'2 दिन में सब बता दूंगा', नई पार्टी बनाने पर बोले अन्नामलाई, मोदी के फायरब्रांड नेता क्या सच में छोड़ेंगे BJP?
K Annamalai: तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर के. अन्नामलाई चर्चा के केंद्र में हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अन्नामलाई ने नई पार्टी बनाने की अटकलों पर ऐसा बयान दिया है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल और बढ़ा दी है। चेन्नई से दिल्ली रवाना होते समय जब उनसे पूछा गया कि क्या वह नई राजनीतिक पार्टी शुरू करने वाले हैं, तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय कहा, "दो दिन इंतजार कीजिए, फिर बैठकर बात करेंगे।"
बस इसी एक लाइन ने तमिलनाडु की राजनीति में कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अन्नामलाई बीजेपी में ही रहेंगे? क्या वह अलग राजनीतिक रास्ता चुनने वाले हैं? या फिर यह केवल उनके समर्थकों का उत्साह है? फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन चर्चाएं तेज हैं।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद से ही अन्नामलाई के अगले सियासी कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन्हें अब खुद अन्नामलाई के रुख ने और हवा दे दी है। उनका एक पोस्टर भी वायरल हो रहा, जिसमें लिखा है- निडर सोच की सीमा नहीं।
अन्नामलाई के एक बयान से क्यों बढ़ गई हलचल?
राजनीति में कई बार चुप्पी भी बहुत कुछ कह जाती है। पिछले कुछ महीनों से अन्नामलाई अपने भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों पर खुलकर कुछ नहीं बोल रहे थे। लेकिन इस बार उन्होंने अटकलों को खारिज भी नहीं किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कोई नेता नई पार्टी बनाने की संभावना को पूरी तरह नकारना चाहता है, तो वह साफ शब्दों में ऐसा कह सकता है। अन्नामलाई ने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने दो दिन बाद बात करने की बात कही, जिससे चर्चाओं को और बल मिला है।
कोयंबटूर में लगे पोस्टरों ने बढ़ाया सस्पेंस
अन्नामलाई के जन्मदिन से पहले कोयंबटूर में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए बड़े-बड़े पोस्टर चर्चा का बड़ा कारण बने हैं। इन पोस्टरों पर ऐसे संदेश लिखे गए हैं जिन्हें कई लोग राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देख रहे हैं।
कुछ पोस्टरों में लिखा गया, "हमारे नेता, आइए और हमारा नेतृत्व कीजिए।" इन पोस्टर्स में अन्नामलाई की तस्वीर है और नीचे लिखा है- Fearless minds gave no limits. यानी कि निडर सोच की कोई सीमा नहीं होती।
वहीं कुछ जगहों पर अन्नामलाई की तस्वीर के साथ प्रेरणादायक संदेश लगाए गए। इन पोस्टरों को केवल जन्मदिन की शुभकामना नहीं, बल्कि समर्थकों की राजनीतिक अपेक्षाओं के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि ये पोस्टर ऐसे समय में सामने आए हैं जब बीजेपी कोयंबटूर में ही अपनी राज्य केंद्रीय समिति की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर रही है। इस बैठक से अन्नामलाई पूरी तरह नदारद हैं।
इतना ही नहीं उनके समर्थकों द्वारा चलाए जा रहे कल्याणकारी संगठन 'अन्नामलाई अन्बू कूट्टम' (Annamalai Anbu Koottam) ने बड़े पैमाने पर नए सदस्यों और पदाधिकारियों की भर्ती भी शुरू कर दी है। राजनीति के जानकार इसे अन्नामलाई के समर्थकों द्वारा किया जा रहा एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन मान रहे हैं।
केंद्रीय नेतृत्व के साथ 'तीन भाषा नीति' पर टकराव
अन्नामलाई और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच वैचारिक मतभेद पिछले कुछ समय से खुलकर सामने आने लगे थे। इसका सबसे बड़ा कारण केंद्र सरकार की 'तीन भाषा नीति' (Three-Language Policy) को समय से पहले लागू करने का फैसला है।
दरअसल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 15 मई 2026 को एक नया नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तहत कक्षा 9वीं के छात्रों के लिए इसी शैक्षणिक सत्र यानी 1 जुलाई 2026 से तीन भाषाएं सीखना अनिवार्य कर दिया गया, जिसमें से दो भारतीय भाषाएं होनी जरूरी हैं। इससे पहले अप्रैल 2026 में जब सीबीएसई ने कक्षा 6वीं के लिए यह नियम बनाया था, तब अन्नामलाई ने खुद इसका स्वागत किया था।
विवाद तब बढ़ा जब केंद्र ने कक्षा 9वीं के लिए पहले से तय समयसीमा (साल 2029-30) को घटाकर इसी साल से लागू करने का फरमान सुना दिया।
अन्नामलाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस फैसले का खुलकर विरोध किया। उन्होंने कहा कि अचानक लिया गया यह फैसला तमिलनाडु के बच्चों और अभिभावकों के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि छात्र पहले ही कक्षा 6वीं में अपनी पसंद की भाषा चुन चुके हैं। इतनी कम मोहलत में नई भाषा का दबाव बच्चों के सीखने की क्षमता को प्रभावित करेगा। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की थी, जिसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ देखा गया।

AIADMK से रार और पद से हटाए जाने की इनसाइड स्टोरी
अन्नामलाई के राजनीतिक ग्राफ में बड़ा बदलाव 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान ही दिखने लगा था। तमिलनाडु में बीजेपी की पारंपरिक सहयोगी रही एआईएडीएमके (AIADMK) के साथ अन्नामलाई के रिश्ते बेहद तल्ख हो चुके थे। उन्होंने द्रविड़ राजनीति के दिग्गज नेताओं- सीएन अन्नादुरई और जे जयललिता को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिससे गठबंधन में दरार आ गई।
सूत्रों की मानें तो AIADMK के दबाव और अड़ियल रुख के कारण ही चुनाव से ठीक पहले बीजेपी नेतृत्व ने अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया था। इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में अन्नामलाई कोयंबटूर सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। लगातार बैठकों से उनकी दूरी और चुनावी टिकट न मिलने के कारण उनके भीतर की नाराजगी अब इस रूप में बाहर आ रही है।
क्या विपक्षी दल भी ले रहे हैं इस सियासी मंथन के मजे?
अन्नामलाई को लेकर चल रही इस उठापटक पर केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि विरोधी दलों की भी पैनी नजर है। कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस मुद्दे पर चुटकी लेते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि तमिलनाडु की राजनीति में एक और नई पार्टी का जन्म होने जा रहा है, जिससे राज्य का सियासी मंथन और तेज हो गया है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि इस नई प्रस्तावित पार्टी के नाम के पीछे एक बेहद दिलचस्प लॉजिक (तर्क) छुपा हुआ है।
दूसरी तरफ बीजेपी के स्थानीय नेता सार्वजनिक तौर पर किसी भी तरह की फूट या बगावत से इनकार कर रहे हैं। उनका तर्क है कि अन्नामलाई ने जो भी नाम और शोहरत कमाई है, वह बीजेपी की बदौलत ही है और वे पार्टी के प्रति पूरी तरह वफादार रहेंगे। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है क्योंकि अन्नामलाई लगातार पार्टी की अहम बैठकों से दूरी बनाए हुए हैं।
आईपीएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आने वाले अन्नामलाई का सफर (Who is K Annamalai and his political career)
कर्नाटक कैडर के एक बेहद तेज-तर्रार और ईमानदार आईपीएस अधिकारी रहे के अन्नामलाई ने साल 2019 में खाकी वर्दी को अलविदा कह दिया था। इसके बाद के सालों में उनकी राजनीतिक यात्रा बेहद हैरान करने वाली रही है। पुलिस की नौकरी छोड़ने के बाद साल 2020 में अन्नामलाई ने बीजेपी का दामन थामा। अपनी आक्रामक भाषण शैली और जमीनी पकड़ के कारण वे बहुत जल्द पार्टी के शीर्ष नेताओं की पसंद बन गए। महज एक साल के भीतर, यानी 2021 में उन्हें तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। इस दौरान उन्होंने पूरे तमिलनाडु में आक्रामक रैलियां कीं और सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच बीजेपी को एक मजबूत विकल्प के रूप में खड़ा किया।
फिलहाल अफवाहों के बीच खबर है कि अन्नामलाई दिल्ली में बीजेपी के बड़े राष्ट्रीय नेताओं और प्रभारी नितिन नबीन से मुलाकात करने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि दो दिनों के बाद जब अन्नामलाई मीडिया के सामने आएंगे, तो वे बीजेपी के साथ अपनी नई पारी की शुरुआत की घोषणा करते हैं या फिर तमिलनाडु की राजनीति को 'कॉकरोच जनता पार्टी' की तरह एक नया सियासी विकल्प देते हैं। पूरी नजरें अब उनके अगले 48 घंटों के फैसले पर टिकी हैं।














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