'8 लाख हस्ताक्षर, 1 करोड़ प्रभावित', CJP प्रमुख ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन का किया ऐलान
CJP Abhijeet Deepke: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर देश की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। दीपके का दावा है कि नीट, सीबीएसई, एसएससी और सीयूईटी जैसी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों से एक करोड़ से अधिक छात्र प्रभावित हुए हैं, जबकि उनकी ऑनलाइन याचिका को अब तक 8 लाख से ज्यादा लोगों का समर्थन मिल चुका है।
6 जून को दिल्ली में करेंगे विरोध-प्रदर्शन
अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वे 6 जून को भारत लौटकर दिल्ली में ऑफलाइन विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति लेने के लिए पहले संसद मार्ग पुलिस स्टेशन जाएंगे। दीपके ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वे "शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही" की मांग को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं।

2. 8 लाख हस्ताक्षर, 1 करोड़ छात्र हुए प्रभावित
CJP प्रमुख के अनुसार उनकी याचिका पर अब तक 7,94,518 (लगभग 8 लाख) लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने दावा किया कि नीट (22 लाख), सीबीएसई (17 लाख), सीयूईटी (16 लाख) और एसएससी जीडी (40 लाख) परीक्षाओं को मिलाकर एक करोड़ से अधिक छात्र विभिन्न स्तरों पर प्रभावित हुए हैं।
दीपके का आरोप- छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ
दीपके ने आरोप लगाया कि पेपर लीक, तकनीकी खराबियों और प्रशासनिक खामियों के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि कई छात्रों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आईं।
सोशल मीडिया पर
दीपके ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों-लखनऊ, जयपुर, महाराष्ट्र और दिल्ली-में भी इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, विपक्षी नेताओं ने भी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और सरकार की आलोचना की है।
नीट-यूजी पेपर लीक की सीबीआई कर रही जांच
हाल ही में नीट-यूजी पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है। वहीं, सीयूईटी और अन्य परीक्षाओं में तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने सुधारात्मक कदम उठाने का दावा किया है।
याद रहे इस पूरे मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली और शिक्षा प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है, जबकि छात्रों के बीच असंतोष और चिंता का माहौल बताया जा रहा है।












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