Pakistan Lobbying: ऑपरेशन सिंदूर के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका में बहाए करोड़ों, FARA रिपोर्ट से खुली पोल
Pakistan Lobbying: पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए तनाव के दौरान भारत ने अमेरिका से बीच-बचाव यानी मध्यस्थता की मांग की थी। लेकिन अब अमेरिकी सरकारी दस्तावेजों से एक अलग तस्वीर सामने आई है। अमेरिकी रिकॉर्ड बताते हैं कि पाकिस्तान खुद वॉशिंगटन में अपनी पहुंच बढ़ाने और अमेरिकी नीति निर्माताओं को प्रभावित करने के लिए हर महीने लगभग 1 मिलियन डॉलर यानी करीब 10 लाख डॉलर खर्च कर रहा था। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान घरेलू आर्थिक संकट से भी जूझ रहा था। जानिए पाकिस्तान ने ये पैसा कहां, कैसे और कब खर्च किया।
FARA दस्तावेजों में सामने आई पूरी कहानी
अमेरिका के Foreign Agents Registration Act (FARA) के तहत जमा किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, पाकिस्तान वॉशिंगटन में लॉबिंग गतिविधियों पर सालाना लगभग 10 से 12 मिलियन डॉलर खर्च करता है। यह खर्च उस दौर में भी जारी रहा जब दक्षिण एशिया में तनाव चरम पर था। इन कोशिशों का मकसद अमेरिकी राजनीतिक, रक्षा और आर्थिक नीति निर्माताओं तक लगातार पहुंच बनाए रखना और पाकिस्तान के पक्ष को मजबूत करना था।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और तेज हुई लॉबिंग
मई 2025 में भारत द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान की लॉबिंग गतिविधियां और भी तेज हो गई थीं। FARA रिकॉर्ड बताते हैं कि इस दौरान पाकिस्तानी एजेंटों और अमेरिकी संस्थानों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। दस्तावेज यह भी दिखाते हैं कि पाकिस्तान ने सैन्य तनाव के दौरान अपनी राजनायिक स्तर की कोशिशों को भी काफी बढ़ा दिया था।
क्या है लॉबिंग और कैसे करती है काम?
विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव ने से बातचीANI त में कहा कि पाकिस्तान की लॉबिंग में कई अमेरिकी फर्मों के साथ कई करार शामिल हैं। इन फर्मों का काम अमेरिकी सांसदों, अधिकारियों और प्रभावशाली नीति निर्माताओं तक पहुंच बनाना होता है। सचदेव के मुताबिक वॉशिंगटन में 1.2 मिलियन डॉलर का लॉबिंग कॉन्ट्रेक्ट कोई असामान्य बात नहीं है, क्योंकि कई देश अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे समझौते करते हैं।
हर महीने कहां खर्च हो रहे हैं लाखों डॉलर?
सार्वजनिक FARA रिकॉर्ड के मुताबिक पाकिस्तान फिलहाल वॉशिंगटन में लॉबिंग पर लगभग 9 लाख डॉलर हर महीने खर्च कर रहा है। एक कॉन्ट्रेक्ट के तहत पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री के लिए अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठकें आयोजित करने के बदले 50,000 डॉलर हर महीने दिए जाते हैं।वहीं एक दूसरी लॉबिंग फर्म को 250,000 डॉलर महीने का भुगतान किया जाता है। इस फर्म का काम अमेरिका और पाकिस्तान के बीच व्यापार तथा आर्थिक संबंधों से जुड़े मुद्दों पर काम करना है।
25 हजार डॉलर से 12 लाख डॉलर तक पहुंचा कॉन्ट्रेक्ट
सचदेव के अनुसार एक लॉबिंग फर्म को अक्टूबर में पहली बार 25,000 डॉलर प्रति महीने के हिसाब से ठेका दिया गया था। लेकिन हाल ही में उसी फर्म के साथ 1.2 मिलियन डॉलर का बड़ा समझौता किया गया है। इसे वॉशिंगटन में पाकिस्तान की बढ़ती लॉबिंग रणनीति का संकेत माना जा रहा है।उन्होंने कहा कि विदेशी सरकारों द्वारा बड़े लॉबिंग कॉन्ट्रेक्ट करना अमेरिका की राजनीति में आम बात है।
आसिम मुनीर के दावों से उलट दिखी तस्वीर
वॉशिंगटन में पाकिस्तान की बढ़ती लॉबिंग का रिकॉर्ड पाकिस्तान के सेना प्रमुख और बाद में फील्ड मार्शल बने जनरल आसिम मुनीर के बयानों से मेल नहीं खाता। रावलपिंडी स्थित जनरल मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मुनीर ने दावा किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अमेरिका से युद्धविराम के लिए मध्यस्थता की मांग की थी।
क्या कहा था पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने?
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के मुताबिक, आसिम मुनीर ने कहा था कि भारत ने अमेरिकी लीडरशिप के जरिए से मध्यस्थता में रुचि दिखाई थी और पाकिस्तान ने क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। हालांकि FARA दस्तावेज बताते हैं कि इसी अवधि में पाकिस्तान की ओर से अमेरिकी संस्थानों के साथ लगातार और गहन संपर्क बनाए रखा गया था।
चार दिनों में दर्ज हुईं 60 लॉबिंग गतिविधियां
रिकॉर्ड के मुताबिक 6 मई से 9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान की ओर से लगभग 60 अलग-अलग लॉबिंग गतिविधियां दर्ज की गईं। इनमें अमेरिकी संसद यानी कैपिटल हिल, पेंटागन और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग तक पहुंच बनाने के प्रयास शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि यही वह समय था जब ऑपरेशन सिंदूर अपने सबसे संवेदनशील चरण में था।
ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने क्या किया था?
भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 6 और 7 मई 2025 की रात भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकवाद से जुड़े नौ ठिकानों पर सटीक और समन्वित हमले किए थे। भारत ने इस कार्रवाई को पहलगाम आतंकी हमले का सीधा जवाब बताया था।
साथ-साथ चलती रही जंग और लॉबिंग
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक तरफ जमीनी स्तर पर मिलिट्री ऑपरेशन चल रहे थीं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान अमेरिकी सांसदों, रक्षा अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों तक अपनी पहुंच मजबूत करने में जुटा था। FARA रिपोर्ट बताती हैं कि इस दौरान पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रतिक्रिया और माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए काफी पैसे खर्च किए थे। यानी जब सीमा पर सैन्य गतिविधियां चल रही थीं, उसी समय वॉशिंगटन के गलियारों में पाकिस्तान अपनी बात को प्रभावशाली बनाने के लिए करोड़ों रुपये बह रहा था।
इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।















Click it and Unblock the Notifications