Indian Army Chief Fake Video: भारत के खिलाफ बड़ी साज़िश! आर्मी चीफ के नाम पर पाकिस्तान फैला रहा था खतरनाक झूठ

Indian Army Chief Fake Video: सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के नाम से एक वीडियो तेजी से वायरल किया जा रहा है। वीडियो में दावा किया गया कि उन्होंने भारत और तालिबान के संबंधों को लेकर कोई बयान दिया है। हालांकि, सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी पीआईबी ने जांच के बाद इस दावे को पूरी तरह फर्जी बताया है।

एजेंसी के मुताबिक वीडियो को डिजिटल तरीके से एडिट किया गया है और उसमें जो बयान सुनाई दे रहा है, वह असली नहीं है। इस मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर फैल रहे फेक कंटेंट और AI आधारित प्रोपेगेंडा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

Indian Army Chief Fake Video

General Upendra Dwivedi fake video: सेना प्रमुख के नाम पर वायरल वीडियो का सच

वायरल वीडियो में दावा किया गया था कि सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारत और तालिबान के बीच रिश्तों को लेकर टिप्पणी की है। लेकिन पीआईबी फैक्ट चेक की जांच में यह दावा पूरी तरह गलत निकला। एजेंसी ने साफ किया कि जनरल द्विवेदी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है। जांच के दौरान वीडियो की पड़ताल की गई, जिसमें कई तकनीकी गड़बड़ियां मिलीं। इसके बाद यह पुष्टि हुई कि वीडियो को गलत जानकारी फैलाने के मकसद से तैयार किया गया था।

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डिजिटल एडिटिंग और AI का इस्तेमाल कैसे हुआ?

जांच में सामने आया कि वायरल वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। वीडियो में कथित बयान को बाद में जोड़कर ऐसा दिखाया गया मानो सेना प्रमुख खुद यह बात कह रहे हों। एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI और डीपफेक टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से इस तरह के फर्जी वीडियो बनाना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। यही वजह है कि अब किसी भी वायरल वीडियो को सच मानने से पहले उसकी जांच करना बेहद जरूरी हो गया है।

भारत विरोधी प्रोपेगेंडा का हिस्सा बताया गया मामला

पीआईबी फैक्ट चेक यूनिट के अनुसार यह मामला सिर्फ एक फर्जी वीडियो का नहीं है, बल्कि भारत विरोधी प्रोपेगेंडा कैंपेन का हिस्सा माना जा रहा है। ऐसे कंटेंट का मकसद भारतीय सेना, सरकार और संस्थानों के बारे में भ्रम पैदा करना होता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की भ्रामक सामग्री तेजी से फैलती है और कई लोग बिना जांच किए उसे शेयर भी कर देते हैं। इससे गलत जानकारी लाखों लोगों तक पहुंच जाती है।

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पहले भी राजनाथ सिंह को लेकर फैलाया गया था झूठ

यह पहला मामला नहीं है जब किसी बड़े भारतीय नेता या अधिकारी के नाम पर फर्जी बयान वायरल किया गया हो। इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लेकर भी सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि उन्होंने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को भारत के समर्थन से जुड़ा बयान दिया है। बाद में पीआईबी की जांच में यह दावा भी पूरी तरह झूठा निकला। सरकार ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध पोस्ट, वीडियो या फोटो को शेयर करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से उसकी पुष्टि जरूर करें।

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