून को आयोजित किया जा सकता है। यह कर्नाटक की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से ही सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने के फार्मूले की चर्चा लगातार होती रही है।
दो या तीन डिप्टी CM बनाने का फॉर्मूला
कांग्रेस नेतृत्व अब नई सरकार में सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने के लिए दो या तीन उपमुख्यमंत्री बनाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है। पार्टी का मानना है कि केवल मुख्यमंत्री पद बदलने से संतुलन नहीं बनेगा। इसलिए विभिन्न समुदायों को सत्ता में उचित हिस्सेदारी देना आवश्यक होगा।
सूत्रों के मुताबिक एक डिप्टी सीएम लिंगायत समुदाय से हो सकता है। एक डिप्टी सीएम दलित समुदाय से बनाया जा सकता है। तीसरा डिप्टी सीएम सिद्धारमैया खेमे को संतुष्ट करने के लिए दिया जा सकता है। क्योंकि डीके शिवकुमार स्वयं वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, इसलिए कांग्रेस अन्य प्रभावशाली सामाजिक समूहों को भी मजबूत प्रतिनिधित्व देना चाहती है।
सतीश जारकीहोली का नाम सबसे आगे
डिप्टी सीएम पद के लिए सबसे चर्चित नामों में से एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री सतीश जारकीहोली हैं। हालांकि कुछ सूत्रों का दावा है कि उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की पेशकश की गई है, लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जारकीहोली उत्तर कर्नाटक क्षेत्र के प्रभावशाली एसटी नेता माने जाते हैं और उनकी नियुक्ति से कांग्रेस को अनुसूचित जनजाति वर्ग में राजनीतिक संदेश देने का मौका मिलेगा।
एमबी पाटिल भी मजबूत दावेदार
लिंगायत समुदाय से आने वाले वरिष्ठ मंत्री एमबी पाटिल को भी महत्वपूर्ण भूमिका मिलने की संभावना जताई जा रही है।सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले पाटिल को लेकर चर्चा है कि यदि उन्हें सरकार में शीर्ष पद नहीं मिलता है तो उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जा सकता है। लिंगायत समुदाय कर्नाटक की राजनीति में बेहद प्रभावशाली माना जाता है और भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक भी रहा है। ऐसे में कांग्रेस इस वर्ग को साधने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकती है।
जी परमेश्वर भी दौड़ में
दलित समुदाय के प्रमुख चेहरे और वर्तमान गृह मंत्री जी परमेश्वर का नाम भी डिप्टी सीएम पद की दौड़ में शामिल बताया जा रहा है। परमेश्वर लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठन के साथ-साथ सरकार में भी उनका व्यापक अनुभव है। उनकी नियुक्ति दलित समुदाय को मजबूत राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के तौर पर देखी जा सकती है।
यतिंद्र सिद्धारमैया की एंट्री लगभग तय?
नई सरकार को लेकर सबसे अधिक चर्चा सिद्धारमैया के बेटे यतिंद्र सिद्धारमैया को लेकर हो रही है। दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान जारी तस्वीरों में यतिंद्र कई वरिष्ठ नेताओं के साथ नजर आए, जिसके बाद उनकी संभावित भूमिका को लेकर अटकलें और तेज हो गईं। सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया चाहते हैं कि उनके बेटे को सरकार में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले। हालांकि डिप्टी सीएम बनाए जाने की अटकलें भी चल रही हैं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि यतिंद्र को कैबिनेट मंत्री बनाया जाना अधिक संभावित है।
कौन सा मंत्रालय मिल सकता है?
सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया चाहते हैं कि यतिंद्र को ऐसा मंत्रालय मिले जिसका राजनीतिक महत्व ज्यादा हो। इनमें सबसे प्रमुख नाम सामाजिक कल्याण विभाग (Social Welfare Department) का बताया जा रहा है। यह विभाग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़ी योजनाओं का संचालन करता है और राज्य की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है।
सिद्धारमैया चाहते हैं नई समन्वय समिति
सत्ता हस्तांतरण के बाद भी सिद्धारमैया पार्टी और सरकार के बीच प्रभाव बनाए रखना चाहते हैं। सूत्रों के अनुसार उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व के सामने एक ऐसी समन्वय समिति बनाने का सुझाव रखा है जो सरकार और संगठन के बीच सेतु का काम करे। इसका उदाहरण भाजपा में बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई वाली समन्वय व्यवस्था को बताया जा रहा है। हालांकि डीके शिवकुमार समर्थक इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि इससे बेंगलुरु में दो समानांतर शक्ति केंद्र बन सकते हैं। फिलहाल कांग्रेस हाईकमान ने इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी
मुख्यमंत्री बदलने के साथ-साथ संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। डीके शिवकुमार 2020 से कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके लिए दोनों पदों पर बने रहना मुश्किल माना जा रहा है। ऐसे में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सतीश जारकीहोली का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो कांग्रेस उत्तर कर्नाटक और अनुसूचित जनजाति समुदाय को बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकेगी।
राहुल गांधी का फोकस 'अहिंदा' पर
सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी नई सरकार में AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) सामाजिक गठबंधन को मजबूत बनाए रखना चाहते हैं। अहिंदा मॉडल सिद्धारमैया की राजनीति की पहचान रहा है और कांग्रेस नहीं चाहती कि नेतृत्व परिवर्तन के कारण यह सामाजिक समीकरण कमजोर पड़े। इसी वजह से नई कैबिनेट में पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कांग्रेस की सबसे बड़ी परीक्षा
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कर्नाटक कांग्रेस एक नए दौर में प्रवेश करेगी। लेकिन असली चुनौती सरकार गठन से आगे जाकर पार्टी के विभिन्न गुटों को साथ रखने की होगी। अगर कांग्रेस जातीय, क्षेत्रीय और संगठनात्मक संतुलन बनाने में सफल रहती है, तो यह सत्ता परिवर्तन पार्टी के लिए मजबूती का कारण बन सकता है।
लेकिन यदि किसी गुट में असंतोष बढ़ा, तो नई सरकार की शुरुआत से ही राजनीतिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। फिलहाल सभी निगाहें कांग्रेस विधायक दल की बैठक और नई कैबिनेट की घोषणा पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि कर्नाटक में डीके शिवकुमार का नेतृत्व कितना मजबूत और स्थिर साबित होता है।













Click it and Unblock the Notifications