Ban On Kripan: UK में कृपाण पर लगेगा बैन? सिखों के खिलाफ माहौल बना रहा मुस्लिम नेता! क्या है पूरा विवाद?

Ban On Kripan: ब्रिटेन में सिख समुदाय की धार्मिक पहचान मानी जाने वाली कृपाण (Kirpan) को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। देश की दक्षिणपंथी राजनीतिक पार्टी Reform UK ने ऐलान किया है कि अगर वह सत्ता में आती है, तो सिखों को सार्वजनिक स्थानों पर कृपाण रखने की कानूनी छूट खत्म कर देगी। इस बयान के बाद धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर बड़ी बहस शुरू हो गई है।

एक हत्या के मामले से शुरू हुआ पूरा विवाद

यह विवाद 23 साल के विक्रम डिगवा (Vikram Digwa) के मामले के बाद सामने आया है। विक्रम को साउथम्पटन (Southampton) में 18 साल की यूनिवर्सिटी छात्र हेनरी नोवाक (Henry Novak) की हत्या का दोषी ठहराया गया है। अदालत में सामने आई जानकारी के मुताबिक, विक्रम ने इस हमले के दौरान 21 सेंटीमीटर लंबी कृपाण का इस्तेमाल किया था। कृपाण सिख धर्म के पांच ककारों (Five Ks) में से एक मानी जाती है और इसे सिख आस्था का महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक माना जाता है।

आरोपी की मां ने भी दिया वारदात में साथ

इस मामले में केवल विक्रम डिगवा ही नहीं, बल्कि उसकी मां को भी दोषी ठहराया गया है। जांच में सामने आया कि हमले के बाद उन्होंने हथियार को हटाने और छिपाने में मदद की थी। इसी वजह से अदालत ने उन्हें अपराधी की सहायता करने का दोषी माना। इस फैसले के बाद पूरे मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले लिया।

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Reform UK ने क्या मांग की?

Reform UK पार्टी के अध्यक्ष Zia Yusuf ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी सरकार बनाती है तो वह कृपाण रखने की कानूनी छूट खत्म कर देगी। उन्होंने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement) को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक जगहों पर धारदार हथियार रखने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा-

"मुझे फर्क नहीं पड़ता कि किसी का धर्म क्या है। Reform सरकार में कानून प्रवर्तन अधिकारियों के अलावा किसी को भी जानलेवा हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी।"

चाकू अपराध रोकने की भी बात

जिया यूसुफ ने केवल कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं की, बल्कि उन्होंने ब्रिटेन में बढ़ते चाकू अपराध (Knife Crime) से निपटने के लिए Stop-and-Search शक्तियों को और मजबूत करने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून में धार्मिक आधार पर जो छूट दी गई है, उसे खत्म किया जाना चाहिए ताकि सभी लोगों पर एक समान नियम लागू हो सकें। Reform UK के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि कानून के सामने सभी हथियारों को समान रूप से देखा जाना चाहिए, चाहे वे किसी धार्मिक परंपरा से जुड़े हों या नहीं।

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लेबर पार्टी ने किया कड़ा विरोध

दूसरी तरफ लेबर पार्टी की सांसद Sarah Coombes ने Reform UK की इस मांग का खुलकर विरोध किया है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध की वजह से पूरे धार्मिक समुदाय को निशाना बनाना बिल्कुल गलत है। सारा कूम्ब्स ने कहा-

"टोरी और Reform दोनों अब कृपाण पर प्रतिबंध लगाने की बात कर रहे हैं। यह पूरी तरह गलत है।"

सिख समुदाय को निशाना बनाना सही नहीं

सारा कूम्ब्स ने आगे कहा कि कृपाण सिख धर्म का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी धार्मिक पहचान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा-

"किसी एक व्यक्ति के भयानक अपराध के आधार पर पूरे समुदाय को कलंकित नहीं किया जा सकता।"

उनका मानना है कि इस तरह के फैसले धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डाल सकते हैं और लाखों कानून का पालन करने वाले सिखों को गलत तरीके से निशाना बना सकते हैं।

आखिर कृपाण को क्यों मिलता है कानूनी संरक्षण?

ब्रिटेन के मौजूदा कानून के तहत सिख समुदाय को कृपाण रखने और साथ लेकर चलने की विशेष कानूनी छूट दी गई है। इसका कारण यह है कि कृपाण को केवल हथियार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, समाज के लिए सुरक्षा और पहचान का प्रतीक माना जाता है। सिख धर्म में इसे न्याय, साहस और कमजोरों की रक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसी वजह से ब्रिटेन समेत कई देशों में सिखों को विशेष परिस्थितियों में कृपाण रखने की परमीशन दी गई है।

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धार्मिक स्वतंत्रता या सार्वजनिक सुरक्षा

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर पुराने सवाल को सामने ला दिया है कि धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। एक पक्ष का मानना है कि सुरक्षा के लिए सभी धारदार हथियारों पर समान नियम लागू होने चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष कहता है कि धार्मिक प्रतीकों को अपराध से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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