तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव की तैयारी शुरू, सीएम बघेल करेंगे शुभारंभ
तीन दिवसीय राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव की तैयारी शुरू, सीएम बघेल करेंगे शुभारंभ
रायपुर, 14 अप्रैल: राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव का आयोजन राजधानी के पं. दीनदयाल उपाध्याय आडिटोरियम में 19 से 21 अप्रैल तक होगा। इसमें राज्य के विभिन्ना अंचलों के जनजातीय समुदाय के प्रबुद्ध व्यक्तियों, समाज प्रमुखों, साहित्यकारों एवं कला मर्मज्ञों को भी आमंत्रित किया जाएगा। महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम में बस्तर बैंड का प्रदर्शन, बाल कलाकार सहदेव नेताम और जनजातीय नृत्य मुख्य आकर्षक होंगे। साहित्य सम्मेलन को पद्मश्री साहित्यकार हलधर नाग भी संबोधित करेंगे।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास मंत्री डा. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बुधवार को अपने निवास कार्यालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर आयोजन की तैयारियों की समीक्षा की। राष्ट्रीय महोत्सव का उद्घाटन 19 अप्रैल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल करेंगे और समापन 21 अप्रैल को राज्यपाल अनुसुईया उइके के मुख्य आतिथ्य में होगा।
राष्ट्रीय स्तर के तीन दिवसीय आयोजन में राष्ट्रीय जनजातीय साहित्य महोत्सव, राज्य स्तरीय जनजातीय नृत्य प्रदर्शन और राज्य स्तरीय कला एवं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन होगा। यह आयोजन आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा होगा। बैठक में सचिव आदिमजाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास डीडी सिंह, आयुक्त शम्मी आबिदी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
महोत्सव में देशभर के पारंपरिक एवं समकालीन साहित्य पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा देश के विभिन्ना राज्यों से जनजातीय विषयों पर लेखन कार्य करने वाले जनजातीय एवं गैरजनजातीय स्थापित एवं विख्यात साहित्यकारों, रचनाकारों, विश्वविद्यालयों के अध्येताओं, शोधार्थियों, विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है। कला और चित्रकला प्रतियोगिता तीन आयु वर्ग में होगी। चित्रकला प्रतियोगिता के लिए राज्यभर के आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। अब तक तीनों आयु वर्गों में 100 प्रविष्टियां प्राप्त हो गई हैं।
महोत्सव में छत्तीसगढ़ की विभिन्ना नृत्य विधाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें जनजातीय क्षेत्रों में किए जाने वाले जनजातीय नृत्य शैला, सरहुल, करमा, सोन्दो, कुडुक, डुंडा, दशहरा करमा, विवाह नृत्य (हुल्की), मड़ई नृत्य, गवरसिंह, गेड़ी, करसाड़, मांदरी, डंडार आदि नृत्यों का प्रदर्शन तीनों दिन शाम को किया जाएगा। महोत्सव में पुस्तक मेले का आयोजन भी किया जा रहा है। इसमें देश के प्रतिष्ठित प्रकाशकों, जिन्होंने जनजातीय विषयों पर विशेष रूप से प्रकाशन किया है, ऐसे 10 प्रकाशकों को आमंत्रित किया गया है।












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