दिल्ली के किसानों को राहत! फसल बर्बाद हुई तो अब मिलेंगे ₹75,000 प्रति हेक्टेयर, CM रेखा गुप्ता का बड़ा ऐलान
Delhi Farmers: दिल्ली सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए फसल नुकसान मुआवजे में भारी बढ़ोतरी का फैसला किया है। लगातार बारिश, जलभराव और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के लिए यह फैसला किसी राहत पैकेज से कम नहीं माना जा रहा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में फसल क्षति पर मिलने वाली आर्थिक सहायता को बढ़ाकर 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर करने को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से राजधानी के 10 हजार से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुआवजा बढ़ाने का फैसला क्यों लिया गया?
दिल्ली में अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान हुई भारी बारिश और नालों के उफान के कारण कई इलाकों में खेतों में पानी भर गया था। इससे किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। राजस्व विभाग द्वारा किए गए विस्तृत सर्वेक्षण में पाया गया कि प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान 100 प्रतिशत तक पहुंच गया था।
इसी रिपोर्ट के आधार पर दिल्ली सरकार ने प्रभावित किसानों को राहत देने का फैसला लिया। सरकार का मानना है कि जब प्राकृतिक कारणों से किसानों को नुकसान होता है, तब प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह उनके साथ खड़ा रहे और समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराए।
पहले कितना मिलता था, अब कितना मिलेगा?
अब तक दिल्ली में फसल नुकसान पर किसानों को 20 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता दी जाती थी। यह व्यवस्था वर्ष 2015 से लागू थी और पिछले एक दशक से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ था। अगर इसे हेक्टेयर के हिसाब से देखा जाए तो यह राशि लगभग 49,421 रुपये प्रति हेक्टेयर बैठती थी।
लेकिन खेती की बढ़ती लागत, बीज, खाद, मजदूरी और सिंचाई के खर्च को देखते हुए सरकार ने इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया है। यानी अब किसानों को पहले की तुलना में काफी अधिक राहत राशि मिलेगी।
कितने किसानों को मिलेगा फायदा?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार दिल्ली में कुल 10,977.44 एकड़ कृषि भूमि प्रभावित हुई थी, जो लगभग 4,442.41 हेक्टेयर के बराबर है। सरकार ने इस सहायता के लिए 33.32 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। अनुमान है कि इस फैसले का लाभ राजधानी के 10 हजार से अधिक किसानों तक पहुंचेगा।
किसे मिलेगा मुआवजा और कौन रहेगा बाहर?
सरकार ने साफ किया है कि यह सहायता केवल उन किसानों को मिलेगी जिनके नाम भूमि का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज है।
हालांकि कुछ श्रेणियों को इस योजना से बाहर रखा गया है:
- कंपनियों के स्वामित्व वाली जमीन
- ग्राम सभा की भूमि
- स्थायी चारदीवारी वाले फार्महाउस प्लॉट
इन श्रेणियों की जमीन पर हुए नुकसान के लिए यह आर्थिक सहायता लागू नहीं होगी।
100% नुकसान वालों को पूरी सहायता
पहले की व्यवस्था में फसल क्षति के अनुपात के आधार पर सहायता राशि दी जाती थी। यदि नुकसान 70 प्रतिशत से अधिक होता था, तभी पूरी सहायता मिलती थी। लेकिन इस बार प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का स्तर बेहद गंभीर पाया गया। इसलिए कैबिनेट ने फैसला लिया कि जिन किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट हुई है, उन्हें सीधे 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की पूरी सहायता राशि दी जाएगी।
किसानों के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
दिल्ली जैसे शहरी राज्य में खेती का दायरा सीमित है, लेकिन हजारों परिवार आज भी कृषि पर निर्भर हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को दोबारा खेती शुरू करने में मदद करेगा। साथ ही यह संदेश भी देता है कि सरकार कृषि क्षेत्र में होने वाले नुकसान को लेकर संवेदनशील है और राहत देने के लिए तैयार है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो दिल्ली सरकार का यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिनकी मेहनत पिछले साल बारिश और जलभराव की वजह से खेतों में ही बह गई थी। अब उन्हें पहले से अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी, जिससे वे अपनी अगली फसल की तैयारी बेहतर तरीके से कर सकेंगे।














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