झारखंड में सूखे की स्थिति की समीक्षा के लिए हेमंत सोरेन ने की हाई लेवल मीटिंग, किसान और मजदूरों को दी राहत
रांची, सितंबर 03। राज्य में सूखे की स्थिति की समीक्षा करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक हाई लेवल मीटिंक की। इस बैठक में अधिकारियों से राज्य के विभिन्न जिलों और प्रखंडों में हुई अल्पवृष्टि तथा फसलों की रोपाई की विस्तृत जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सूखे से किसानों-पशुपालकों और मजदूरों के साथ ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लोगों को राहत देने के लिए अति शीघ्र विस्तृत योजना तैयार करें।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट तौर पर कहा कि सूखे से निपटने के लिए सभी संबंधित विभाग विस्तृत कार्य योजना तैयार करें। कृषि, पशुपालन, सिंचाई, ग्रामीण विकास, मनरेगा और पेयजल समेत अन्य क्षेत्र में योजनाओं को बनाकर किसानों एवं मजदूरों को उसका लाभ देना सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने सूखे की स्थिति को देखते हुए मिट्टी से जुड़े कच्चे कार्य शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में कच्ची सड़क निर्माण, तालाब एवं डोभा निर्माण, खेतों में मेढ़ निर्माण शुरू करने को कहा है, ताकि किसानों और मजदूरों को इनसे जोड़कर राहत पहुंचाया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे की वजह से राज्य से किसानों और मजदूरों का पलायन नहीं हो, इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसानों मजदूरों और अन्य प्रभावित लोगों को किस तरह रोजगार से जोड़ सकते हैं। उन्हें मजदूरी देने की क्या व्यवस्था हो।
मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने बताया कि 15 अगस्त तक राज्य में जो बारिश की स्थिति है, उसके मुताबिक 131 प्रखंड मध्यम और 112 प्रखंड गंभीर सूखे की स्थिति में आते हैं। वहीं, पूरे प्रदेश में अब तक मात्र 37.19 प्रतिशत फसलों की बुआई हो पाई है। इसमें धान की रोपनी 30 प्रतिशत, मक्का की 63 .81, दलहन की 44.95, तिलहन की 40.67 और मोटे अनाज की 28.87 प्रतिशत रोपनी और बुआई हो सकी है।












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