'नशीली दवाओं के नेटवर्क की हुई मैपिंग, सलाखों के पीछे होंगे अपराधी', मादक पदार्थों की तस्करी पर बोले अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) पूरे देश में जांच कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर अंतर-राज्यीय जांच की जरूरत है तो एनसीबी प्रत्येक राज्य की मदद करने के लिए तैयार है।

मादक पदार्थों की तस्करी पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में केंद्र की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि सरकार ने राज्यों में नशीली दवाओं के नेटवर्क की मैपिंग की है और अपराधी अगले दो वर्षों में सलाखों के पीछे होंगे। अमित शाह बुधवार को लोकसभा में नियम 193 के तहत 'देश में नशीली दवाओं के दुरुपयोग की समस्या और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों' पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे थे।
नशा एक गंभीर समस्या है
गृह मंत्री ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों ने 472 जिलों में मादक पदार्थों की आपूर्ति के मार्गों की पहचान की है। इन क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में नशीली पदार्थ जब्त की है। अमित शाह ने कहा कि हमने पूरे राज्यों में ड्रग नेटवर्क की मैपिंग की है। अपराधी कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगले दो साल में ऐसी स्थिति आएगी कि वे सलाखों के पीछे होंगे। उन्होंने कहा कि नशा एक गंभीर समस्या है जो पीढ़ियों को नष्ट कर रही है और नशे से होने वाले मुनाफे का उपयोग आतंकवाद के लिए भी किया जा रहा है।
नशा के खिलाफ केंद्र की जीरो-टॉलरेंस नीति
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) पूरे देश में जांच कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर अंतर-राज्यीय जांच की जरूरत है तो एनसीबी प्रत्येक राज्य की मदद करने के लिए तैयार है। यहां तक कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) भी राज्यों की मदद कर सकती है। शाह ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ केंद्र की जीरो-टॉलरेंस नीति को भी दोहराया।
राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ लड़ना होगा
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की नीति बहुत स्पष्ट है। मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि 2006-2013 के बीच 22.40 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया, जबकि 2014-2022 के बीच 62.60 लाख किलोग्राम मादक पदार्थ जब्त किया गया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले 23,000 करोड़ रुपये की नशीली दवाएं जब्त की गई थीं, जबकि अब 97,000 करोड़ रुपये की दवाओं को जब्त कर जलाया गया है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक साथ नशीली दवाओं के खतरे के खिलाफ लड़ना होगा। हमें सीमाओं, बंदरगाहों और हवाई अड्डों के माध्यम से नशीली दवाओं के प्रवेश को रोकने की जरूरत है।
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